क्या आप जानते हैं कि एक बार हालात ऐसे बने थे कि महातपस्वी विश्वामित्र की पत्नी ने अपने बेटे को बेच दिया था? कहानी शुरु होती है राजा सत्यव्रत से. नाम सत्यव्रत था पर आदमी घुन्ना टाइप का था. शरारतवश और कामातुर होकर उसने दूसरे की बीवी किडनैप कर ली. इससे नाराज होकर बाबूजी उसको घर से निकाल दिए. सत्यव्रत नगर के बाहर एक चांडाल के घर के पास रहने लगा. सत्यव्रत की हरकत से इंद्र भी खफा थे, इसलिए उस साल उन्होंने राज्य में बारिश नहीं की. इससे अकाल पड़ गया. महातपस्वी विश्वामित्र इस वक्त समुद्र में तपस्या कर रहे थे लेकिन उनकी पत्नी इसी राज्य में थीं. अकाल में जब खाने के लाले पड़ गए तो विश्वामित्र की पत्नी ने परिवार को जिंदा रखने के लिए अपने मझले बेटे औरस के गले में रस्सी डालकर उसे 100 गायों के बदले बेच दिया. सत्यव्रत तक यह खबर पहुंची तो उसे लगा कि विश्वामित्र का विश्वास जीतने का यही मौका है. उसने उनके बेटे को छुड़वा लिया और विश्वामित्र के पूरे परिवार का दाना पानी करने लगा. बाद में विश्वामित्र लौटे तो उन्होंने सत्यव्रत का राज-पाट भी लौटा दिया और बाद में उसकी इच्छा के मुताबिक उसे स्वर्ग का टिकट भी दिलवा दिया. महाराजा हरिश्चंद्र जो सत्य और ईमानदारी की मिसाल माने जाते हैं, वे सत्यव्रत के ही बेटे थे. स्रोत: ब्रह्मपुराण, गीता प्रेस, पेज- 23, 24
हरिश्चंद्र के पिता ने किडनैप की थी दूसरे की बीवी
नाम सत्यव्रत था पर आदमी घुन्ना टाइप का था. शरारतवश और कामातुर होकर उसने दूसरे की बीवी किडनैप कर ली.
Advertisement

Image: Reuters
Add Lallantop as a Trusted Source

Advertisement
Advertisement
Advertisement





















