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पुतिन ने एक झटके में तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति को तमीज सिखा दी

तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति के साथ मुलाकात में एक ऐसी बात हुई कि पुतिन ने दिल जीत लिया.

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रूस में राष्ट्रपति चुनाव होने से पहले ही पता था कि पुतिन जीतने वाले हैं. उनके सामने कोई चुनौती नहीं है. उनकी ताकत के आगे फिलहाल कोई ठहरता नहीं दिख रहा है. बल्कि पुतिन के सामने सबसे बड़ी राजनैतिक चुनौती शायद अपना उत्तराधिकारी चुनने की है. उन्हें कभी तो जाना होगा. रूस का लोकतंत्र बस लोकतंत्र जैसा दिखता है, असल में डेमोक्रैसी जैसा कुछ है नहीं वहां. इसीलिए पुतिन के बाद सत्ता किसके हाथ में होगी, इसे तय करने में जनता की ज़ीरो भूमिका होगी.
व्लादीमिर पुतिन. रूस के राष्ट्रपति हैं. यूरोप और अमेरिका की आंखों की किरकिरी. बहुत लोग उन्हें हद नापसंद करते हैं. हमको ऐसा नहीं लगता. पुतिन अकेले नहीं, जो बुरे हैं. उतने बुरे तो कतई नहीं हैं, जितना पश्चिमी मीडिया बताता है. अभी उन्होंने एक बड़ा भला काम किया. ऐसे किया कि दिल जीत लिया. बिना कुछ कहे उन्होंने तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति को तमीज सिखाई. जानवरों संग पेश आने की तमीज. कुछ कहा नहीं. बस करके बता दिया. अगर आपको जानवरों से मुहब्बत है, तो पुतिन के इस वीडियो पर आपका भी दिल आ जाएगा. थोड़ी मुस्कान तो पक्का आ जाएगी.
तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति से तोहफे में मिले कुत्ते को चूमते पुतिन. इस तस्वीर में कुत्ते के लिए पुतिन का जो प्यार दिख रहा है, वो बनावटी नहीं है. एकदम स्वाभाविक है.
तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति से तोहफे में मिले कुत्ते को चूमते पुतिन. इस तस्वीर में कुत्ते के लिए पुतिन का जो प्यार दिख रहा है, वो बनावटी नहीं है. एकदम स्वाभाविक है.

7 अक्टूबर को पुतिन का जन्मदिन था, इसी का तोहफा मिला उन्हें हुआ यूं कि पिछले हफ्ते पुतिन का जन्मदिन था. 7 अक्टूबर को. तुर्कमेनिस्तान एक देश है. 1991 में सोवियत संघ के बिखरने से पहले तक उसी का हिस्सा था. इसके राष्ट्रपति हैं गुरबानगुली बेरडिमुखामेदोव. ये मॉस्को आए पुतिन से मिलने. उन्होंने पुतिन को गिफ्ट दिया. हैपी बिलेटेड बर्थडे का. नेताओं और राष्ट्राध्यक्षों के बीच ये खूब होता है. गिफ्ट का लेन-देन. इसको 'गिफ्ट डिप्लोमेसी' कहते हैं. पहले से पता करके रखते हैं कि फलां स्टेट हेड को क्या पसंद है.
तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति ने जिस तरह से कुत्ते को पकड़ा है, उसे देखकर बहुत गुस्सा आ रहा है. जानवर को पकड़ने का ये कितना भद्दा तरीका है.
तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति ने जिस तरह से कुत्ते को पकड़ा है, उसे देखकर बहुत गुस्सा आ रहा है. जानवर को पकड़ने का ये कितना भद्दा तरीका है.

जानवरों से बहुत लगाव है, सो गिफ्ट में मिला कुत्ता पुतिन को जानवरों से बड़ा लगाव है. कुत्तों से तो हद प्यार है उनको. कई कुत्ते हैं उनके पास. बेरडिमुखामेदोव ने पुतिन को एक पिल्ला तोहफे में दिया. सफेद रंग का. सेंट्रल एशियन शेफर्ड नस्ल का. बेरडिमुखामेदोव के साथ आई टीम के लोग एक पिंजड़ा लेकर कमरे में आए. पिंजड़ा खोलकर कुत्ते को निकाला गया. फिर बेरडिमुखामेदोव ने कुत्ते को उठाया. उसके गर्दन के पास की चमड़ी को पकड़कर. बेचारे कुत्ते को हवा में उठा दिया. जैसे कोई प्रदर्शनी लगी हो. जैसे हाथ में कोई सामान थाम रखा हो. बहुत गलत था इस तरह से उसे उठाना. कुत्ते को बिल्कुल अच्छा नहीं लगा होगा. ऐसे पकड़ा जाना किसको पसंद आएगा भला! पुतिन ने कुछ कहा नहीं, बस किया और दिल जीत लिया ये देखकर पुतिन अपनी कुर्सी से उठे. उन्होंने बेरडिमुखामेदोव के हाथ से कुत्ता ले लिया. ठीक इसी जगह पर पुतिन ने दिखाया कि क्यों उन्हें 'एनिमल लवर' कहते हैं. पुतिन ने बेहद प्यार से, बहुत संभालकर उस पिल्ले को गोद में थामा. उसे सहलाया. पुचकारा. ऐसे ही, जैसे करना चाहिए. बेरडिमुखामेदोव और पुतिन के बर्ताव में जमीन-आसमान का अंतर था.
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पुतिन ने जिस तरह से कुत्ते को थामा हुआ है, उसमें उनका अनुभव साफ दिख रहा है. जानवरों के साथ समय बिताने का अनुभव, उनके साथ अच्छी तरह से पेश आने का अनुभव.

जानवरों के साथ बहुत खुश नजर आते हैं पुतिन जानवरों के साथ पुतिन की खूब तस्वीरें आती हैं. अलग-अलग जानवरों के साथ. बाघ, शेर, पोलर बीयर. भांति-भांति के जानवर. लोग बड़ा आश्चर्य करते हैं. इतना रफ-टफ इंसान, जिसे दुनिया इतनी क्रूर समझती है, वो जानवरों के सामने आते ही कैसे मोम-सा नर्म हो जाता है. पुतिन जब कभी जानवरों के साथ होते हैं, तब बहुत सहज दिखते हैं. कुत्तों के लिए बहुत खास जगह है उनके दिल में. उन्हें अक्सर तोहफे में भी कुत्ते मिलते हैं. हमने बताया था ना, गिफ्ट डिप्लोमेसी. एक बार खबर आई थी. जापान के राजदूत ने पुतिन को तोहफे में एक कुत्ता देने की कोशिश की थी. पुतिन ने लेने से इनकार कर दिया था पर. तोहफा देना जब कूटनीति का हिस्सा हो सकता है, तो तोहफे को न लेना भी अपने हिस्से की कूटनीति है.
जानवरों के साथ खेलते, मस्ती करते और उनका ख्याल रखते पुतिन की तस्वीरें आएदिन मीडिया में आती रहती हैं. जब पुतिन के बारे में बात की जाए, तो उनके व्यक्तित्व का ये पहलू नजरंदाज नहीं किया जाना चाहिए.
जानवरों के साथ खेलते, मस्ती करते और उनका ख्याल रखते पुतिन की तस्वीरें आए दिन मीडिया में आती रहती हैं. जब पुतिन के बारे में बात की जाए, तो उनके व्यक्तित्व का ये पहलू नजरंदाज नहीं किया जाना चाहिए.

पुतिन की इस भलमनसाहत पर तो किसी को शक नहीं होगा अगर कोई पक्षपात न करे, तो पुतिन से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकेगा. दुनिया में इतनी जगहों पर लड़ाई लड़ रहे अमेरिकी राष्ट्रपति को (बराक ओबामा) शांति का नोबल प्राइज मिल जाता है. और पुतिन को मिलती है लानत! विलेन की छवि! ये दोहरापन है. एक जैसे काम करने वाले लोगों की जगह अलग-अलग क्यों? सबको लानत दो. नहीं देनी, तो किसी को भी मत दो. कोई एक क्यों बने सेक्रोसेंट? बहरहाल, हमने इस स्टोरी में राजनीति और इंटरनैशनल पॉलिटिक्स के मद्देनजर पुतिन की चर्चा तो की ही नहीं है. अभी जिस बारे में स्टोरी है, उस काम में पुतिन यकीनन बड़े माहिर हैं. जानवरों से तो यकीनन बहुत प्यार करते हैं.
पुतिन के व्यक्तित्व का शायद ये इकलौता पक्ष है, जो कि उनकी प्रचलित छवि से बिल्कुल मेल नहीं खाता है.
पुतिन के व्यक्तित्व का शायद ये इकलौता पक्ष है, जो कि उनकी प्रचलित छवि से बिल्कुल मेल नहीं खाता है.



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