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प्रकाश राज के पीएम मोदी पर कमेंट से सबसे ज्यादा गुस्सा इस आदमी को आया है!

प्रकाश राज ने कुछ दिन पहले कहा था कि मोदी उनसे भी बड़े एक्टर हैं.

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अभिनेता पहचानो प्रतियोगिता

vineet singh
 विनीत दी लल्लनटॉप के रीडर और पक्के वाले दोस्त हैं. बलिया से हैं. जहां से चंद्रशेखर प्रधानमंत्री बने थे. उन्हीं ने देवस्थली विद्यापीठ स्कूल खोला था जिस स्कूल में पढ़े हैं विनीत. आजकल मुंबई में रहते हैं और वहीं से दुनिया देख रहे हैं. अपने देखे सुने का तमाम एक्सपीरिएंस लल्लन के साथ भी बांटते हैं. अपने दोस्त मकालू से परेशान रहते हैं, उसके किस्से भेजते हैं. आप भी पढ़िए.

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कुछ दिन पहले मैं अपने जबरी के दोस्त मकालू के बुलावे पर उसके यहां खाने पर गया था. यूजुअली मैं बहाना बना देता हूं लेकिन उस दिन मैं मना नहीं कर पाया और वजह ये कि नवरात्रों के खत्म होने के बाद पहली बार नॉनवेज खाने का मौका मिला था. बगल में ही बैठकर मकालू भौजाई गरम गरम रोटी बना रही थी और एक के बाद एक मैं उनको ठिकाने लगाए जा रहा था.
"मोदी जी मुझसे भी बड़े अभिनेता हैं- प्रकाशराज." अचानक मकालू ने अपने मोबाइल से ये बासी खबर पढी.
कसम खुदा की मेरा खाना सरक गया. पहले पानी पी लूं.
असल में भाई जी दिक्कत ये है कि मुझसे मोदी जी कि आलोचना सुनी नहीं जाती और आजकल तो लोग विरोध के लिए कुछ भी बोल देते हैं मतलब फैशन बन गया है मोदी जी को गाली देना.
गनी मेरी जान सोना नहीं, मार देंगे ये लोग
गनी मेरी जान सोना नहीं, मार देंगे ये लोग

मैंने कहा- वाहियात बात है ये.
मकालू बोला- गुरु मेरा भी समर्थन ले लो. चार फिल्मों में काम क्या कर लिया कि कुछ भी बोल देते हैं ये लोग. अरे अभिनेता मतलब अभिनय करने वाला. मतलब कभी भी रो देना और कभी भी हंस देना. वो भी कैमरा और हजारों दर्शकों के सामने और उपर से बिना ग्लिसरीन लगाए. अभिनय मतलब सच्चाई से अलग एक काल्पनिक कहानी के पात्र को ऐसा जीवंत कर देना कि जनता मंत्रमुग्ध होकर अपना निजी दुख भूल जाए और ये भी भूल जाए कि जो दिखाया और सुनाया जा रहा है वो दरअसल झूठ है.
हां तो क्या गलत है इसमें? मोदी जी भी तो जब ना देखो तब टीवी पर रो देते हैं- इस बार मकालू भौजी थी, मेरी थाली में रोटी डालते हुए बोलीं.
भाई साहब मुझे दोबारा सरक गया.
पानी....पानी लिजिए- भाभी ने पानी बढ़ाया.
मकालू बोला- एजी गवारों जैसी बातें मत करो. नेता और अभिनेता का फर्क समझती हो?
मकालू भौजी उखड़ गईं- खूब समझते हैं और भूलो नहीं कि परीक्षा में तुम मेरे पीछे बैठकर ही पास हुए थे. पहले नेताओं की तरह हाथ जोड़े मेरे आगे पीछे घूमते थे और मैंने शादी करके सत्ता क्या दे दी आज मुझे ज्ञान दे रहे हो?
मकालू ने फौरन सरेंडर कर दिया. फिर मैंने कोशिश की- भाभीजी कहां एक तुच्छ एक्टर और कहां एक इतना महान करैक्टर मोदी जी... कैसी तुलना है ये भाभी जी?
मकालू भौजी बोलीं- सही तुलना है. जानते हैं? जितने रंग का मेरे पास ब्लाउज नहीं है उससे ज्यादा रंग का जैकेट है मोदी जी के पास. अमेरिका वाले ट्रंप के पास भी उतने रंगों की टाई नहीं हैं. मेरी मलेनिया बहन से बराबर बात होती है. वो बात रही थी.
खैर, भाइस मोडूलेसन जानते हैं आप? - भौजाई मुझसे मुखातिब थीं.
मैंने कहा- जी, मेरे ख्याल से अपनी आवाज को मंच पर अलग अलग सीन, सिचुएसन और रस के हिसाब से बदलना. कब तेज बोलना है, कब धीरे बोलना है और कब....
"काफी हद तक सही जानते हैं आप"- बीच में काटते हुए मकालू भौजाई बोलीं- "दिलीप कुमार और देवानंद के बाद मैंने किसी को इतना अच्छा भाइस मोडुलेसन और इतना बढ़िया डायलाग डिलीवरी करते देखा है. भाइस पर गजब की पकड़ है मोदी जी की और भाई साहब अब कैमरा की बात भी कर लेते हैं वरना आप अगला सवाल दागेंगे. मोदी जी सिर्फ कैमरे की तरफ देखते भर नहीं, बल्कि समूचा लेंस में ही घुस जाते हैं.
लेकिन भाभी जी मोदी जी असल जिंदगी में भी असली वाले नेता हैं. वो कौन सा नाटक खेल रहे हैं भला?- आखिरी निवाले के साथ मैंने आखिरी प्रयास किया.
नाटक?? भाई साहब फिल्म बनाते हैं वो. सलमान खान की तरह हर एकाध-महीने पर एक नई सुपरहिट फिल्म रिलीज करते हैं मोदी जी- "अच्छे दिन" उनकी पहली फिल्म थी. फिर "स्वच्छ भारत" रिलीज हुई. फिर मेक इन इंडिया, नोटबंदी और जीएसटी और बीच-बीच में सर्जिकल स्ट्राइक नाम की शॉर्ट फिल्म भी ले आते हैं. जनता के निजी जीवन में कुछ बदले ना बदले लेकिन जनता मंत्रमुग्ध होकर और लाइन लगाकर तरह-तरह के टैक्स और सेस भरती रहती है. अगर आप बिल्कुल बकलोल नहीं होंगे तो आपको जरूर पता होगा कि रसोईगैस की कीमत कितनी बढ़ गई है?
मनमोहन सिंह कि बुराई होती तो फिर भी सुन लेता, लेकिन मोदी जी के बारे में नहीं सुन सकता था. सुना ही नहीं जाता. मुझे गुस्सा आ गया. मैंने कहा- भाभी जी हाथ किधर धोते हैं?
भाभी जी बोलती उससे पहले मकालू बोला- भाई जल्दी से लुंगी में हाथ पोछ लो, चलो मैं तुमको घर छोड़ कर आता हूं.
मैं समझ गया था कि मकालू भी मेरे बहाने पतली गली लेकर निकल लेने का बहाना खोज रहा था.
मैंने स्वच्छता अभियान और घड़ी डिटर्जेंट को याद करते हुए लुंगी में हाथ पोछा और भाभी जी से पीछा छुड़ाया लेकिन अब भी भाभी जी पीछे से दाल से लेकर हरी सब्जी का रेट गिना रही थी. फैशन बन गया है ना इसलिए.
मकालू की बातें कान में धरिए और योगी जी का इंटरव्यू देखिए, फुल्ली लल्लनटॉप



मकालू के और किस्से:

'रात में बाबाओं की दुकान सजाने वाले चैनलों को दिन में ज्ञान देने का कोई हक नहीं'

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