ये सब जिस आदमी की अपील पर हो रहा है, उसका नाम है- अलेक्सी नवल्नी. पुतिन के सबसे नामी राजनैतिक विरोधी. अगस्त 2020 में नवल्नी पर केमिकल अटैक हुआ था. जर्मनी में चले लंबे इलाज़ के बाद नवल्नी पिछले हफ़्ते रशिया लौटे. लौटते ही फ़ौरन उन्हें अरेस्ट भी कर लिया गया. नवल्नी ये जानते थे, इसलिए लौटने से पहले ही वो एक ब्रह्मास्त्र का बंदोबस्त करके आए थे.

पिछले कुछ दिनों से रूस में प्रदर्शनकारी पुतिन के खिलाफ़ सड़कों पर उतर आए हैं. (तस्वीर: एपी)
क्या था ये ब्रह्मास्त्र?
ये थी एक कथित जांच रिपोर्ट, जिसकी फाइंडिंग्स का ब्योरा 113 मिनट लंबे एक विडियो में है. उधर नवल्नी जेल गए, इधर उनकी टीम ने ये विडियो यूट्यूब पर अपलोड कर दिया. इसके बाद ही रशिया में पुतिन विरोधी प्रदर्शन इतने तेज़ हुए. ऐसा क्या था इस विडियो में? इसका पुतिन के कथित आलीशान महल और उनकी सीक्रेट संपत्ति से क्या कनेक्शन है? क्यों रूस के लोग पुतिन को चोर कह रहे हैं? आज के एपिसोड में विस्तार से बताएंगे आपको.

अलेक्सी नवल्नी ने पुतिन पर आरोप लगाते हुए 113 मिनट का एक विडियो अपलोड किया है. (स्क्रीनशॉट: यूट्यूब)
इस कहानी की शुरुआत करेंगे 14 साल पहले की एक घटना से. तारीख़ थी- 1 नवंबर, 2006. सेंट्रल लंदन में एक होटेल है, नाम है मिलेनियम. उस रोज़ शाम के चार बजने में एक मिनट की देर थी, जब अलेक्जेंडर लितविनेनको ने इस होटेल के बार में कदम रखा. क्या थी लितविनेनको की पहचान? वो एक जमाने में रूसी खुफ़िया एजेंसी KGB में जासूस रहे थे. एक लंबे करियर के बाद 1998 में आकर लितविनेनको की अपने डिपार्टमेंट से लड़ाई हो गई. वजह ये थी कि लितविनेनको ने अपनी एजेंसी पर करप्शन के संगीन आरोप लगाए थे. नतीजतन, उन्हें अरेस्ट कर लिया गया. कई महीने क़ैद में रहने के बाद लितविनेनको ने जुगाड़ बिठाया और भागकर ब्रिटेन चले आए.

मिलेनियम होटेल. (तस्वीर: एएफपी)
ब्रिटेन आने के बाद लितविनेनको ने रूस से जुड़े कई सनसनीखेज़ खुलासे किए. मसलन, उनकी लिखी क़िताब- ब्लोइंग अप रशिया: टेरर फ्रॉम विदिन. इसमें लितविनेनको ने दावा किया कि ख़ुद रूसी स्टेट ने मॉस्को समेत रूस के तीन शहरों में बम धमाके करवाए. फिर इनका इल्ज़ाम चेचन विद्रोहियों के सिर डाला, ताकि चेचन्या पर हमले का बहाना मिल सके. इन ख़ुलासों से रूस की बड़ी किरकिरी हुई. और इसी किरकिरी का क्लाइमैक्स खेला गया 1 नवंबर, 2006 को.
इस रोज़ दो लोगों ने लितविनेनको को एक मीटिंग के लिए होटेल में बुलाया. उन्होंने लितविनेनको को ग्रीन टी परोसी. फिर कुछ अर्जेंट काम के बहाने दोनों मेज़बान वहां से निकल गए. कुछ ही देर बाद लितविनेनको को उल्टियां होने लगीं. उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया. क्या हुआ था उनको? उन्हें पोलोनियम 210 नाम का एक ख़तरनाक ज़हर दिया गया था. ये ज़हर उसी चाय के कप में था, जो लितविनेनको ने मीटिंग में पी थी. इस पॉइज़निंग के 22 रोज़ बाद लितविनेनको मर गए. मरने से पहले अपने डेथबेड पर उन्होंने एक चिट्ठी लिखी. इसमें लितविनेनको ने लिखा था-
मैं मृत्युदूत के पंखों की आवाज़ सुन रहा हूं. मेरी इस हालत के जिम्मेदार तुम हो. याद रखना, बग़ावत की चीखें ज़िंदगी भर तुम्हारा पीछा नहीं छोड़ेंगी. दुनियाभर से विद्रोह की आवाज़ें तुम्हारे कानों में गूंजती रहेंगी.

KGB एजेंट अलेक्जेंडर लितविनेनको और उनकी लिखी किताब 'ब्लोइंग अप रशिया: टेरर फ्रॉम विदिन'. (तस्वीर: एएफपी)
लितविनेनको ने किसके नाम लिखी थी ये चिट्ठी?
उन्होंने ये चिट्ठी लिखी थी पुतिन के नाम. वही पुतिन, जिनपर लितविनेनको को मरवाने का इल्ज़ाम लगता है.
लितविनेनको की इस कहानी से क्या आपको किसी हालिया घटना की याद आई? सोचकर देखिए, लितविनेनको का प्रसंग रूसी अपोज़िशन लीडर अलेक्सी नवल्नी से कितना मिलता-जुलता है. लितविनेनको और नवल्नी, दोनों ही पुतिन के घनघोर आलोचक. दोनों पर केमिकल अटैक हुआ. और इन दोनों हमलों का इल्ज़ाम पुतिन पर लगता है. एक और भी चीज है, जो दोनों के बीच कॉमन है. लितविनेनको और नवल्नी, दोनों ने ही पुतिन पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया.
लितविनेनको तो अब रहे नहीं, मगर नवल्नी हैं. जेल में बंद होकर भी वो पुतिन की कुर्सी हिला रहे हैं. नवल्नी पिछले कई सालों से पुतिन का राजनैतिक विरोध कर रहे हैं. वो पुतिन और उनके सहयोगियों पर रूस को लूटने के आरोप लगाते रहे हैं. मगर बीते दिनों नवल्नी के इस ऐंटी-पुतिन कैंपेन में एक बड़ा नाटकीय डिवेलपमेंट हुआ. कैंपेन का फ़ोकस शिफ़्ट हो गया एक आलीशान महल पर.

रूसी अपोज़िशन लीडर अलेक्सी नवल्नी. (तस्वीर: एपी)
कौन सा आलिशान महल है ये?
दक्षिण रूस में ब्लैक सी के किनारे एक शहर है- ज़ेलेन्ज़िक. यहां जंगल के बीच तकरीबन 170 एकड़ के इलाके में फैली एक आयताकार इमारत है. इमारत क्या, मॉडर्न महल ही कहिए इसे. इसके भीतर दो हेलिपैड, इनडोर सिनेमाघर और कसिनो भी हैं. इसी महल का प्रचलित नाम है- पुतिन्स पैलेस. यानी, पुतिन का महल.

रूस का ज़ेलेन्ज़िक शहर. (तस्वीर: गूगल मैप्स)
इस महल का क़िस्सा पिछले कई साल से ख़बरों में है. इस क़िस्से में दो प्रमुख किरदार हैं. एक, निकोलाई शामालोव. दूसरे, गोरेलोव. शामालोव और गोरेलोव की पुतिन के साथ पुरानी दोस्ती थी. पुतिन के राष्ट्रपति बनने के बाद इनकी दौलत भी ख़ूब बढ़ी. आरोप लगता था कि इस बढ़ती रईसी के पीछे पुतिन का हाथ है. कैसे, बताते हैं. बड़ा उलझा हुआ मामला है, तो ध्यान से सुनिएगा.
सेंट पीटर्सबर्ग की एक कंपनी थी, पेट्रोमेड. इसके को-फाउंडर थे, गोरेलोव. ये कंपनी सरकारी अस्पतालों में मेडिकल उपकरणों की सप्लाई का काम करती थी. इसके लिए उपकरण खरीदे जाते थे, साइमन्स नाम की एक विदेशी कंपनी से. इस कंपनी के रूसी सेल्स विंग के मुखिया थे, शामालोव.
अब समझिए. गोरोलोव वाली कंपनी शामालोव वाली कंपनी से मेडिकल इक्विप्मेंट्स खरीद रही है. मगर ये खरीद-बिक्री सीधे-सीधे नहीं हो रही. ये दोनों ग्रेटहिल नाम की एक बिचौलिया कंपनी के मार्फ़त डीलिंग कर रहे हैं. इस ग्रेटहिल कंपनी का मामला बड़ा संदिग्ध था. सबसे बड़ी दिक्कत तो ये थी कि इसके मालिक का कोई पता-ठिकाना ही नहीं था. कौन है, कहां रहता है, किसी को नहीं पता था. आरोप लगते थे कि ये एक फ़र्जी कंपनी है, जिसका लिंक रूसी सिस्टम के किसी ऊपरी आदमी से है.
बाद में रॉयटर्स न्यूज़ एजेंसी ने अपनी एक छानबीन में ग्रेटहिल के मालिक को खोज निकाला. पता है, क्या नाम था ओनर का? शामालोव और गोरोलोव. आरोप है कि ये दोनों ही रूसी अस्पतालों के लिए हो रही खरीद में बहुत बड़ा घोटाला कर रहे थे.

पुतिन्स पैलेस. (तस्वीर: एपी)
अब सवाल है कि इस घोटाले की बड़ी मछली कौन थी?
इसके जवाब में आपको एक चिट्ठी की कहानी सुनाते हैं. ये जो शामालोव थे, उनके एक बिज़नस असोसिएट थे- सेरगी कोलेशनिकोव. उन्होंने साल 2010 में तत्कालीन रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव को एक खुला ख़त लिखा. इसमें दावा किया गया था कि शामालोव ब्लैक सी के पास एक बेहद आलीशान महल बनवा रहे हैं. किसके लिए? पुतिन के लिए. और इस महल को बनवाने का पैसा आ रहा है, सरकारी हेल्थकेयर प्रॉजेक्ट में शामिल कुछ कंपनियों से.
अब आप पुतिन के उस कथित महल और उससे जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों का बैकग्राउंड समझ गए होंगे. ये सब बताने के बाद अब एक बार फिर लौटते हैं, नवल्नी के ज़िक्र पर. हमने एपिसोड की शुरुआत में आपको बताया कि नवल्नी जर्मनी से रूस लौटे. नवल्नी को पता था कि रूस लौटते ही उन्हें अरेस्ट कर लिया जाएगा. इसीलिए उन्होंने अडवांस में ही एक विडियो रिकॉर्ड करके अपनी टीम को थमा दिया था. इस ताकीद के साथ कि अगर मैं अरेस्ट हो जाऊं, तो ये विडियो अपलोड कर देना. विद इंग्लिश सबटाइटल. ताकि विडियो का कॉन्टेंट रूसी न जानने वाले लोग भी समझ सकें.

2010 में तत्कालीन रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव. (तस्वीर: एएफपी)
क्या था इस विडियो में?
इसमें पुतिन के उसी कथित महल की जांच रिपोर्ट है. महल का पूरा फ्लोर प्लान, इसके भीतर की तस्वीरें, सबकुछ है. नवल्नी की टीम ने विडियो में महल का थ्री-डी मॉडल दिखाया है. इसके मुताबिक, इसका लिविंग स्पेस ही करीब दो लाख स्क्वैयर फीट में फैला है. इसके ग्राउंड फ्लोर पर स्पा, मूवी थियेटर और एक बड़ा सा वाइन भंडार है. पहली मंजिल पर है एक बड़ा कसिनो और हुक्का लाउंज, जिसके भीतर पोल डांसिंग का एक बड़ा स्टेज भी है. महल में आइस हॉकी के लिए एक अंडरग्राउंड स्टेडियम और चर्च भी है. इसके अलावा समंदर किनारे जाने के लिए एक सीक्रेट सुरंग की भी व्यवस्था रखी गई है. दावा है कि ये रूस की सबसे विशाल निजी इमारत है.
नवल्नी के मुताबिक, महल के आसपास की करीब 77 स्क्वैयर किलोमीटर की ज़मीन पर रूस की खुफ़िया एजेंसी FSB का कंट्रोल है. महल के ऊपर का एयरस्पेस नो-फ्लाई ज़ोन है. यानी, बिना परमिशन यहां कोई विमान नहीं घुस सकता. यहां तक कि कोस्ट गार्ड इसके डेढ़ किलोमीटर की परिधि में किसी नाव को भी नहीं घुसने देते. विडियो में नवल्नी कहते हैं-
ये महल, इसका कंपाउंड स्टेट के भीतर एक स्टेट है. यहां एक ज़ार की सत्ता चलती है. इसे इस तरह बनाया गया है कि आप ज़मीन, हवा या समंदर, किसी भी रास्ते यहां नहीं पहुंच सकते. उस कंपाउंड में हज़ारों लोग काम करते हैं. उन्हें कैमरे वाला फोन लेकर जाने की इज़ाज़त नहीं. मगर हम आपको इस महल के भीतर का नज़ारा दिखाएंगे.

रूसी अपोज़िशन लीडर अलेक्सी नवल्नी ने पुतिन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं. (तस्वीर: एपी)
सवाल है कि जब इतनी सुरक्षा है महल की तो नवल्नी की टीम ने उसका विडियो कैसे बनाया?
नवल्नी के मुताबिक, उनकी टीम ने ड्रोन्स के सहारे महल और उसके आसपास की फुटेज हासिल की. अब पूछिए कि इस महल की लागत क्या है? नवल्नी और उनकी टीम के मुताबिक, इसकी लागत तकरीबन 10 हज़ार करोड़ रुपये हो सकती है. उन्होंने इस दावे के समर्थन में कई फाइनैंशनल ब्योरे भी दिए हैं. उनका कहना है कि सहयोगियों द्वारा पुतिन के लिए बनवाया गया ये महल इतिहास की सबसे बड़ी रिश्वतखोरी है. विडियो में नवल्नी कहते हैं-
पुतिन और उनके सहयोगी और ज़्यादा चुराते रहेंगे. तब तक, जब तक कि वो हमारे देश को दिवालिया नहीं कर देते. रूस इतनी बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, गैस, धातु, उर्वरक और टिम्बर बेचता है. मगर आम लोगों की आमदनी लगातार गिरती ही जा रही है. लोग बर्बाद हो रहे हैं, किसके चलते? पुतिन के इस महल के चलते.ऐसा नहीं कि रूस के भीतर ही पुतिन को भ्रष्ट कहा जा रहा हो
बीते कई सालों से पत्रकार और विदेशी खुफ़िया एजेंसियां पुतिन की सीक्रेट जायदाद के बारे में रिपोर्ट कर रही हैं. मसलन, US का ट्रेज़री डिपार्टमेंट. क्रीमिया प्रकरण के बाद उसने रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए. इसके अंतर्गत कई रूसी नागरिकों पर भी सैंक्शन लगा. सैंक्शन्स की लिस्ट में एक कंपनी थी- गनवोर ग्रुप. अमेरिकी ट्रेज़री डिपार्टमेंट के मुताबिक, इस कंपनी में पुतिन का पैसा लगा है. डिपार्टमेंट ने ये भी कहा था कि रूसी एनर्जी सेक्टर में पुतिन ने बड़े स्तर पर सीक्रेट निवेश किया हुआ है.
2016 में इसी US ट्रेज़री डिपार्टमेंट ने खुलकर पुतिन को करप्ट बोल दिया था. ये प्रकरण लितविनेनको मर्डर केस से जुड़ा है. ब्रिटेन ने 2016 में इसकी जांच रिपोर्ट जारी की थी. इसी रिपोर्ट के बैकग्राउंड में BBC ने एक रिपोर्ट की. इसमें US ट्रेज़री डिपार्टमेंट के सेंक्शन्स लगाने वाले डिपार्टमेंट के मुखिया ऐडम सज़बिन से बात की गई थी. पुतिन की बात चली, तो ऐडम ने कहा-
पुतिन भ्रष्ट हैं. अमेरिकी सरकार कई सालों से ये बात जानती है. हमने देखा है कि पुतिन किस तरह अपने दोस्तों और करीबी सहयोगियों को अमीर बनाते हैं. चाहे रूस का ऊर्जा भंडार हो, या सरकारी ठेके, पुतिन अपने सहयोगियों को इनसे लाभ दिलवाते हैं. ये करप्शन ही तो है.

US ट्रेज़री डिपार्टमेंट के सेंक्शन्स लगाने वाले डिपार्टमेंट के तत्कालीन मुखिया ऐडम सज़बिन. (तस्वीर: एएफपी)
पुतिन का नाम फोर्ब्स की किसी बिलिनेयर रैंकिंग में नहीं मिलेगा आपको
मगर जानकारों के मुताबिक, उनके पास पांच लाख करोड़ से अधिक की संपत्ति होने का अनुमान है. अगर ये अंदाजा सही है, तो फिर पुतिन विश्व इतिहास के सबसे अमीर राष्ट्राध्यक्ष हैं. बल्कि राष्ट्राध्यक्ष क्या, इस कैलकुलेशन के हिसाब से तो वो दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शामिल हैं.
पुतिन अपने ऊपर लगे करप्शन के आरोपों से इनकार करते हैं. क्रेमलिन कहता है कि ये आरोप, महल की बातें, ये निरी बकवास हैं. पुतिन और क्रेमलिन भले नकारें, मगर बदहाल इकॉनमी में फंसी रूसी जनता भ्रष्टाचार के मुद्दे पर पुतिन के खिलाफ़ लामबंद हो रही है. रूस ने कभी ज़ार के खिलाफ़ क्रांति की थी. आज पुतिन का दर्जा भी ज़ार से कम नहीं. उन्होंने लाइफ़टाइम प्रेज़िडेंसी ले ली. क़ानून बना दिया कि पद छोड़ने के बाद भी उनपर कोई मुकदमा नहीं चल सकेगा. पुतिन जिस तरह ख़ुद को इम्युनिटी दिए जा रहे हैं, उससे तो यही लगता है कि भीतर-ही-भीतर वो भी डरे हुए हैं. पुतिन की हालत देखकर लगता है, लितविनेनको की मरने से पहले की गई भविष्यवाणी सच हो रही है. सच में ही बग़ावत की चीखें पुतिन का पीछा नहीं छोड़ रहीं.
























