इसके लिए समय में थोड़ा सा पीछे चलना पड़ेगा.
इजिप्ट में लोग अपनी प्रेमिकाओं को ईख से बनी अंगूठी पहनाते थे. बाएं हाथ की चौथी उंगली में. अंगूठी का गोल आकार ये दर्शाता था कि दोनों के बीच के प्रेम का कोई ओर-छोर नहीं होगा. रोम में पुरुष अपनी मंगेतरों को लोहे की अंगूठी पहनाते थे. अमेरिकन जेम सोसाइटी के मुताबिक, इनमें से कुछ अंगूठियों में चाभी भी लगी रहती थी. जो दर्शाती थी कि अब उस महिला का मालिक उसका मंगेतर है.
इस तरह की तस्वीरें आपको प्रीवेडिंग शूट्स में भी दिख जाएंगी. इंगेजमेंट की अंगूठी का चलन पिछले एकाध दशक में भारत में भी जोर पकड़ चुका है. (सांकेतिक तस्वीर: पिक्साबे)सबसे पहला आधिकारिक उदाहरण मिलता है साल 1477 में. ऑस्ट्रिया के आर्कड्यूक मैक्सीमिलियन ने मेरी ऑफ बरगंडी को सोने की अंगूठी दी. उस पर एम (M) के आकार में हीरे जड़े हुए थे. इसके बाद ही राजाओं और संभ्रांत घर के लोगों के बीच अंगूठी पहनाने का कल्चर शुरू हुआ.
लेकिन असली खेला शुरू हुआ इसके लगभग चार सौ साल बाद. जब अफ्रीका में हीरे की खदानें मिलीं. 1888 में डि बियर्स नाम की माइनिंग कंपनी शुरू हुई, और इसने पूरी दुनिया की ज्यादातर हीरा खदानों पर कंट्रोल कर लिया. 1929 से 1939 तक वैश्विक मंदी चली, उसके बाद हीरों को बेचने के लिए डि बियर्स ने एक विज्ञापन बनाया. उसका स्लोगन था- हीरा है सदा के लिए.
प्रिंसेस कट, एमराल्ड कट, ओवल कट जैसे आकार और कट्स बेहद लोकप्रिय हैं इंगेजमेंट रिंग्स में. लेकिन इन सभी हीरे बेचने वालों का मालिक डि बियर्स समूह ही है. (सांकेतिक तस्वीर: पिक्साबे)हॉलीवुड के स्टार्स से कांटैक्ट किया गया. उनकी तस्वीरें मैग्ज़ीनों में छापी गईं, अंगूठी देते हुए. लोगों के भीतर ये आइडिया बिठाया गया कि हीरे बेहद दुर्लभ होते हैं. इनको पाना बहुत मुश्किल है. और अगर आपको दिखाना है कि आप अपनी मंगेतर से कितना प्यार करते हैं, तो उसे हीरे की अंगूठी देना ही सबसे सही गिफ्ट है. इस ऐड कैम्पेन ने लोगों के मन पर गहरा असर डाला, उन्होंने हीरों को सिर्फ एक महंगे पत्थर की तरह देखने के बजाए प्रेम का प्रतीक मानना शुरू कर दिया. इसका असर भी देखने को मिला. 1939 से लेकर 1979 तक सिर्फ अमेरिका में ही डि बियर्स के हीरों की बिक्री 164 करोड़ रुपए सालाना से बढ़कर 14 हजार 991 करोड़ रुपए तक पहुंच गई थी.
ये तो हुई हीरे की अंगूठी की बात, लेकिन भारत जैसे थर्ड वर्ल्ड देशों में जहां हीरा एक बड़ी आबादी की पहुंच से बाहर है. वहां भी विज्ञापनों का असर तो पड़ा ही. लोगों ने हीरे की अंगूठी के विज्ञापन को अपने बजट के हिसाब से परसीव किया. सोचा कि हीरा न सही, सोना या चांदी ही सही. अंगूठी प्यार की निशानी होती है.
विज्ञापनों के ज़रिए ये बात लोगों के मन में तो बैठा ही दी गई थी कि कम से कम अपनी दो महीने की सैलरी इंगेजमेंट रिंग पर ज़रूर खर्च करनी चाहिए. इस तरह सगाई में अंगूठी पहनाना एक ज़रूरी रिवाज़ बन गया.
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