The Lallantop

सलमान खान ने धमकियों के चलते जो बुलेटप्रूफ कार खरीदी है उसमें कितना दम है?

बिना बुलेटप्रूफ़िंग के ही इस गाड़ी की क़ीमत लगभग दो करोड़ रुपये है.

Advertisement
post-main-image
कैसे होती है गाड़ियों की बुलेटप्रूफिंग? (तस्वीरें- Nissan और आजतक)

बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान ख़ान को हाल में एक बार फिर जान से मारने की धमकी मिली. सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड के आरोपी लॉरेंस बिश्नोई ने सलमान खान को ये धमकी दी थी. रोहित गर्ग नाम के व्यक्ति ने भी लॉरेंस बिश्नोई के हवाले से सलमान खान के लिए धमकी भरा मेल भेजा था. इन पर सलमान ने सीधे-सीधे कुछ नहीं कहा, लेकिन अपने लिए बुलेटप्रूफ गाड़ी खरीदकर ये संकेत जरूर दे दिया कि वो ऐसी धमकियों से सचेत हैं. कहा गया कि गैंगस्टर्स की तरफ से मिल रही धमकियों के चलते सलमान की सुरक्षा पर भारी-भरकम खर्चा किया गया है. उसी में बुलेटप्रूफ गाड़ी की खरीद भी शामिल है.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

तो आज बात करेंगे बुलेटप्रूफ तकनीक की. बताएंगे कि बुलेटप्रूफ गाड़ी कैसे बनती है, कितने रुपये लगते हैं, कहां बनती है और बुलेटप्रूफ गाड़ियां कितनी सुरक्षा दे सकती हैं.

गोली क्या बम धमाका भी झेल जाएं

धमकियां मिलने के बाद सलमान खान ने जो बुलेटप्रूफ SUV ख़रीदी उसका नाम है- NISSAN PATROL. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इस गाड़ी के अलावा सलमान के पास टोयोटा की लैंडक्रूज़र LC200 भी है. ये भी एक बुलेटप्रूफ SUV है.

Advertisement

निसान, जापान की कंपनी है. इसकी गाड़ियां भारत समेत दुनिया भर में बिकती हैं. हालांकि NISSAN PATROL SUV आधिकारिक रूप से भारत में उपलब्ध नहीं है. अगर किसी को ये गाड़ी चाहिए तो इसे इम्पोर्ट कराना पड़ता है. सलमान ने भी यही किया है. साथ ही गाड़ी का बुलेटप्रूफ ट्रांसफोर्मेशन करवाया है. टेक्निकली इस फीचर वाले वाहनों को आर्मर्ड व्हीकल्स यानी बख्तरबंद वाहन कहा जाता है, लेकिन 'बुलेटप्रूफ' ज्यादा कॉमन है. ये गाड़ियां ना सिर्फ गोलीबारी से सुरक्षा देती हैं, बल्कि मामूली बम धमाकों को भी झेल जाती हैं. दुनियाभर की कई मशहूर हस्तियां अपनी सुरक्षा के लिए इन गाड़ियों का इस्तेमाल करती हैं.

बुलेटप्रूफ गाड़ी कौन बनाता है?

बुलेटप्रूफ टेक्नोलॉजी पर जिसे काम करना आता है वो आर्मर्ड व्हीकल बना सकता है. हालांकि इस काम के लिए तमाम तरह के इक्विपमेंट, एक्सपर्टीज, वर्कफोर्स और अन्य चीजों की जरूरत है, इसलिए कार बनाने वाली कंपनियां, जैसे ऑडी, बीएमडब्ल्यू, लैंडरोवर वगैरा, बख्तरबंद कारें या एसयूवी तैयार करती हैं. आपको गाड़ी खरीदकर उसे बुलेटप्रूफ नहीं बनवाना, बस जैसे आम गाड़ियां खरीदते हैं वैसे ही बुलेटप्रूफ गाड़ी भी खरीदकर घर ले आनी है.

बीते कुछ सालों में दुनिया भर में बुलेटप्रूफ कारों की मांग बढ़ी है. ऐसे में कई कंपनियां गाड़ियों को बुलेटप्रूफ बनाने के उद्योग में उतर गई हैं. आप चाहें तो सीधे भी इनसे बुलेटप्रूफ गाड़ियां खरीद सकते हैं या फिर कोई गाड़ी खरीदकर इन कंपनियों से उन्हें बुलेटप्रूफ गाड़ी में मॉडिफाई करवा सकते हैं. ये कंपनियां, SUV और सेडान क्लास की बुलेटप्रूफ कारों के अलावा, आर्मी और अन्य फोर्सेज के लिए भी बख्तरबंद वाहन और बैंकों के लिए कैश वैन वगैरा बनाती हैं.

Advertisement

शील्ड आर्मरिंग प्राइवेट लिमिटेड मुंबई बेस्ड एक कंपनी है, जो गाड़ियों को बख्तरबंद बनाने का काम करती है. इसी तरह, महिंद्रा एमीरेट्स व्हीकल आर्मरिंग और द आर्मर्ड ग्रुप जैसी कई और कंपनियां हैं जो बड़े पैमाने पर ये काम करती हैं.

बुलेट गाड़ियां कैसे बनती हैं?

बुलेटप्रूफ प्रोटेक्शन कई स्तर का होता है. बेसिक फीचर सारी बुलेटप्रूफ गाड़ियों में एक जैसे होते हैं. लेकिन अलग-अलग स्तर की बुलेटप्रूफिंग, अलग-अलग स्तर की गोलियों को रोकने के लिए की जाती है. इन लेवल्स को B1 से लेकर B7 तक नाम दिए गए हैं. स्टील की मोटी-मोटी चादरों के ज़रिए गाड़ी को बख़्तरबंद किया जाता है. इन सभी लेवल्स पर गोली को रोकने वाली स्टील की मोटाई अलग-अलग होती है.

द आर्मर्ड ग्रुप के मुताबिक, गाड़ी के पैनल, छत, बैटरी, टायर सिस्टम, ब्रेक, धमाके से बचाने वाला गाड़ी का निचला फ्लोर, गोली को रोकने वाला कांच, दरवाजे और इंटीरियर फिनिशिंग जैसी बेसिक चीजों के अलावा, ज्यादा पैसा खर्च करने पर और भी कई फीचर्स मिल जाते हैं.

गाड़ियों को बुलेटप्रूफ बनाना एक जटिल प्रक्रिया है. सबसे पहले तो गाड़ी के कई हिस्सों को अलग कर दिया जाता है ताकि उसका वजन कम किया जा सके. इसके बाद गाड़ी की दोनों साइड की चादरें और पिलर्स को खोलकर इन पर बख्तरबंद पैनल लगाए जाते हैं. ये पैनल अक्सर बैलिस्टिक ग्रेड की स्टील के बने होते हैं. इसके अलावा हल्के वजन वाले रेसिन, बैलिस्टिक नायलॉन या केवलर का भी इस्तेमाल किया जाता है. यही मटेरियल बुलेटप्रूफ जैकेट में भी इस्तेमाल होता है.

कार में फायरवाल और क्रम्पल-जोन बम्पर का भी इस्तेमाल किया जा सकता है. क्रम्पल-जोन बम्पर में ऐसा मटेरियल होता है जो गाड़ी के किसी चीज से टकराने पर टक्कर का प्रभाव कम कर देता है. इससे गाड़ी के रेडियेटर और बाकी मशीनरी को नुकसान नहीं पहुंचता.

फैक्ट्री वाली बुलेटप्रूफ़ गाड़ियों में विंडो ग्लास हटाकर उसकी जगह एक मोटी कांच जैसी ही पारदर्शी मैटर की शीट लगाई जाती है. ये शीट प्लास्टिक और लेड से मिलकर बनी होती है. इसकी मोटाई आमतौर पर 1 से 2 इंच होती है. सिक्योरिटी लेवल के हिसाब से इसे और भी मोटा किया जा सकता है.

बुलेटप्रूफ बनाने के प्रोसेस में गाड़ियों का वजन काफ़ी बढ़ जाता है. ऐसे में गाड़ियों का वजन ज्यादा बढ़ाए बिना, उन्हें बुलेटप्रूफ बनाना बड़ी चुनौती होती है. मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, किसी छोटी सेडान क्लास गाड़ी पर सबसे कम स्तर की बुलेटप्रूफिंग की जाए, तो भी 500 पाउंड यानी करीब 200 किलो से ज्यादा का वजन बढ़ जाता है. और अगर ठीक-ठाक स्तर की बुलेटप्रूफिंग की जाए तो 1000 किलो से ज्यादा वजन बढ़ जाएगा. 

और कई बार, गाड़ी के मालिक ये भी चाहते हैं कि गाड़ी देखने में बुलेटप्रूफ नजर न आए. माने ज्यादा भारी-भरकम तामझाम न दिखे. ऐसे में वजन कम रखने की कोशिश की जाती है, वो भी गाड़ी के सिक्योरिटी कवर को छेड़े बग़ैर.

बुलेटप्रूफिंग के बिज़नेस में इस बात के प्रचार की होड़ रहती है कि हम कितने कम वजन में कितने अच्छे स्तर की बुलेटप्रूफ गाड़ी बनाकर देते हैं. हालांकि फिर भी कुछ तो वजन बढ़ता ही है. इस बढ़े वजन का फर्क गाड़ी की स्पीड पर न पड़े इसलिए इंजन और गाड़ी के मकैनिज्म को भी सुधारना पड़ता है.

आम तौर पर सिविलियंस को B6 और B7 लेवल का बुलेटप्रूफ प्रोटेक्शन दिया जाता है. B6 लेवल पर 41 मिलीमीटर का बैलिस्टिक ग्लास, जबकि B7 लेवल पर 78mm का बैलिस्टिक ग्लास लगा होता है. बैलेस्टिक माने जिस पर गोली बेअसर हो जाए. 

HT ऑटो की एक रिपोर्ट के मुताबिक सलमान खान की गाड़ी में भी B6 या B7 लेवल की बुलेटप्रूफिंग की गई है. और बिना बुलेटप्रूफ़ के ही इस निसान पट्रोल की क़ीमत लगभग दो करोड़ रुपये है. और बुलेटप्रूफिंग करवाने के लिए सलमान ख़ान ने और भी भारी रकम खर्च की होगी. कितनी भारी भरकम? ये जानकारी तो नहीं है. इतना ही बता सकते हैं कि करोड़ों का खर्च आया होगा.

वीडियो: सलमान ख़ान को मारने की धमकी देने वाले लॉरेंस बिश्नोई ने इंटरव्यू में शाहरुख खान पर क्या कहा?

Advertisement