वॉशिंगटन सुंदर को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने तीन करोड़ बीस लाख रुपये में खरीदा है. ये वॉशिंगटन का दूसरा आईपीएल है. पिछले साल ये पुणे की टीम पुणे सुपरजायंट्स के लिए खेले थे. और खेले ही नहीं, बढ़िया खेले थे. इसलिए इस साल भी इनकी मोटी बोली लगी है. लेकिन आज जिस खिलाड़ी को अपनी टीम में लेने के लिए मालिक लोग परेशान हैं, कल उसका लौंडे मजाक उड़ाया करते थे.
वॉशिंगटन सुंदर के नाम पर पिछले आईपीएल में भी बड़ी चर्चा हुई थी. और वही मौसम फिर से बन रहा है. उनकी गेंदबाजी से ज्यादा लोग उनके नाम में रूचि लेते हैं. और उन्हें देखते ही पूछ लेते हैं, 'आपका नाम वॉशिंगटन कैसे पड़ा?'

लोग उन्हें देखते ही पूछ लेते हैं, 'आपका नाम वॉशिंगटन कैसे पड़ा?'
वॉशिंगटन के पिता अपने बेटे के अजीब नाम के पीछे की कहानी कुछ इस तरह सुनाते हैं:
'मैं एक गरीब हिंदू परिवार से था. घर से दो गली दूर एक आर्मी के रिटायर्ड फौजी रहते थे. उनका नाम था पीडी वॉशिंगटन. वॉशिंगटन को क्रिकेट खेलने और देखने का खूब शौक था. वो अक्सर हमें खेलते हुए देखने आते थे.
मैं गरीब था. मगर वॉशिंगटन मेरे खर्चे उठाते थे. मेरी यूनिफार्म खरीदते, मेरी स्कूल फीस भरते, मेरे लिए किताबें लाते और अपनी साइकिल पर बैठाकर मुझे क्रिकेट खेलने के लिए मैदान में ले जाते.
वो मेरे लिए पिता जैसे थे. जब मेरा बेटा हुआ तब मैंने तय किया कि उसे वॉशिंगटन ही पुकारूंगा. मैंने तो ये भी तय किया था कि अगर मेरा एक बेटा हुआ तो उसका नाम वॉशिंगटन जूनियर रखूंगा.'

वॉशिंगटन सुंदर का जन्म पीडी वॉशिंगटन की मौत के कुछ समय बाद ही हुआ था.
वॉशिंगटन ने आईपीएल 2017 में अपना डेब्यू किया था. पुणे सुपरजायंट्स टीम में थे ये. लेकिन खेलने का मौका तब मिला था जब रविचंद्रन आश्विन को चोट के चलते टीम से बाहर होना पड़ा था. उसके बाद से वॉशिंगटन की परफॉरमेंस बेहतर होती ही देखी गई.
वॉशिंगटन ने दिसंबर 2017 में इंडिया के लिए टी-20 डेब्यू किया था. जिससे वो 18 साल की उम्र में इंडिया के सबसे युवा टी-20 खिलाडी बन गए गए. आईपीएल में सबसे कम उम्र के 'मैन ऑफ़ द मैच' का रिकॉर्ड भी इन्हीं के पास है.

पिछली बार वॉशिंगटन बच्चे थे. इस बार उन्हें एक्सपीरियंस है.
पिछली बार वॉशिंगटन बच्चे थे. इस बार उन्हें एक्सपीरियंस है. परफॉर्म करने का प्रेशर भी रहेगा. समय बातएगा कि रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु का फैसला कितना सही साबित होता है.












