ब्रिटेन में इलेक्शन के खात्मे के साथ ही नई कैबिनेट को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है. इस कैबिनेट में गृहमंत्री पद के लिए भारतीय मूल की सुएला ब्रेवरमैन का नाम सबसे आगे है. बताया जा रहा है कि लिज ट्रस ने अपनी कैबिनेट की टॉप टीम तय कर ली है. वह सुएला को गृह मंत्रालय सौंप सकती हैं. जानते हैं कौन हैं सुएला ब्रेवरमैन और क्या है उनका भारत से खास कनेक्शन-
कौन हैं भारतीय मूल की हैं सुएला ब्रेवरमैन जो बन सकती हैं ब्रिटेन की अगली गृह मंत्री?
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3 अप्रैल 1980 को सुएला ब्रेवरमैन लंदन के हैरो टाउन में पैदा हुईं. उनके पिता गोवा के रहने वाले थे. उनकी मां का जन्म मॉरीशस के तमिल परिवार में हुआ था. सुएला की पैदाइश से 20 साल पहले उनके मां बाप ब्रिटेन में आकर बसे थे.
सुएला की परवरिश वेंबले शहर में हुई. प्राइमरी की पढ़ाई उन्होंने यूक्सेंडन मैनर प्राइमरी स्कूल से पूरी की. वो कहते हैं न कि पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं. ऐसा ही कुछ सुएला के साथ भी था. पढ़ाई के दौरान ही उनकी रूचि राजनीति की तरफ दिखने लगी थी. जब उन्होंने कानून की पढाई के लिए कैम्ब्रिज के क्वींस कॉलेज में दाखिला लिया. इस दौरान वो कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी कंजर्वेटिव एसोसिएशन से जुड़ीं. कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी कंजर्वेटिव एसोसिएशन का सीधा संबंध कंजर्वेटिव पार्टी से तो नहीं था लेकिन विचारधारा का झुकाव उसी तरफ था. आगे सुएला छात्र राजनीति में अपनी पैठ बनाने लगी. जल्द ही वो एसोसिएशन की अध्यक्ष बन गईं.

सुएला पढ़ाई में तेज़ थीं. उन्होंने कई स्कॉलरशिप्स हासिल की. जिनकी बदौलत वो पहुंची फ्रांस. फ्रांस के पैंथियन-सोरबोन विश्वविद्यालय में उन्होंने यूरोप और फ्रांस के कानून की पढ़ाई की. मास्टर्स डिग्री हासिल की.
सुएला के राजनैतिक करियर की शुरुआत हुई 2003 में. ब्रिटेन के ब्रेंट शहर में इलेक्शन होने थे. कंज़र्वेटिव पार्टी के कैंडिडेट की एक लिस्ट जारी हुई. लिस्ट में सुएला का नाम पहले से मौजूद था लेकिन सुएला ये चुनाव नहीं लड़ना चाह रही थीं. इसलिए उन्होंने अपनी मां उमा फर्नांडिस को खड़ा किया. उनके लिए कैंपेनिंग शुरू कर दी. सुएला की कैंपेनिंग ऐसी थी कि इस पर सबकी नज़र पड़ी. कैंपेनिंग की चर्चा इतनी बढ़ी कि उन्हें गार्जियन अखबार ने बातचीत के लिए बुलाया और ‘द रोड टू नंबर 10’ नाम के आर्टिकल में जगह दी. इस चुनाव में सुएला की मां उमा की जीत हुई और वो पार्षद बनीं.
फिर आया साल 2005. ब्रिटेन में आम चुनाव होने थे. सुएला ने लीसेस्टर ईस्ट सीट से चुनाव लड़ा. लेकिन नाकाम रहीं. इसके बाद 2010 में उन्होंने बेक्सहिल की सीट से फिर किस्मत आजमाई लेकिन फिर नाकाम रहीं.
सुएला ने अपना पहला चुनाव 2015 में जीता और वो फेरम सीट से सांसद चुनी गईं. 2015 से 2017 तक सुएला ने एजुकेशन सिलेक्ट कमिटी में काम किया. इस कमिटी का काम देश की शिक्षा से जुड़ी पॉलिसी बनाना होता है. सुएला ब्रेग्ज़िट की समर्थक भी रही हैं. साल 2020 में बोरिस जॉनसन सरकार के दौरान उन्हें अटॉर्नी-जनरल का पद मिला.
सुएला का राजनितिक करियर वैसे तो साफ़-सुथरा रहा है लेकिन हाल ही में अपने एक बयान को लेकर वो विवादों में घिर गईं थीं. एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा था कि जो बच्चे अपना लिंग बदलना चाहते हैं, उन्हें ब्रिटेन के स्कूलों में अलग से माहौल उपलब्ध कराने की ज़रूरत नहीं है. साथ ही ऐसे बच्चों पर कोई ज़ोर ज़बरदस्ती नहीं है कि उन्हें किसी अलग नाम से बुलाया जाए या वे अलग ढंग के कपड़े पहने.
उनके इस बयान ने ब्रिटेन में काफी सुर्खियां बनाई. कई स्कूल की तरफ से नाराज़गी ज़ाहिर की गई. ब्रिटेन के लेफ्ट खेमे में भी इसको लेकर काफी आलोचना हुई थी. इसी साल बोरिस जॉनसन प्रकरण के बाद सुएला ने भी पीएम पद के लिए दावेदारी पेश की थी. लेकिन दूसरे राउंड में ही बाहर हो गईं. इसके बाद उन्होंने लिज़ ट्रस के लिए समर्थन का ऐलान कर दिया. जानकारों का मानना है कि सुएला को इसका फायदा मिलने जा रहा है. और वो ब्रिटेन की अगली गृह मंत्री बनने जा रही हैं. हालांकि अभी नई कैबिनेट का ऐलान नहीं हुआ है. लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सुएला का कैबिनेट में शामिल होना लगभग पक्का है. संभव है कि नई कैबिनेट में वो इकलौती भारतीय हों. इससे पहले भी गृह मंत्री के पद पर एक भारतीय को बैठाया गया था. गुजराती मूल की प्रीति पटेल पिछली सरकार में गृह मंत्री थीं.
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