The Lallantop

यहां 7 लाख लोगों पर मंडरा रहा मौत का खतरा, दुनिया के ठेकेदार बनने वाले देशों की कब पड़ेगी नजर?

सूडान अभी आग में जल रहा है और भुखमरी की तरफ़ बढ़ रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह वही है, जंग. मगर ये जंग किसी और देश से नहीं, देश की ही दो सेनाओं के बीच चल रही है.

Advertisement
post-main-image
मानवीय सहायता के लिए फ़ंड भी पर्याप्त नहीं है. (फ़ोटो - रॉयटर्स)

उत्तर-पूर्वी अफ़्रीका में एक देश है, सूडान. महाद्वीप का तीसरा सबसे बड़ा देश. गृहयुद्ध, मानवाधिकार उल्लंघन, भुखमरी और अकाल की वजह से ख़बरों में आता है. इस वक़्त भी ऐसे ही एक मानवीय संकट के बीच में है. जब दुनिया और प्रेस का ध्यान ग़ाज़ा में चल रहे युद्ध पर केंद्रित है, तब सूडान एक ऐसे अकाल (Sudan Famine) का सामना कर रहा है, जैसा बीते 40 बरसों में (इथियोपिया में आए अकाल के बाद) देखा नहीं गया. लगभग 7,56,000 सूडानी खाद्यान्न की कमी के कगार पर हैं. 

Advertisement
ये आकाल आदमी की करनी है!

साहिर लुधियानवी लिख गए हैं,

जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी?
आग और ख़ून आज बख़्शेगी, भूख और एहतियाज कल देगी

Advertisement

सूडान अभी आग में जल रहा है और भुखमरी की तरफ़ बढ़ रहा है. इसकी वजह वही है, जंग. मगर ये जंग किसी और देश से नहीं, देश की ही दो सेनाओं के बीच चल रही है. दरअसल, अप्रैल, 2023 में दो जनरलों के बीच वर्चस्व की जंग शुरू हुई. धीरे-धीरे इसने पूरे मुल्क को अपनी चपेट में ले लिया. एक साल से ज़्यादा बीत चुका है, लेकिन कोई रिज़ल्ट नहीं, कोई राहत नहीं. आम जनता पिस रही है. लोग घर-बार छोड़कर भाग रहे हैं. जनजीवन त्रस्त है. बुनियादी सुविधाएं गौण हो चुकी हैं.

कौन-कौन लड़ रहा है? दो गुट हैं: 

  • जनरल अब्देल फ़तह अल-बुरहान के नेतृत्व में सूडान आर्मी (SAF).
  • और, पैरामिलिटरी गुट रैपिड सपोर्ट फ़ोर्सेज़ (RSF). एक लाख लड़ाकों वाली इस फ़ौज की स्थापना 2013 में हुई थी. उससे पहले ये लड़ाके जंजवीद फ़ोर्स का हिस्सा थे, जिन्हें सूडान सरकार ने ही स्थानीय क़बीलों से उठाकर 2003 से 2005 तक चले दारफ़ुर नरसंहार में अपनी तरफ़ से लड़ने के लिए नियुक्त किया था. RSF को लीड कर रहे हैं, जनरल मोहम्मद हमदान दगालो. उन्हें 'हमेटी मोहम्मद' या 'लिटिल मोहम्मद' के नाम से भी जाना जाता है.

दिलचस्प ये है कि दोनों जनरल एक-दूसरे के साथी हुआ करते थे. 30 सालों तक सूडान की सत्ता को मुट्ठी से मसलने वाले ओमार अल-बशीर के ख़िलाफ़ 2019 मे प्रदर्शन हुए और उसे सत्ता से हटा दिया गया. तब ये दोनों जनरल एक साथ थे. दोनों ने इसमें अपना हित तलाशा. क़ायदे से केयर-टेकर सरकार बननी थी, लोकतांत्रिक चुनाव होने थे और चुनी हुई सरकार को सत्ता मिलनी थी. मगर इन दोनों ने मिलकर एक और तख़्तापलट कर दिया.

Advertisement

2021 में बुरहान ने सिविलियन प्रतिनिधियों को केयरटेकर सरकार से बाहर निकाल दिया और ख़ुद सर्वेसर्वा बन गया. दगालो को नई सरकार में भी पावरफ़ुल पोजिशन मिली. लेकिन दोनों के मन में एक-दूसरे को लेकर संदेह था. बुरहान को डर था कि दगालो उसकी कुर्सी खींच सकता है. वहीं, दगालो के मन में चल रहा था कि वो हमेशा पिट्ठू बनकर नहीं रह सकता. तो बुरहान ने प्लैन बनाया कि RSF को आर्मी के नियंत्रण में लिया जाए. लेकिन दगालो माना नहीं. इसका विरोध किया. बात नहीं बनी. बात बिगड़ गई. फिर अप्रैल, 2023 में युद्ध शुरू हो गया.

एक साल से ज़्यादा हो चुका है, दोनों गुट एक-दूसरे को मिटाने पर आमादा हैं. जानकारों का कहना है कि वे तब तक लड़ते रहेंगे, जब तक कि किसी एक को फ़ुल कंट्रोल हासिल नहीं हो जाता. ये उनके अस्तित्व की लड़ाई बन चुकी है. इस दौरान संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के मुताबिक़, 15,000 से ज़्यादा लोगों ने जान गंवा दी है. जून 2024 तक, 7.2 मिलियन से ज़्यादा लोग अपना घर छोड़ कर देश के अंदर अस्थायी व्यवस्था के साथ रहने को मजबूर हैं और 2.1 मिलियन से ज़्यादा देश छोड़कर भाग गए हैं.

मगर सिर्फ़ जंग कारण नहीं है

सूडान में तबाही मचाने वाला अकाल किसी एक वजह से नहीं, कई कारणों की वजह से हुआ है. जैसे:

- किसानी की उपेक्षा: दशकों से देश के कृषि क्षेत्र में पर्याप्त निवेश नहीं हुआ है. इस उपेक्षा के कारण सिंचाई सिस्टम, उर्वरक, नई तकनीकों जैसी ज़रूरी चीज़ों की कमी है.

- पर्यावरण समस्या: पैदावार की कमी का बड़ा कारण है, सूखा. और सूखे का बड़ा कारण है, जलवायु परिवर्तन. किसानों का कुछ भी उगाना हर दिन मुश्किल होता जा रहा है.

- फ़ूड सप्लाई चेन पर बाधा: जंग की वजह से खाद्य कारख़ानों और रेल-रोड नेटवर्क जैसा ज़रूरी इनफ़्रास्ट्रक्चर बर्बाद हो गया है. युद्ध ने ट्रेड रूट को भी बाधित किया है. इससे गेहूं के आयात में भारी गिरावट आई है.

ऊपर से SAF और RSF दोनों पर आरोप लगते हैं कि वो अपने नियंत्रण वाले इलाक़ों में मानवीय सहायता आने नहीं देते. इससे भूख से मर रही आबादी तक ज़रूरी दाना-पानी पहुंच ही नहीं पा रहा. सैनिकों पर ये भी आरोप हैं कि वो किसानों से पशुधन ज़ब्त कर लेते हैं.

- फ़ंडिंग की कमी: अंतर्राष्ट्रीय सहायता एजेंसियां सूडान के लोगों की ज़रूरत पूरा करने के लिए पर्याप्त धन नहीं जुटा पा रही हैं.

स्थिति कितनी ख़राब है?

इंटीग्रेटेड फ़ूड सेक्योरिटी फ़ेज़ के मुताबिक़, लगभग 7,56,000 लोग भूख के ‘भयावह स्तर’ (catastrophic levels of hunger) का सामना कर रहे हैं. इनके अलावा ढाई करोड़ से ज़्यादा लोग खाने-पीने की कमी से जूझ रहे हैं. नतीजतन लोग जान बचाने के लिए, खाने की  तलाश में पलायन कर रहे हैं. 

संयुक्त राष्ट्र की रेफ़्यूजी एजेंसी (UNHCR) के मुताबिक़, छह लाख से ज़्यादा सूडानी चाड आ चुके हैं. ये सेंट्रल अफ़्रीका का एक देश है, जिसकी सीमा सूडान से लगती है. वहां शरणार्थियों का जीना मुहाल है. विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) से जो फ़ूड पैकेट्स मिल रहे हैं, उसपर निर्भर हैं. हालांकि, WFP के पास भी प्राचूर्य फ़ंड है नहीं.

ये भी पढ़ें - भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और बेहाल अर्थव्यवस्था, साउथ अफ्रीका चुनाव में खेल होने वाला है?

इसमें एक त्रासदी और है. WFP जो पैकेट्स बनाता है, वो पोषक तत्वों और कैलरी के आधार पर बनाता है. प्रोटीन, फ़ैट्स और कार्बोहाइड्रेट की तय मात्रा के साथ. तो कभी-कभी रेफ़्यूजीज़ को अपना WFP राशन बेचना पड़ता है और वो कम पौष्टिक (लेकिन भारी) भोजन ख़रीदते हैं, जो कुछ दिनों तक पेट भर सकता है.

बच्चे भूखे नहीं हैं, मगर कुपोषित हैं. (फ़ोटो - गेटी)

27 साल की ओमीमा मूसा ने अल-जज़ीरा को बताया कि वो बाजार में अपने फ़ूड पैकेट बेच देती हैं, और सफ़ेद चावल ख़रीदती हैं. ताकि वो अपने तीन बच्चों को कुछ दिनों तक खिला सकें. भले ही ओमीमा की बच्ची की भूख मिट जाती है, लेकिन नुक़सान ये है कि उसे सही पोषण नहीं मिल रहा है, जिससे वो बीमारियों की ज़द में आ सकती है.

ओमीमा अकेली नहीं हैं. ऐसे ही कई बेसहारा परिवार हैं, जो जीने के लिए जीवन का सौदा कर रहे हैं. अनगिनत महिलाएं और बच्चे अभी भी देश की सीमा पर खड़े हैं. गर्म रेगिस्तान के बीच खाने और रहने के लिए UNHCR में रजिस्ट्रेशन कराने का इंतज़ार कर रहे हैं.

ये भी पढ़ें - अमेरिका की ग़लती ने सूडान को बर्बाद कर दिया, अब क्या रास्ता बचा है?

गार्डियन की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, अंतर्राष्ट्रीय विकास के लिए अमेरिकी एजेंसी की प्रमुख सामंथा पावर ने सूडान के लिए 315 मिलियन डॉलर (2,628 करोड़ रुपये) की मानवीय सहायता की घोषणा की थी. लेकिन फिर उन्होंने ही दावा किया कि आबादी तक शायद ही कोई सहायता पहुंच रही हो.

RSF गोदामों को लूट रहा है. भोजन और पशुधन चुरा रहा है. सबसे कमज़ोर सूडानी समुदायों में अनाज भंडारण और कुओं को नष्ट कर रहा है. वहीं, SAF ने सूडानी लोगों के प्रति अपनी ज़िम्मेदारियों का पूरी तरह से झुठलाया है. 

संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के अनुसार, 1983 से 1985 के बीच इथियोपिया में अकाल के कारण दस लाख लोग मारे गए थे. सूडान की स्थिति पर नज़र रखने वाले कहते हैं कि सूडान का अकाल और ज़्यादा घातक हो सकता है.

वीडियो: दुनियादारी: सूडान सिविल वॉर रोकने अमेरिका आया, 25 लाख लोग भूख से मर जाएंगे?

Advertisement