जम्मू-कश्मीर का पुंछ इलाका. 20 अप्रैल 2023 का दिन. दोपहर के बाद का समय. सेना के एक ट्रक पर आतंकियों का हमला हुआ. ट्रक को तीन तरफ से घेर कर पहले बम फेंके गए और फिर फायरिंग की गई. जिसके चलते ट्रक के फ्यूल टैंक में आग लग गई. और 5 जवानों की झुलसकर मौत हो गई. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमले की जिम्मेदारी पीपल्स एंटी-फासिस्ट ग्रुप (PAFF) नाम के एक आतंकी समूह ने ली है. इसे जैश और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों से जोड़ा जाता है. कहा जा रहा है कि ये हमला इसलिए हुआ ताकि कश्मीर में होने वाले G-20 समिट में बाधा डाली जा सके.
पुंछ आतंकी हमले के बाद भी भारत आएंगे बिलावल भुट्टो, आखिर कितनी जरूरी है SCO की बैठक?
पुंछ में हुए आतंकी हमले के कुछ ही घंटों बाद पाक विदेश मंत्रालय ने बिलावल के भारत आने की घोषणा की


और इधर कुछ ही दिनों में पाकिस्तानी विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी भी SCO यानी संघाई सहयोग संगठन की मीटिंग में हिस्सा लेने के लिए भारत आ रहे हैं. एक तरफ पाकिस्तान से क्षेत्रीय शांति, आपसी समन्वय को लेकर बैठकें, आतंकवाद को रोकने की कवायदें और दूसरी तरफ आतंकी हमलों में देश के जवानों की शहादतें. ये कहानी लंबे अरसे से चली आ रही है.
मास्टरक्लास में हम तमाम खबरों और किस्सों की वो परतें खोलने की कोशिश करते हैं, जो सतही नजर से साफ नहीं दिखतीं. पाकिस्तानी विदेश मंत्री भारत क्यों आ रहे हैं? पुंछ में हुए हमले के बाद उनके इस दौरे को लेकर क्या कहा गया? SCO क्या है? इसका एजेंडा क्या है? और बीते सालों में आतंकवाद के साए में भारत-पाकिस्तान के सम्बन्ध कैसे रहे हैं? आज विस्तार से इन सभी सवालों के जवाब तलाशेंगे.
सेना के ट्रक पर हमले में 5 जवानों की शहादत हुई है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अफ़सोस जताया है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, इसी साल जनवरी-फरवरी के दौरान जम्मू-कश्मीर पुलिस ने आर्मी यूनिट्स के लिए एक एडवाइजरी जारी की थी. इसमें बताया गया था कि आने वाले दिनों में बॉर्डर से घुसपैठ बढ़ सकती है. इसकी वजह बताई गई कश्मीर में होने वाला G-20 समिट. एडवाइजरी में ये भी कहा गया कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मस्जिदों के लाउडस्पीकर्स पर घोषणा की जा रही है कि वॉलेंटियर्स यानी आतंकी कुछ वक़्त के लिए कश्मीर में जिहाद ब्रिगेड में शामिल हो जाएं. ये भी कहा गया कि जो भी बॉर्डर पार जाने को तैयार है, उसे ट्रेनिंग दी जाएगी. G-20 समिट में रुकावट डालने के लिए हथियार भी मिलेंगे.
पुंछ में हुए आतंकी हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद का बयान भी आया. उन्होंने भी यही बात कही,
"यह काम आतंकवादियों का था. इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स के मुताबिक देश और जम्मू-कश्मीर में हो रही G20 बैठकों को देखते हुए बड़े आंतकी हमले की आंशका जताई जा रही थी."
एसपी वैद के मुताबिक, SCO मीटिंग में पाकिस्तानी विदेश मंत्री को नहीं बुलाया जाना चाहिए. वो कहते हैं,
“भारत सरकार को गोवा में होने वाली SCO मीटिंग में पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय को नहीं बुलाया जाना चाहिए, क्योंकि उनकी सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रहे भारत के कद को नुकसान पहुंचाना चाहती है. पाकिस्तान को अपने देश की भूखी जनता की परवाह नहीं है, वो तो हमारे देश में आतंकवाद को बढ़ावा देते रहना चाहते हैं.”
तो पहला सवाल ये है कि बिलावल भुट्टो जरदारी गोवा क्या करने आ रहे?
पाक विदेश मंत्री क्यों आ रहे हैं?SCO यानी शंघाई कोऑपरेशन आर्गेनाईजेशन. हिंदी में इसे शंघाई सहयोग संगठन कहते हैं. आने वाले मई के महीने में 4 और 5 तारीख को गोवा में SCO की फॉरेन मिनिस्टर्स काउंसिल यानी विदेश मंत्री परिषद् की मीटिंग है. अब पाकिस्तान की तरफ से कहा गया है कि विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी इस मीटिंग में हिस्सा लेंगे.
इंडियन एक्सप्रेस अख़बार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के विदेशी मामलों के मंत्री एस. जयशंकर ने SCO की इस मीटिंग के लिए भारतीय उच्चायोग के जरिए पाकिस्तान को न्योता भेजा था. रूस, चीन सहित SCO के अन्य सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों को भी ये इनविटेशन पहुंचा. और कल जब पुंछ में आतंकी हमले की खबर आई, उसके कुछ ही घंटों बाद पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मुमताज़ ज़हरा बलोच ने बिलावल भुट्टो के गोवा में होने वाली इस मीटिंग में शामिल होने की घोषणा की. जबकि भारत के भेजे आमंत्रण पर अभी चीनी विदेश मंत्री किन गैंग और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है. हालांकि सम्भावना है कि ये नेता मीटिंग में शामिल होंगे.
आप पूछेंगे, SCO की ये मीटिंग कितनी जरूरी है? एजेंडा क्या है? ये समझने के लिए SCO और उसके इतिहास को समझना पड़ेगा.
SCO क्या है?शंघाई कोऑपरेशन आर्गेनाईजेशन एक स्थायी अंतर-सरकारी अंतरराष्ट्रीय संगठन है. माने एक ऐसा संगठन जिसमें कई देशों की सरकारें हिस्सेदार हैं. SCO की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, इस संगठन के सदस्य देश आपसी सहयोग से कई उद्देश्यों के लिए काम करते हैं.
SCO के मुख्य उद्देश्य हैं-
- सदस्य देशों के बीच आपसी विश्वास और अच्छे पड़ोसी संबंधों को मजबूत करना.
- राजनीति, व्यापार, इकॉनमी, विज्ञान, तकनीक, सभ्यता शिक्षा, ऊर्जा, ट्रांसपोर्टेशन, टूरिज्म, पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में प्रभावी सहयोग बढ़ाना.
- शांति कायम रखने के लिए संयुक्त प्रयास करना.
- सदस्य देशों के इलाकों में सुरक्षा और स्थायित्व कायम करने का प्रयास करना.
- एक नए लोकतान्त्रिक, न्यायपूर्ण और तर्कपूर्ण राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था बनाने की ओर प्रयास करना.
SCO की इंटरनल और एक्सटर्नल पॉलिसीज भी तय की गईं हैं. इनमें आपसी भरोसे, आपसी फायदे, समान अधिकार, परामर्श, एक दूसरे की सभ्यता का सम्मान और विकास की बात की गई है.
SCO का गठन कैसे हुआ? इसका इतिहास क्या है?
SCO का इतिहास15 जून, 2001 को चीन के शंघाई शहर में SCO के गठन की घोषणा की गई. तब 6 देश इसके सदस्य थे. चीन, कजाख्स्तान, उज़्बेकिस्तान, किर्गिज़स्तान, रूसी संघ और तजाकिस्तान. इसके पहले तक उज़्बेकिस्तान को छोड़कर बाकी 5 देश शंघाई-फाइव के सदस्य थे. ये एक राजनीतिक संघ था. ये साल 1996 में शंघाई में और साल 1997 में रूस में हुए दो समझौतों पर आधारित था. इन समझौतों में देशों की सीमाओं पर तैनात फोर्सेज में कमी करने और आपसी विश्वास कायम करने की बात कही गई थी. साल 2001 में जब उज़्बेकिस्तान भी शंघाई फाइव में शामिल हो गया तो इसका नाम बदलकर शंघाई सहयोग संगठन कर दिया गया.
शुरुआत में SCO का फोकस आतंकवाद और उग्रवाद को रोकना था. इसके बाद जून 2002 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में एक शिखर सम्मेलन हुआ. जिसमें SCO का चार्टर तैयार हुआ और सभी सदस्य देशों ने इस पर साइन किए. चार्टर माने एक ऐसा दस्तावेज जो इस संगठन के स्ट्रक्चर, उद्देश्य, सिद्धांत और कामों को निर्धारित करता है. सितंबर 2003 में इस चार्टर को लागू कर दिया गया.
ड्रग स्मगलिंग और उससे दुनिया भर में आतंकवाद को की जाने वाली फंडिंग को रोकने के लिए साल 2006 में SCO ने एक प्लान की घोषणा की थी. साल 2008 में अफ़गानिस्तान के हालात सामान्य करने की कोशिश में भी SCO की भूमिका रही थी. आर्थिक सहयोग बढ़ाने के लिए भी साल 2003 में एक 20 साल के प्रोग्राम पर भी सदस्य देशों ने दस्तखत किए थे. इस कार्यक्रम का उदेश्य सदस्य देशों के बीच एक फ़्री ट्रेड ज़ोन बनाना था. अब तक भारत और पाकिस्तान SCO के सदस्य नहीं बने थे. फिर साल 2017 में कजाख्स्तान की राजधानी अस्ताना में SCO के सदस्य देशों की मीटिंग हुई. इस मीटिंग में भारत और पाकिस्तान को भी SCO के पूर्ण सदस्य देश का दर्जा दे दिया गया. इस तरह SCO के कुल 8 पूर्ण सदस्य देश हो गए. जबकि अफगानिस्तान. बेलारूस, ईरान और मंगोलिया, ये चार देश SCO के साथ बतौर ऑब्जर्वर जुड़े हैं. और 6 देश- अज़रबैजान, अर्मेनिया, कंबोडिया, नेपाल, तुर्की और श्रीलंका को SCO के डायलाग पार्टनर स्टेट्स का दर्जा मिला हुआ है.
SCO काम कैसे करता है, इसकी अंदरूनी संरचना क्या है, ये भी समझ लेते हैं.
SCO काम कैसे करता है?SCO के अन्दर कई काउंसिल हैं. जिनमें सबसे प्रमुख और निर्णायक है- Heads of State Council (HSC). सदस्य देशों के प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति इसके सदस्य होते हैं. जो साल में एक बार मीटिंग करके SCO के काम से जुड़े निर्णय लेते हैं और निर्देश जारी करते हैं.
इसके बाद Heads of Government Council यानी HGC, SCO की दूसरी सबसे प्रभावी काउंसिल है. सदस्य देशों की सरकार के बड़े पदों पर आसीन लोग इसके सदस्य होते हैं. भारत की तरफ से साल 2021 में हुई इसकी बैठक में विदेशी मामलों के मंत्री एस जयशंकर शामिल हुए थे. देशों के आर्थिक और बाकी सभी मुद्दों पर ये काउंसिल भी साल में एक बार मीटिंग करती है. SCO का सालाना बजट तय करना भी इसी काउंसिल का काम है.
SCO की एक बिज़नेस काउंसिल भी है. SCO में सदस्य देशों के को-ओर्डिनेटर्स की भी एक काउंसिल है जिसका काम SCO की सभी काउंसिल और संस्थाओं के बीच समन्वय कायम रखना है. और इन सभी काउंससिल्स के अलावा भी कई स्तरों पर सदस्य देशों के प्रतिनिधियों की मीटिंग्स होती हैं. सदस्य देशों की संसदों के स्पीकर, सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरीज, सदस्य देशों के विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री भी समय-समय पर होने वाली मीटिंग्स में हिस्सा लेते हैं. इनके अलावा, सदस्य देशों के वित्त मंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, शिक्षा मंत्री, एन्फोर्समेंट एजेंसीज और सर्वोच्च अदालतों के स्तर पर भी मीटिंग्स होती हैं.
काउंसिल्स के अलावा SCO में दो स्थायी निकाय भी हैं- एक, इसका सचिवालय, जो बीजिंग में है, और दूसरा रीजनल एंटी-टेररिस्ट स्ट्रक्चर यानी RATS. ये उज़बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में है. SCO का एक महासचिव और RATS का एक डायरेक्टर भी होता है. इनकी नियुक्ति हर तीन साल के लिए Heads of State Council द्वारा की जाती है. RATS, इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ये संस्था आतंकवाद जैसे मुद्दों से निपटने के लिए काम करती है.
ये तो थी SCO की बात. जैसा हमने पहले बताया, गोवा में SCO की फॉरेन मिनिस्टर काउंसिल की मीटिंग होनी है. इसमें पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो शामिल होंगे, ऐसा तय था. लेकिन अब हो गया है पुंछ में भारतीय सैनिकों पर हमला. बिलावल की यात्रा अब इस बात पर निर्भर होगी कि पुंछ में हुए हमले के बाद भारत और पाकिस्तान की कूटनीति क्या दिशा लेती है. माने अब बिलावल का भारत आना हो भी सकता है और नहीं भी.
और ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय संबंध और वार्ताएं, पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के चलते या तो अटकती रही हैं या दोनों देशों के बीच शांति बहाली की दिशा में ये मिलना-मिलाना बेअसर रहा है. कैसे? ये समझते हैं-
भारत और पाकिस्तान के डिप्लोमेटिक रिश्तेइसके पहले दिसंबर 2016 में पाकिस्तान के तत्कालीन विदेश मंत्री सरताज अज़ीज़, 'हार्ट ऑफ एशिया कांफ्रेंस' में हिस्सा लेने अमृतसर आए थे. तब भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज थीं. उनका स्वास्थ्य ख़राब होने की वजह से दोनों की मुलाक़ात नहीं हो पाई थी. और पीछे जाएं तो मई 2014 में तत्कालीन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ हिंदुस्तान के दौरे पर आए थे. प्रधानमंत्री मोदी के शपथ ग्रहण समारोह के मौके पर. थोड़ा और पीछे चलें तो साल 2011 में तत्कालीन पाकिस्तानी विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार भी भारत आईं. तब उनकी मुलाक़ात भारत के तत्कालीन विदेश मंत्री एसएम कृष्णा से हुई थी.
भारत के भी कुछ नेताओं ने इस बीच पाकिस्तान के दौरे किए. साल 2015 में भारत की तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज पाकिस्तान गईं. इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी भी दिसंबर 2015 में अचानक लाहौर में ठहर कर नवाज़ शरीफ़ के घर गए. लेकिन द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर करने की इन कोशिशों का नतीजा सिफ़र ही कहेंगे. क्योंकि इसके बाद पाकिस्तानी जमीन पर पलने वाले आतंकियों ने भारतीय जवानों पर तीन बड़े हमले किए. जनवरी 2016 में पठानकोट, सितंबर 2016 में उरी और फरवरी 2019 में पुलवामा हमला.
इस घटनाओं के बाद दोनों देशों के बीच संबंध और ख़राब हुए. व्यापार रिश्ते बिगड़े. बस और ट्रेन सर्विस बंद कर दी गईं. हालांकि सीमा पर युद्धविराम अब भी बरक़रार है. लेकिन कूटनीतिक मंचों पर पाकिस्तान और हिंदुस्तान की नहीं बन रही है. ताजा उदाहरण बीते साल दिसंबर का है. भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने न्यूयॉर्क में पाकिस्तान को फटकार लगाते हुए उसे 'आतंकवाद का केंद्र' कहा था. जबकि बिलावल भुट्टो ने 2002 के गुजरात दंगों को लेकर प्रधानमंत्री मोदी की आलोचना की थी. इस पर भारत के विदेश मंत्रालय ने उनकी टिप्पणियों को असभ्य कहा था. हालांकि इस साल जनवरी में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने, कश्मीर मुद्दे पर PM मोदी के साथ बातचीत की इच्छा जताई थी.
अब एक बार फिर पाकिस्तान और भारत के बीच SCO की मीटिंग में विदेश मंत्रियों के स्तर पर बातचीत की संभावना है. न्यूज़ वेबसाइट दी प्रिंट की एक खबर के मुताबिक, भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा है कि हम इस बैठक के सफल होने की उम्मीद करते हैं. उन्होंने पत्रकारों के सवाल पर किसी देश का नाम लिए बिना ये भी कहा कि किसी एक देश की भागीदारी पर ध्यान देना ठीक नहीं है. और अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी. इस मामले में आगे क्या होता है, हम आपको अपडेट देते रहेंगे.
वीडियो: दी लल्लनटॅाप शो: PM मोदी को अपशब्द कहने वाले बिलावल भुट्टो को भारत क्यों बुलाया गया?






















