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मोदी विरोधी भी इस बात से उनके मुरीद हो जाएंगे

गरीबों का काम किया है प्रधानमंत्री ने. न समझ में आए तो ये पढ़ो.

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फोटो - thelallantop
  दो वाकये साझा कर रहा हूं. पढ़िएगा, मस्ती के साथ पढ़िएगा. पहला. नोएडा सेक्टर 16 की झुग्गी बस्ती. रात में 1 से 2 बजे के बीच का टाइम. ग्रे कलर की हॉन्डा सिटी आकर रुकती है. ड्राइवर के साथ एक राजा बाबू उतरते हैं. फिर पीछे का दरवाजा खुलता है. सीट पर से छोटे छोटे से प्लास्टिक के पैकेट उतारे जाते हैं. फिर डिक्की खुलती है. उसमें वैसे ही तमाम पैकेट वहां से निकलते हैं. फिर झुग्गी की कुंडियां खटकाई जाती हैं. हर घर के मालिक को 50 हजार रुपए दिए जाते हैं. इस वायदे के साथ कि पांच हजार वो रख लेगा. बाकी के पैसे वापस मालिक को देगा. ये सारा पैसा एक्सचेंज करना है. बैंकों में जाकर.
दूसरा वाकया. जिला उन्नाव का छोटा सा गांव. गांव में बैठे घनश्याम अवस्थी. मुश्किल से घर का खर्च चलता है. घर में सब्जियां बो रखी हैं. वही खाता है परिवार. बाजार से सिर्फ आलू आता है. उनके बड़े भाई राधेश्याम. नखलऊ में डॉक्टर हैं. विवेकानंद अस्पताल में. उसके अलावा तेलीबाग वाले घर में भी क्लीनिक है. रात में बैठते हैं. उनके पास छोटे भाई के लिए अब तक सिर्फ प्यार था. पीएम मोदी के 8 नवंबर के 8 बजे वाले बयान के बाद उनके पास भाई के लिए बहुत कुछ है. अगले दिन वो अपनी रेनॉ डस्टर से गांव आए. उसमें से करीब 10 लाख रुपए कैश घनश्याम को दिए. और आदेश भी. कि इसको किसी भी तरह बदलकर हमको फोन करो. घनश्याम के घर में बटन वाले फोन हैं. सबसे छोटे लड़के को सोनी का छूने से चलने वाला फोन दे गए. कहा कि "ये करवा दो. इसमें से तीन तुम्हारा है."
और आज की ऐतिहासिक तारीख. यानी 14-11-2016. वैसे तो इधर प्रत्येक तारीख ही ऐतिहासिक है. लेकिन ये तारीख और ऐतिहासिक है क्योंकि पीएम ने गाजीपुर में सुबह सुबह सिंहनाद की है. उन्होंने काले धन पर सर्जिकल स्ट्राइक के बाद आज बड़ी मारके की बात कही है. कविता के शेप में. "अमीर नींद की गोली खा रहा है गरीब चैन की नींद सो रहा है." अब ऊपर के दोनों वाकये इस कविता से जोड़कर देखो. प्रधानमंत्री ने अपना वादा निभाया है. सत्ता में रहकर, संवैधानिक रूप से अमीर का पैसा गरीब की झोली में डाला है. अभी तक ऐसे कामों के लिए चोर उचक्कों की मिसालें दी जाती थीं. कोई रॉबिन हुड को बतलाता था. कोई हाजी मस्तान को आगे कर देता था. लेकिन सत्ता का आधार लेकर अमीर से पैसा उठाकर गरीब की झोली भरने वाले पहले प्रधानमंत्री बन गए हैं मोदी. ये पूंजीवाद की कमर तोड़ने जैसा है. जिस पूंजीवादी व्यवस्था को उखाड़ फेंकने और सर्वहारा के हित की अब तक सिर्फ बातें होती थीं. वो बात अब बात से आगे बढ़कर हकीकत बन रही है. इसी के साथ पीएम मोदी भी दक्षिणपंथी राजनीति से सेंटर में सेटल होने के प्रयास में हैं. कल को ये रास्ता खिसकते खिसकते समाजवाद, लेनिनवाद, मार्क्सवाद से होकर वामपंथ तक जा सकता है. अभी क्या है कि क्रांति की बात करते ही अगला चे गुएरा चुआ देता है. लगता है उसके बाद क्रांति हुई ही नहीं. अब हुई है. आंखें खोलो और देखो. अमीर का पैसा गरीब की थैली में जा रहा है. सोशल मीडिया पर युद्ध हो रहा है. कैश इतनी फुर्ती से कैश कराया गया है. इससे बड़ी और क्या क्रांति चाहिए भई? प्रधानमंत्री ने कुछ और भी मानीखेज बातें कहीं. जैसे एक बात ये थी. "जब मैं छोटा था तब लोग कहते थे मोदी जी कड़क चाय बनाना. मैंने कड़क चाय बनाई." मतलब मोदी जी कस्टमर का कहा कभी नहीं टालते. वो चाहे बचपन की बात हो या आज के हालात. हां, कस्टमर बदल जाते हैं.

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