वरिष्ठ अभिनेता नसीरुद्दीन शाह उस वक़्त विवादों में घिर गए, जिस वक़्त उन्होंने ये बयान दे डाला कि उन्हें देश में डर लगता है. ये बयान उन्होंने आज कल टीवी पर आ रहे सीरियल्स को देख दिया. इन सीरियल्स में नीबुओं से हीमोग्लोबिन वाला खून निकलता है और छिपकलियों के टैटू वाली महिलाएं रूप बदलती हैं. इस बयान का वीडियो नहीं मांगिएगा क्योंकि आपको वैसे भी प्रोपैगैंडा में पड़ना है, सच थोड़े देखना है.
नसीर का कहना था कि इन सीरियल्स को देखने वालों से ज़्यादा सुरक्षित तो सीरिया में रहने वाले महसूस करते हैं. उनके इस बयान से देश के कई संगठन और नेट पर रोज़ का डेढ़ जीबी खर्च करने करने वाले आहत हैं. उनका कहना है कि अगर नसीर को टीवी देखने में डर लगता है तो वो रेडियो खरीद लें और विविधभारती सुना करें. कई संगठनों ने उनके टीवी के रिमोट से सेल निकाल लेने की धमकी भी दी है.

सीरियल्स में ऐसे आटे के पुतले देख डर लगता है कि ये गेंहू के दाम बढ़वा के मानेंगे
इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश नवटीवीदर्शन सेना के प्रमुख नमित ज्ञानी ने उन्हें सारेगामा कारवां का सेट भी भिजवा दिया है. इस बयान के बाद जब नसीरुद्दीन शाह अजमेर पहुंचे तो उनका पुतला जलाने की ख़बरें आईं. हालांकि बाद में पता चला कि उन्हें डर से बचाने के लिए सामूहिक नज़र उतारने का आयोजन हो रहा था और जीरा-नमक-मिर्च जलाई जा रही थीं.
नसीरुद्दीन शाह ने जो बयान दिया, उसे भी पढ़ लीजिए.
'ये कहर फैल चुका है और दोबारा इस जिन्न को बोतल में बंद करना बड़ा मुश्किल होगा. खुली छूट मिल गई है, स्क्रिप्ट को अपने हाथों में लेने की. कई चैनलों में हम लोग देख रहे हैं कि एक भूतिया सीरियल को रियलिटी शो ज़्यादा अहमियत दी जाती है. मुझे फिक्र होती है घर के बच्चों के बारे में सोचकर. क्योंकि उनकी समझ ही इतनी नहीं है. भूत-प्रेत से न डरने की तालीम मुझे मिली थी. 'चमत्कार' फिल्म में तो मैं भूत बना भी था, जो शाहरुख खान को क्रिकेट मैच जितवा देता था. अब तो क्रिकेट का नाम लेने में भी डर सा लगता है. कोहली बुरा न मान जाए. टीम जीत नहीं रही, ऊपर से शाहरुख भी ज़ीरो जैसी फ़िल्में बना रहा है.जब से बयान वायरल हुआ है, नसीरुद्दीन शाह को संदेश पर संदेश आ रहे हैं. उन्हें बताया जा रहा है कि गुस्से की बात ग़लत है. वो सीरियल्स को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं. एक युवती ने तो ऐसे सीरियल्स का बचाव करते हुए ये तक कह दिया कि उसे हॉरर फिल्म्स से भी डर नहीं लगता. वो सिनेमाहॉल में हॉरर फिल्म देखने जाती है, तो उसकी हंसी छूट जाती है. इस बात पर नसीर साहब कुछ नहीं बोले लेकिन विक्रम भट्ट उदास बताए जा रहे हैं.
मेरा ये मानना है कि 'डायन' और 'नज़र' जैसे सीरियल्स का रियलिटी से कुछ लेना-देना नहीं है. यहां एवरेज आदमी 'आपबीती' भी रजाई में छुपकर देखता था, उसे हर समय तंत्र-मंत्र वाले सीरियल्स दिखाए जा रहे हैं. खुशकिस्मती से हमने 1920 जैसी फ़िल्मों में ये देख रखा है कि हनुमान चालीसा पढ़ने से भूत भाग जाते हैं. लेकिन जब से हनुमान जी की कास्ट खोजी जाने लगी. उनकी बात करना भी 'जातियों' से खाली नहीं रह गया है. मुझे फ़िक्र होती है अपने बच्चों के बारे में कि कल को उन्होंने अकेले में टीवी देख ली तो घर की छिपकलियों को डायन समझने लग जाएंगे. हालात जल्दी सुधरते तो मुझे नज़र नहीं आ रहे. इन बातों से मुझे डर नहीं लगता 'जुस्सा' आता है. और मैं चाहता हूं कि राइट थिंकिंग इंसान को जुस्सा आना चाहिए डर नहीं लगना चाहिए हमें. हमारी टीवी है! हमें कौन डरा सकता है यहां पे.”

पात्रों की लंबी केशराशि देख हेयरफाल का लगता है डर
एक उत्साही युवक ने तो ये तक कह दिया कि अब तो लड़कियां भी कॉकरोच से नहीं डरतीं. हमने उन्हें ये सेक्सिस्ट बयान देने से रोका और कहा कि उनकी महिला मित्र इस बात से नाराज़ हो सकती हैं. तो उस युवक का कहना था कि यहीं साबित होता है कि देश में डर का माहौल नहीं है क्योंकि वो अपनी गर्लफ्रेंड के गुस्से से भी नहीं डरता.
इस तमाम वाकये के बाद मशहूर कोल्डड्रिंक कंपनी ने भी अपनी विज्ञापन लाइन बदल दी है, अब वो 'डर के आगे जीत' जैसे जुमले इस्तेमाल नही कर रहे. क्योंकि डर तो कुछ होता ही नहीं है, अब वो 'निडर के आगे जीत है' को टैगलाइन बनाने जा रहे हैं. खुद सलमान खान इस मुद्दे में अपना पक्ष रखने आए और ये बता गए कि डर पर बात तो उसी समय बंद हो जानी चाहिए, जब सोनाक्षी सिन्हा ने 'थप्पड़ से डर नहीं लगता साहब' कहा था.
खैर इस विवाद के बाद जैसा माहौल बना है, डर सिर्फ इस बात का है कि टीवी सीरियल्स से डरने वाले नसीरुद्दीन शाह के घर पर कहीं IT और Conjuring की सीडियां न फेंक दी जाएं.
Note - ऊपर जो पढ़ा, वो झूठ था, सच ही जानना है तो यहां
जाइए और जानिए कि नसीरुद्दीन शाह ने कभी नहीं कहा 'मुझे डर लगता है'





















