स्मार्ट घोटालों के फायदे भी स्थाई होते हैं. सीबीआई कोर्ट में आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत न दे पाई. कोर्ट ने कहा अभियोजन पक्ष की दलीलों से समझ नहीं आ रहा वो साबित क्या करना चाहते हैं. एक नॉर्मल सरकारी वकील कुछ कहता था, दूसरा स्पेशल सरकारी वकील कुछ कहता था. टेलीकॉम मिनिस्ट्री के कागजात अव्यवस्थित थे, सीबीआई की चार्जशीट का बेस ही आधी-अधूरी जानकारी पर था. बेचारी सीबीआई के मुंह से बस यही न निकला कि मुकदमा तो लड़ लें माई-बाप, ये इंजीनियरी कहां से समझ पाएं कि कहां क्या हुआ?

लौल
टू जी घोटाला मतलब टूजी स्पैक्ट्रम घोटाला. स्पैक्ट्रम, 'इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पैक्ट्रम' का बेबी रूप है. अब समझिए ये कि किसी चीज का विद्युतचुंबकीय वर्णक्रम, उस चीज से विद्युत चुम्बकीय विकिरणों का अभिलक्षणिक वितरण या अक्सर केवल वर्णक्रम होता है. मुझे पता है आपको पिछली दो लाइनें घंटा समझ नहीं आई हैं, तो टू जी स्पैक्ट्रम घोटाला जीएचएएनटीए क्या समझ आएगा. आपको तो ये तक नहीं पता कि स्पैक्ट्रम को स्पैक्ट्रम लिखते हैं या स्पेक्ट्रम.
खैर लौटते हैं, उस बात पर जिस पर हम कभी गए ही नहीं थे. कनिमोझी पर.
सीबीआई की सबसे बड़ी नाकामी अगर कुछ रही है तो वो यही कि पिछले सात साल में देश को ये पता नहीं लग पाया कि कनिमोझी का नाम कनिमोझी है या कनिमोई. उनके हिन्दी विकीपीडिया में दूसरी बात ही यही लिखी है कि उनके नाम को लेकर कन्फ्यूजन है. कोई उन्हें कनिमोझी, कोई कानिमोझी, (आगे पढ़ते जाइए) कणिमोज़ी, कनिमोड़ी, कनिमोरी और कनिमोई कहकर बुलाता है.

इतने नाम तो खुद भगवान लोग भी अपने अकाउंट में नहीं रखते हैं, जितने नाम कनिमोझी को मिल गए. मैं बता रहा हूं आज पता चला है इनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले हैं. कल को ये भी पता लग सकता है कि असल घोटाला स्पैक्ट्रम में नहीं कनिमोझी के नाम में हुआ था.


बतौर भारतीय भी ये हम सबके लिए शर्मनाक है. एक तो इस मुल्क में लड़कियां आगे नहीं बढ़ पातीं. जो बढ़ भी गईं उसमें कितनी होंगी जो एक सलीके के घोटाले में नाम ला सकें. और एक लड़की ने तमाम मुश्किलों को पार करते हुए ऐसा कुछ किया तो हम उसका नाम तक कन्फर्म नहीं कर पाते!

वैसे कनिमोझी इस घोटाले से जुड़ा इकलौता ऐसा नाम नहीं हैं, जिनके नाम पर ऐसा कन्फ्यूजन हो. एक चीज और है वो है 2G. कोई उसे टूजी लिखता है और कोई 2G. फिर भी ये इतना बड़ा कन्फ्यूजन नहीं है, जितना कनिमोझी और कनिमोई के बीच का कन्फ्यूजन. और हा भाग्य! इस कन्फ्यूजन को साउथ की फ़िल्में भी न मिटा पाईं.

इसलिए उपसंहार का समय है. ज्ञान ले लीजिए 2G घोटाला भले हो लिया, 4G का ज़माना है. इंटरनेट का सही उपयोग कीजिए. नॉर्थ और साउथ का इतना भेद तो मिटा ही दीजिए कि कल को कोई घोटाले करे तो कम से कम नाम तो सही लिख पाएं.
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