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सूर्यवंशम की बेक़दरी के चलते फेल होगा स्टार्टअप इंडिया

साहब इसमें हमारे वो रिश्तेदार भी नहीं हैं, जो डेढ़ हजार में महीने भर का वाशिंग पाउडर, चाय पत्ती और मुफ्त के दो सूट पीस वाला बिजनेस प्लान लाते रहते हैं.

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Source- Youtube
प्रधानमंत्री ने स्टार्टअप इंडिया शुरू किया. जैसी कि रीत है. प्रधानमंत्री के हर सही-गलत काम में मीन-मेख निकालने की. तो इसके पहले कोई और ये कर पाए ये भला काम भी हम ही कर देते हैं. हम कहते हैं स्टार्टअप इंडिया सफल नहीं होगा और इसके पीछे वाजिब वजहें भी हैं. लेकिन उस सबसे पहले मोदी जी ये बताएं कि स्टार्टअप इंडिया के जरिए वो संदेश क्या देना चाहते हैं? क्या वो अपने 'भक्तों' को कहना चाहते हैं कि हमारे भरोसे न बैठो.  कुछ काम धंधा कर लो. अच्छे दिन वैसे ही आएंगे. या अपने विरोधियों को कहना चाहते हैं. अपने काम से काम रखो. स्टार्टअप इंडिया के सफल न होने की वजह ये होंगी.

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प्रधानमंत्री ने इसमें उन लोगों को शामिल ही नहीं किया जिनने सारा वक्त उन्हें कोसने को अपना धंधा बना रखा है.

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स्टार्टअप में वो लोग भी नहीं है, जो रेलवे स्टेशन पर उधार का बच्चा चिपकाकर भीख मांगने को अपना पेशा बना लेते हैं.

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और तो छोड़िए साहब इसमें हमारे वो रिश्तेदार भी नहीं हैं, जो डेढ़ हजार में महीने भर का वाशिंग पाउडर, चाय पत्ती और मुफ्त के दो सूट पीस वाला बिजनेस प्लान लाते रहते हैं.

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सबसे बड़ी वजह तो ये होगी कि मोदी जी ने 'हीरा ठाकुर' को उसका ब्रांड एम्बेसडर नहीं बनाया. इंटरप्रेन्योरशिप में सफलता का  उनसे बड़ा चेहरा और कहां मिलेगा?

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इस पूरी शुरुआत में उन लोगों को भी किनारे रखा गया है जो फेसबुक पर लड़कियों की फेक प्रोफाइल बनकार लड़कों को फंसा-फंसा मोबाइल रिचार्ज करवा लेते हैं. क्या उसमें दिमाग नहीं लगता?समय नहीं लगता? क्या उससे फायदा नहीं होता? क्या उसमें जोखिम नहीं होता? हर बार ध्यान रखना होता है He He He की बजाय Ha Ha Ha न सेंड हो जाए.

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दिमाग की बात चली तो ये जानिए कि आज आपने ही नए आइडियाज पर काम करने वालों की मदद करने की बात कही है. इंदौर-भोपाल इंटरसिटी में एक मियां-बीवी पिछले तीन साल से मियां के अल्सर के ऑपरेशन के बहाने पैसे कमा रहे हैं. ऐसे पुराने आइडियाज की मदद नहीं करेंगे आप? ऐसा असंवेदनशील रवैया क्यों?

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जबलपुर रेलवे जंक्शन के बाहर चार साल से एक आदमी स्कूटर लिए खड़ा रहता है. चार साल से वो अलग-अलग तरीकों से लोगों से 20 से 50 रूपए निकलवा रहा है. उसके आइडियाज,आइडियाज नहीं हैं क्या? और सब छोड़िए मांस-मंदिर-मस्जिद के बूते भी तो कईयों ने सालों से अपनी दुकानदारी चला रखी है. उनका क्या कीजिएगा मोदी जी?

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