आज विश्व हिंदी दिवस है. वो वाला नहीं जो 14 सितंबर को मनाया जाता है. वो राष्ट्रीय हिंदी दिवस होता है. 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है साल 2006 से. इसका मकसद था कि देश से बाहर हिंदी को स्थापित किया जाए.
हिंदी भाषा की इन कमियों को कब तक सहा जाएगा?
आज एक और हिंदी दिवस है.

हिंदी कविता और कहानी के महान लेखकों, कवियों ने हिंदी के हर पक्ष पर पहले ही लिख रखा है कि अब मेरी टिप्पणी के दुस्साहस की गुंजाइश नहीं बची है.
शेखर पुस्तक से निकल पुस्तक मेले में पहुंच चुका है और कृष्ण से मिलकर संजय के जरिए धृतराष्ट्र को लल्लनटॉप किस्से सुना रहा है. तो मैं हिंदी साहित्य के छात्र और लेखकीय मजदूर की हैसियत से कुछ सवाल पूछ रहा हूं. ये वो सवाल हैं, जो हिंदी साहित्य की एमए तक की मेरी पढ़ाई में तो स्पष्ट नहीं हुए.
आखिर चंद्र बिंदु की खता क्या है?
अब तो हंस (यादव जी वाली नहीं) वाला उदाहरण भी पुराना हो चुका है. नोटबंदी की खबरों में भी जनता की रुचि नहीं बची. तो ऐसे में एक दिन क्यों न रात 8 बजे से चंद्र बिंदु का प्रयोग बंद कर दिया जाए.
Pen, Pain और Pan
तीन शब्द हैं और इनके तीन अलग-अलग उच्चारण. मगर हिंदी में लिखने में दो ही तरीके हैं. ऐसे कई उदाहरण हैं. पैन और पेन, हिंदी की इस समस्या का हल मराठी में छिपा है, मगर इसे अपनाने की कोई प्रक्रिया शुरू तो हो.
नुक्ते का हेर-फेर कब तक
बचपन में हिंदी वर्णमाला में जीवन पढ़ा. कॉलेज में एक्ज़ाम के प्रेशर में सच्चावाला प्यार हुआ, तो शायरी करते हुए पता चला कि जिंदगी नहीं ज़िंदगी होती है. अब ये नुक्ता कहां लगना चाहिए और कहां नहीं, इसके उपर जॉइंट एक्शन कमेटी बनाकर बात होनी चाहिए.
लिंग की कमज़ोरी दूर करें
बस आ रही है और ट्रक आ रहा है. इस वाक्य में दोनों का लिंग निर्धारित कैसे हुआ. बस पत्नी और ट्रक के पति होने की बात कैसे तय की गई. ऊपर से 'आता है आती है' में गलती करने का दोष अहिंदी भाषियों पर.
हिंदी की बिंदी
ये उन दिनो की बात है जब दुनिया में आधा न (न्) और आधा म (म्) अलग-अलग होता था. पता नहीं कब दोनो को बिंदी ने टेक ओवर कर लिया. अब संबंध लिखने से कैसे पता चले कि कहां आधा न है और कहां आधा म. कोई बता दे हमको भी भाइयों.
हिंदी की भाषा की तमाम वैज्ञानिकता और उसके परफेक्ट होने की महानता के बीच इन सवालों के जवाब नई और पुरानी वाली हिंदी के लोगों में से कोई दे सके, तो बताए.













