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ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति का 'वेलकम' नहीं किया, विवाद हो गया, नियम क्या कहता है?

ब्लू बुक एक बहुत ही सीक्रेट डॉक्यूमेंट होती है. इस डॉक्यूमेंट के मुताबिक ही भारत के राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के दौरे का पूरा ब्यौरा और उनसे जुड़े सभी इंतजाम किए जाते हैं. इस बुक को भारत का केंद्रीय गृह मंत्रालय तैयार करता है.

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ब्लू बुक के मुताबिक ही राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के दौरे प्लान किए जाते हैं. (फोटो- इंडिया टुडे)

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शनिवार, 7 मार्च को पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में 9वीं अंतरराष्ट्रीय संथाल कांफ्रेंस में शामिल होने पहुंची थीं. इस दौरान उनके स्वागत में सूबे की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अनुपस्थिति ने एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया. इस विवाद के बीच 'ब्लू बुक' की चर्चा हो रही है. 'ब्लू बुक' क्या होता है? इसका क्या काम है? आज इस खबर में समझते हैं.

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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्लू बुक एक बहुत ही सीक्रेट डॉक्यूमेंट होता है. इस डॉक्यूमेंट के मुताबिक ही भारत के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के दौरे का पूरा ब्यौरा और उनसे जुड़े सभी इंतजाम किए जाते हैं. इस बुक को भारत का केंद्रीय गृह मंत्रालय तैयार करता है. मंत्रालय समय-समय पर इसे अपडेट करता है. ब्लू बुक की कई कॉपियां तैयार की जाती हैं. हर कॉपी का अपना अलग एक नंबर होता है. राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के दौरे की तैयारियों से जुड़े अधिकारियों को ‘ब्लू बुक’ की कॉपियां भेजी जाती हैं. यह बुक जिले के DM और पुलिस हेड की अंडर में रखी जाती हैं.  

ब्लू बुक के बारे में विशेष बात ये है कि पीएम, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति समेत तीनों विशिष्ट लोगों के दौरे का सारा ब्यौरा उनके सेक्रेटेरिएट (सचिवालय) में भेजा जाता है. उन व्यक्तियों के बारे में भी बताया जाता है, जो तीनों का स्वागत करने वाला होते हैं. साथ ही उनसे मिलने वालों की लिस्ट भी भेजी जाती है. सेक्रेटेरिएट के अप्रूवल के बाद ही कार्यक्रम तय होता है.  

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Blue Book
ममता बनर्जी (बाएं), द्रौपदी मुर्मू (बीच में), नरेंद्र मोदी (दाएं).

फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस ब्लू बुक के हिसाब से ही राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के सभी दौरे और कार्यक्रम संपन्न होते हैं. ऐसे में अगर इन विशिष्ट लोगों की यात्रा के दौरान ब्लू बुक में लिखित नियमों के साथ कोई भी छेड़छाड़ होता है तो इसे प्रोटोकॉल का गंभीर उल्लंघन माना जाता है. इसी वजह से केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल सरकार से जवाब मांगा है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इन प्रोग्राम का हिस्सा रह चुके कुछ लोगों ने बताया कि अगर किसी राज्य के दौरे पर ये तीनों विशिष्ट जन जाते हैं, तो उनके स्वागत के लिए राज्यपाल और मुख्यमंत्री की मौजूदगी जरूरी मानी जाती है. हालांकि, मुख्यमंत्री और राज्यपाल की अनुपस्थिति में मुख्यमंत्री किसी एक मंत्री को उनके स्वागत के लिए नॉमिनेट कर सकता है.

यह भी पढ़ें: बंगाल में क्या हुआ? ममता बनर्जी और राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री में 'बातों की जंग' छिड़ गई

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बता दें कि इस तरह के कई उदाहरण मौजूद हैं, जहां राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के आधिकारिक कार्यक्रमों में उस राज्य के मुख्यमंत्री शामिल नहीं हुए. लेकिन पश्चिम बंगाल में ऐसा पहली बार हुआ, जब सूबे की मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति के स्वागत के लिए किसी भी मंत्री को नॉमिनेट नहीं किया. आमतौर पर ऐसा देखने को नहीं मिलता है. इसलिए राजनीतिक हलकों में इसे असामान्य माना जाता है.

इससे पहले पश्चिम बंगाल में इस तरह का कोई मामला सामने नहीं आया. जहां राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए कोई न गया हो. मई 2021 में जब प्रधानमंत्री मोदी राज्य के दौरे पर गए थे, तब सूबे की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद एयरपोर्ट पर उनका स्वागत करने पहुंची थीं. हालांकि, ममता उनके साइक्लोन पर हुई मीटिंग में नहीं शामिल हुई थीं.

वीडियो: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की नाराजगी पर ममता बनर्जी ने क्या बोल दिया?

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