जर्मनी के एकीकरण की कहानी इसलिए भी ज्यादा मायने रखती है क्योंकि ये देश हिटलर जैसे सनकी हिंसक शासक के हाथ में रहा. जिसकी वजह से दुनिया को दूसरा विश्व युद्ध देखना पड़ा. लाखों जानें गंवानी पड़ीं.ये खाई बनी थी 1961 में, जब पूर्वी जर्मनी ने बर्लिन की दीवार बनवा दी. दोनों तरफ अविश्वास पैदा हो गया. पश्चिमी जर्मनी ने खुली इकॉनमी अपनाई और अमेरिका और यूरोप के करीबी मुल्कों में शुमार हो गया. 1982 में क्रिश्चियन डेमोक्रेट पार्टी के हेलमुट कोल पश्चिमी जर्मनी के नए चांसलर चुने गए. इनके शासनकाल में पश्चिमी जर्मनी ने बढ़िया आर्थिक तरक्की की. उधर 1989 में पूर्वी जर्मनी में कम्युनिस्ट पार्टी का पतन हो गया. 9 नवंबर 1989 को बर्लिन की दीवार तोड़ दी गई. जुलाई 1990 में सोवियत राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचोव के नरम रुख अपनाने के बाद दोनों जर्मन देशों के एकीकरण का रास्ता साफ हो गया. जंग के बाद बिखरे मुल्क 25 बरस बाद साथ आए. दीवार गिरने के एक साल से भी कम वक्त में दोनों देश एक हो गए. 3 अक्टूबर को ये एकीकरण पूरा हुआ था. 1990 से इस दिन जर्मनी में नेशनल हॉलिडे होता है. https://www.youtube.com/watch?v=KiSfHuiHQJQ इसके दो महीने बाद हेल्मट कोह्ल को दोबारा जुड़े जर्मनी का पहला चांसलर चुना गया. पश्चिमी जर्मनी ने पूर्व को दोबारा खड़ा करने के लिए 1.6 लाख करोड़ यूरो दिए और इसमें कुल खर्च आया 2 लाख करोड़ यूरो का. जर्मनी के लिए 'बर्लिन की दीवार' का गिरना बड़ी राजनीतिक घटना थी. इसी दिन 1918 में जर्मन रिपब्लिक का ऐलान किया गया था. इसी दिन 1923 में हिटलर की ओर से की गई तख्तापलट की पहली कोशिश नाकाम हो गई थी. लेकिन इसके बावजूद जर्मनी ने 9 नवंबर को अपना 'नेशनल डे' नहीं चुना. क्योंकि इस तारीख के साथ एक बड़ा दुर्योग भी जुड़ा था. इसी दिन 1938 में नाज़ियों ने पहली बार बड़े स्केल पर यहूदी विरोधी भावनाएं भड़काई थीं. इसी दिन नाज़ियों ने यहूदियों की दुकानों को नुकसान पहुंचाया, 200 से ज़्यादा यहूदी पूजा स्थलों (सिनेगॉग) को जलाया गया और 30 हजार यहूदियों को जेल भेज दिया गया था. इस हिंसा में 90 यहूदियों की मौत हो गई थी. इसलिए जर्मनी ने 9 नवंबर को मनहूस माना और 'नेशनल डे' के तौर पर 3 अक्टूबर को चुना. इससे पहले 1954 से जर्मनी अपना 'डे ऑफ जर्मन यूनिटी' 17 जून को मनाता था. आज हमारे और पाकिस्तान के रिश्ते जिस धरातल पर पहुंच चुके हैं, अफसोस की बात है कि वहां ज्यादातर लोग युद्ध को ही एकमात्र समाधान मानते हैं. बड़े भाई और छोटे भाई के बीच ये दीवार गिर जाए तो हम आर्थिक-कूटनीतिक दोनों मोर्चों पर कहीं बेहतर स्थिति में होंगे. हमने शांति चाही थी. हम आज भी शांति चाहते हैं. कल भी चाहेंगे. तोड़ दो ये दीवार! ये दीवार टूटती क्यों नहीं! https://www.youtube.com/watch?v=42ShEGxOgGM
जर्मनी दीवार तोड़ सकता है, तो हम नहीं तोड़ सकते?
रिश्ता अब तीत है. हेल-मेल अतीत है.
Advertisement

फोटो - thelallantop
रिश्ता अब तीत है.
हेल-मेल अतीत है. इधर जब हम अपने पड़ोसी देश से तीखा रिश्ता साझा कर रहे हैं, जर्मनी अपनी 'एकता' को सेलिब्रेट कर रहा है. 3 अक्टूबर को जर्मनी का नेशनल डे होता है. 1990 में पूर्वी जर्मनी और पश्चिमी जर्मनी दोबारा एक हो गए थे और 19वीं सदी में देखा गया ये सपना पूरा हो गया था. इसीलिए इसे दो देशों की 'रियूनियन' या 'यूनियन' नहीं कहा गया. इसे 'यूनिटी ऑफ जर्मनी' कहा गया.
Advertisement













