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कुमार विश्वास के हालात पर सबसे सही बात इस आदमी ने कही है!

दरअसल कुमार विश्वास के ऊपर जिम्मेदारी बहुत बड़ी थी.

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कोई पागल समझता है

vineet singh
 विनीत दी लल्लनटॉप के रीडर और पक्के वाले दोस्त हैं. बलिया से हैं. जहां से चंद्रशेखर प्रधानमंत्री बने थे. उन्हीं ने देवस्थली विद्यापीठ स्कूल खोला था जिस स्कूल में पढ़े हैं विनीत. आजकल मुंबई में रहते हैं और वहीं से दुनिया देख रहे हैं. अपने देखे सुने का तमाम एक्सपीरिएंस लल्लन के साथ भी बांटते हैं. अपने दोस्त मकालू से परेशान रहते हैं, उसके किस्से भेजते हैं. आप भी पढ़िए.

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अभी ऑफिस में ही था लेकिन थोड़ा थक गया तो बाहर निकल आया. आज कल ऑफिस में बहुत काम है. एक्चुअली क्या है कि मैं बहुत ही जिम्मेदार टाइप का कर्मचारी हूं तो हर काम में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेता हूं. मने इतना बढ़-चढ़ कर कि कई बार दूसरों का काम भी कर देता हूं. कभी कभी तो बॉस को आकर बोलना पड़ता है कि पहले खुद का काम तो ढंग से ख़तम कर ले.
खैर, किसी भी आम भारतीय कि तरह मैं भी थकान मिटाने के लिए ऑफिस के सामने वाली चाय की दुकान पर ही जाता हूं. आज वहां पंहुचा तो देखा मेरा दोस्त मकालू पहले से ही वहां बैठा चाय गटक रहा था. उससे मुलाकात होने का मतलब है अपना ब्लड प्रेशर बढ़ाना सो मैं झटके से वापस मुड़ गया. लेकिन देर हो चुकी थी.
मुझे देखते ही बोला - गुरु चाय तो पीते जाओ.
नहीं नहीं कुछ काम याद आ गया है, बाद में आकर पी लूंगा - मैंने पीछा छुड़ाने की कोशिश की.
बहुत मेहनत कर रहे हो आज कल. चेहरा देखकर तो लग रहा है कि ज्यादा दिन तक नहीं जी पाओगे. देखना कहीं सैलरी आने से पहले यमराज लेने न आ जाएं - बोलते हुए मकालू हंसने लगा.
मैं पीछे मुड़ा और सीधे उसके पास गया. मन हुआ साले का टेटुआ दबा दूं. इतना ज्यादा कोई बोलता है भला. लेकिन उससे पहले ही मकालू ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे खींचा और चाय वाले की बेंच पर बिठा लिया.
मैंने कहा - मकालू आज के बाद मुझसे ऐसी वाहियात बात नहीं करना. और एक बात आज गांठ बांध लो. मैं मेहनत इसलिए करता हूं क्योंकि ऑफिस में मेरे ऊपर बहुत जिम्मेदारी है. वहां मेरी बहुत इज़्जत भी है. मेरी हर बात वहां सुनी जाती है. और मार्च में मेरा प्रमोशन भी होने वाला है. फिर मेरा एक सेपरेट केबिन होगा. और फिर मैं तुम सबको दावत देने का भी सोचा है और वैष्णो देवी के दर्शन करने भी जाऊंगा. मई में ट्रेन की टिकट भी बुक है.
कु वि
कु वि

मकालू और भी जोर से हंसने लगा. बोला - गुरु तुम सिर्फ थके हुए नहीं हो बल्कि थकेली आत्मा हो गए हो.
मतलब?
बोला - कुमार विश्वास को जानते हो?
कोई दीवाना कहता है??
हां वही वाला, लेकिन अब वो भाई पागल बनकर घूम रहा है. और उसकी आज बेचैनी को बच्चा बच्चा समझ रहा है- मकालू अभी भी हंस रहा था.
तो उससे मेरा क्या लेना देना है?
मकालू बोला - गुरु बहुत लेना देना है. कवि महोदय को भी तुम्हारी तरह ही गलतफहमी हो गयी थी कि उनका प्रमोशन होगा और अलग से केबिन मिलेगा राज्यसभा में. पर अब जब उनको अप्रेजल लेटर मिला है तब समझ आया कि बॉस ने सालों साल काम करा के कर्रा वाला काट दिया है. जब तुम दोस्तों रिश्तेदारों को पार्टी का न्योता दे चुके होते हो और दर्शन का प्लान भी बांध चुके होते हो और उसके बाद इतना बड़ा वाला कटता है तो फिर कंपनी से रिजाइन करने के अलावा कोई चारा नहीं बचता.
लेकिन ऐसा क्यूं होता है? ये तो गलत है.
गुरु जो तुम्हारे फटे में सुई धागा लेकर सिलता है न वो ही तुम्हारा सच्चा हितैषी होता है. एनडी गुप्ता नाम का प्रत्याशी दो साल से केजरीवाल का 'सीए' था. और दूसरा वाला सुशील गुप्ता सुई धागे की सप्लाई को निर्बाध रूप से संचालित कराता था. अब तुम अपना देख लो किस केटेगरी में आते हो - बोलते हुए मकालू उठा. चाय वाले को पैसे दिए और फिर मेरी तरफ मुखातिब होकर बोला- और अगर संजय सिंह वाली केटेगरी की सोच रहे हो तो याद रखना कि कुमार विश्वास, योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण भी खुद को उसी केटेगरी में रखते थे.
मकालू चला गया है. मैं चार बार चाय पीने के बाद अब ऑफिस कि तरफ बढ़ा हूं लेकिन मेरे पैरों की रफ़्तार थोड़ी धीमी हो गयी है. जबकि दिमाग में प्रमोशन वाला हिसाब किताब तेजी से चल रहा है. मकालू की बातें कान में धरिए और योगी जी का इंटरव्यू देखिए, फुल्ली लल्लनटॉप



मकालू के और किस्से:

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