उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस बार के यूपी विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान सूबे की कानून व्यवस्था का बार-बार जिक्र किया. उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था एकदम चुस्त-दुरुस्त हो चुकी है. अखिलेश यादव की सरकार पर जंगलराज का आरोप लगाते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि उनकी सरकार में तो गुंडे-अपराधी पुलिस के डर से या तो प्रदेश छोड़कर जा चुके हैं या फिर जेल के अंदर हैं. लेकिन यूपी की कानून व्यवस्था से जुड़े कुछ तथ्य सीएम योगी के दावों पर सवाल खड़े करते हैं. दिलचस्प और हैरान करने वाली बात ये है कि ये तथ्य खुद यूपी पुलिस से जुड़े हैं जिस पर अपराध रोकने नहीं, बल्कि खुद अपराध करने के गंभीर आरोप लगे हैं.
'अपराध मुक्त' यूपी की पुलिस पर रेप और हत्या के आरोप, ललितपुर का मामला परेशान कर देगा!
अखिलेश यादव की सरकार पर जंगलराज का आरोप लगाते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि उनकी सरकार में तो गुंडे-अपराधी पुलिस के डर से या तो प्रदेश छोड़कर जा चुके हैं या फिर जेल के अंदर हैं. लेकिन यूपी की कानून व्यवस्था से जुड़े कुछ तथ्य सीएम योगी के दावों पर सवाल खड़े करते हैं.


मनीष गुप्ता हत्याकांड
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में पिछले साल 27 सितंबर की रात को मनीष गुप्ता नाम के व्यक्ति की हत्या कर दी गई थी. कानपुर के रहने वाले मनीष गुप्ता पेशे से प्रॉपर्टी डीलर थे. घटना के दिन वो गोरखपुर के रामगढ़ताल इलाके में बने होटल कृष्णा पैलेस में ठहरे थे. आरोप है कि पुलिसवाले बेवजह देर रात को होटल पहुंचे और तलाशी के नाम पर मनीष गुप्ता के साथ मारपीट की. इस पिटाई से मनीष गुप्ता की मौत हो गई. उनकी पत्नी मीनाक्षी ने रामगढ़ताल थाने में तैनात रहे इंस्पेक्टर जेएन सिंह, दरोगा अक्षय मिश्रा, राहुल दुबे, विजय यादव, कांस्टेबल कमलेश यादव और आरक्षी प्रशांत के खिलाफ हत्या की FIR दर्ज कराई. मीडिया में इस घटना को लेकर तगड़ा बवाल मचा था. ऐसे में छह पुलिसवालों को सस्पेंड कर दिया गया था.
इस मामले में दो अक्टूबर 2021 को SIT गठित की गई थी. पुलिस ने 10 अक्टूबर से 16 अक्टूबर के बीच सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. आगे मामला CBI के पास पहुंचा. दो नवंबर से CBI ने जांच शुरू की. इस साल 7 फरवरी को उसने सभी आरोपियों के खिलाफ हत्या के आरोप में चार्जशीट दाखिल कर दी.

मनीष गुप्ता हत्याकांड की जांच CBI को सौंपी गई थी.
कुछ दिन पहले इस मामले के तीन आरोपियों कमलेश, प्रशांत और राहुल ने खुद का नाम केस से बाहर करने की याचिका डाली थी. इसमें कहा गया था कि वे तीनों घटना के बाद मौके पर पहुंचे थे. ऐसे में उन पर हत्या का मामला नहीं चलना चाहिए. लेकिन कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया.
चंदौली हत्याकांड
चंदौली के सैयदराजा थाना इलाके का मनराजपुर गांव. बीती एक मई को यहां एक युवती की मौत हो जाती है. आरोप लगता है कि यूपी पुलिस के ऊपर. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस गांव में रहने वाले कन्हैया यादव के यहां दबिश देने गई थी जिन पर कई आपराधिक मामले दर्ज हैं. आरोप है कि दबिश के दौरान पुलिस ने कन्हैया यादव की बेटियों के साथ मारपीट की जिससे एक बेटी की मौत हो गई.
इस मामले में मृतका के पिता की तहरीर पर सैयदराजा के निलंबित थानाध्यक्ष समेत छह पुलिसकर्मियों पर गैर-इरादतन हत्या का केस दर्ज किया गया. इस बीच समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोपियों के खिलाफ हत्या की FIR दर्ज करने की मांग उठा दी. उधर आरोपियों की तरफ से युवती की मौत को आत्महत्या का मामला बताया गया. हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आत्महत्या की पुष्टि नहीं हुई. रिपोर्ट में युवती के शरीर पर जगह-जगह चोट लगने की बात सामने आई है.

दबिश देने गई चंदौली पुलिस टीम पर लगे संगीन आरोप (फोटो: आजतक)
इस मामले की जांच को CBCID को सौंपा गया है. हालांकि, मृतका के घरवाले चाहते हैं कि CBI इसकी जांच करे. इधर कई संगठन आरोपियों के खिलाफ हत्या की FIR दर्ज करने को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.
ललितपुर बलात्कार
उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले का पाली थाना. यहां एक नाबालिग अपने साथ हुए कथित बलात्कार की शिकायत दर्ज कराने जाती है. पुलिस पर बेहद गंभीर आरोप है कि उसने पीड़िता को इंसाफ दिलाने के बजाय उसी के साथ रेप किया. बच्ची की मां ने आरोप लगाया है कि 27 अप्रैल को उनकी बेटी को थाने बुलाकर बयान लिया गया था, लेकिन उसी शाम थाना इनचार्ज ने एक कमरे में ले जाकर पीड़िता का रेप किया.
इस मामले में आरोपी थाना इनचार्ज तिलकधारी सरोज को चार मई को गिरफ्तार कर लिया गया. गिरफ्तारी से पहले ही उसे सस्पेंड किया जा चुका था. केस दर्ज होते ही आरोपी पुलिसकर्मी फरार हो गया था. उसकी तलाश में पुलिस टीम ने बांदा, कौशांबी और प्रयागराज में छापेमारी की. बाद में उसे प्रयागराज से गिरफ्तार किया गया.

आरोपी को 4 मई को गिरफ़्तार कर लिया गया (फोटो - File/ANI)
तिलकधारी सरोज ने खुद को निर्दोष बताया है. उसका कहना है कि उसे फंसाया जा रहा है. ये भी बताया कि अगर निष्पक्ष तरीके से जांच हो, तो उसके खिलाफ दोष साबित नहीं होगा. तिलकधारी सरोज के अलावा इस मामले में पांच और लोगों के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज किया गया है. बच्ची की मां ने शिकायत में कहा है कि चार लोग 22 अप्रैल को उनकी बेटी को अगवा कर भोपाल ले गए थे जहां उसका रेप किया गया. बाद में आरोपी ने पीड़िता को ललितपुर में छोड़ दिया.
सिद्धार्थनगर का मामला
उत्तर प्रदेश का सिद्धार्थनगर जिला. यहां के सदर थाने की पुलिस टीम पर हत्या का आरोप लगा है. इसके मुताबिक पुलिस ने 50 साल की एक महिला की गोली मारकर हत्या कर दी. आरोपी पुलिस टीम के खिलाफ हत्या की धारा के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस एक संदिग्ध को पकड़ने आई थी, इसी दौरान एक महिला की मौत हो गई.
मामला क्षेत्र के टोला इस्लामनगर का है. मृतका रोशनी के बेटे अतीकुर्रहमान ने मीडिया को बताया कि 14 मई की रात को काफी संख्या में पुलिसकर्मी उनके घर पहुंचे थे. वे उनके भाई अब्दुल रहमान को गिरफ्तार करने आए थे. इस बीच मां रोशनी ने पूछा कि आखिर किस आरोप में अब्दुल की गिरफ्तारी हो रही है. इसके बाद मां अब्दुल रहमान से लिपट गई. अतीकुर्रहमान ने आरोप लगाया कि इस बीच पुलिस के लोगों ने गोली चलाई, जिससे उनकी मां रोशनी की मौत हो गई.

सिद्धार्थनगर का मामला, पुलिस टीम पर हत्या का केस दर्ज (फोटो: आजतक)
इधर सिद्धार्थनगर पुलिस की तरफ से ट्वीट कर कहा गया कि गोकशी की सूचना पर पुलिस घटनास्थल पर गई थी. इससे पहले भी वहां गोकशी की घटनाएं हुई हैं. इस दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में महिला की मृत्यु हो गई. पुलिस की तरफ से कहा गया कि इस पूरे मामले की जांच की जा रही है और जो भी दोषी पााया जाएगा, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
वीडियो-UP के ललितपुर जिले में थानेदार पर 13 साल की बच्ची का रेप करने का आरोप




















