पिछले दिनों सोशल मीडिया पर ढेर सारे लोग कह रहे थे कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन को अर्थशास्त्र के नोबेल के लिए नॉमिनेट किया गया है. ये अवॉर्ड स्वीडन के अविष्कारक अल्फ्रेड नोबेल के नाम पर शुरू हुआ था, जिसे स्वीडन की रॉयल एकेडमी ऑफ साइंसेस देती है. राजन के नॉमिनेशन वाली बात सच हो भी सकती है और नहीं भी, क्योंकि नोबेल कमेटी ने 50 सालों से नॉमिनेट किए गए नाम घोषित नहीं किए हैं. हालांकि, राजन के नॉमिनेशन वाली बात तब बेमतलब हो गई, जब शिकागो यूनिवर्सिटी के बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस के अर्थशास्त्री रिचर्ड थालेर को अर्थशास्त्र के नोबेल का विजेता घोषित किया गया.
मिलिए नोबेल जीतने वाले इस अर्थशास्त्री से, जो कहता है, 'भारत का घाटा, हमारा फायदा'
रिचर्ड थालेर, जिनके बारे में आपको बताया जा रहा है कि इन्होंने नोटबंदी को सपोर्ट किया था, लेकिन ये आधा सच है.


RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन, जिनके पिछले दिनों किताब लॉन्च हुई थी- I Do What I Do
रिचर्ड थालेर. वो अर्थशास्त्री, जो बड़ी-बड़ी थ्योरीज को डरावने शब्दों में नहीं ढालता, बल्कि उसे मनोविज्ञान से जोड़ता है. चीजें खुद ही आसान हो जाती हैं. उदाहरण के तौर पर नेताओं की रैलियां ही ले लीजिए. नेता ऊंचे मंचों से भाषण देते हैं और नीचे बैठे लोग सिर उठाकर उन्हें सुनते हैं. ये बड़ा सामान्य दिखता है. लेकिन साइकॉल्जी के मुताबिक सिर ऊपर करके किसी को देखते-सुनते हुए हम सम्मोहन की हालत में होते हैं और उसकी बातों से सहमत हो जाते हैं. अपने दिमाग के बारे में ये जानना रोमांचक है. थालेर अर्थशास्त्र को ऐसे ही समझाते है, जिसके उदाहरण हम नीचे आपको बताएंगे.

अर्थशास्त्री रिचर्ड थालेर
वैसे नेताओं की रैली से मुझे रिचर्ड थालेर का भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ा किस्सा याद आता है. मोदी ने 8 नवंबर 2016 को 500 और 1000 के नोट बंद करने की घोषणा की थी. थालेर ने इसका समर्थन करते हुए कहा था, 'मैंने इस पॉलिसी का लंबे समय से समर्थन किया है. ये कैशलेस की तरफ पहला कदम और भ्रष्टाचार घटाने के लिए अच्छी शुरुआत है.'
नोटबंदी के फैन क्लब ने उनके इस रिएक्शन का ज़िक्र नहीं किया, जबकि नोटबंदी का फैसला गलत मानने वाले रघुराम राजन के बारे में थालेर कुछ ऐसा मानते हैं-

रघुराम राजन के बूथ वापस जाने पर रिचर्ड का ट्वीट
ये तो हुईं भारत से जुड़ी बातें. अब थालेर के उस काम की बात करते हैं, जिसके लिए उन्हें नोबेल मिला है. थालेर कहते हैं कि हम इंसान के दिमाग को सुपर कंप्यूटर मानते हैं, जबकि ये पुराना एपल मैक है. इसका प्रोसेसर बहुत धीमा है, इसलिए अर्थशास्त्र को आसान भाषा में बताना पड़ता है. पेट्रोल के इस उदाहरण से वो बताते हैं कि कैसे इंसान बिना तर्क के फैसले लेते हैं और फिर बाज़ार प्रभावित होता है-
'जब पेट्रोल सस्ता होता है, तो स्वाभाविक रूप से लोगों की बचत होती है. लेकिन इस बचत को ज़्यादा ज़रूरी चीज़ों पर खर्च करने के बजाय लोग ज़्यादा पेट्रोल खरीदते हैं. वो प्रीमियम पेट्रोल लेते हैं, भले वो उनकी कार के लिए खराब हो.' मॉडर्न बिहेवियरल इकॉनमिक्स के फाउंडर्स में से एक थालेर ये जानने को लेकर बहुत उत्सुक रहते हैं कि लोग पैसे से जुड़े फैसले कैसे लेते हैं.

रिचर्ड थालेर
थालेर के पास एक और उदाहरण है, जो बताता है कि किस तरह लोग बिना सोचे-समझे बचकाने फैसले लेते हैं. जैसे एक फैमिली ने अपना ड्रीम होम खरीदने के लिए 15 हज़ार डॉलर बचाए और सोचा कि वो पांच साल में ये घर खरीदेंगे. मार्केट में रहते हुए ये पैसा 10% तक ब्याज दे सकता है. फिर उस फैमिली ने 11 हजार डॉलर की एक नई कार खरीदी, जिसके लिए उन्होंने 15% के ब्याज पर तीन साल के लिए लोन लिया. अब ये कितना बेवकूफाना है कि 15 हज़ार डॉलर की सेविंग्स होते हुए भी वो फैमिली उल्टा बैंक को ब्याज चुका रही है.

एक इंटरव्यू देने से पहले थालेर
क्या है रिचर्ड थालेर की थ्योरी
20वीं सदी के ज्यादातर अर्थशास्त्री मानते थे कि लोग फैक्ट्स के साथ बर्ताव करते हैं. फिर उन्होंने पाया कि ये बात सही नहीं है और ये धारणा दूर करने में सबसे बड़ी भूमिका 1945 में पैदा हुए थालेर की है. उन्होंने ये बहस नहीं की कि लोग तर्कहीन हैं. उन्होंने कहा कि लोग धीरे-धीरे सिस्टमैटिक तरीके से तार्किकता से दूर होते जा रहे हैं. बाजार और विज्ञापन की साइकॉल्जी के मुताबिक वो लोग ढल रहे हैं, अर्थशास्त्र और पैसे से जुड़ी चीजों को जटिल मानकर उन्हें समझने की ज़हमत नहीं उठा रहे.

रिचर्ड थालेर
बिहेवियरल इकॉनमिक्स (व्यावहारिक अर्थशास्त्र) की थालेर की थ्योरी कहती है कि हम किसी चीज की तब ज्यादा कीमत लगाते हैं, जब वो हमारे पास नहीं होती है और जब वो हमारे पास होती है, तो हम उसकी कीमत कम करके आंकते हैं. इसे एनडाउमेंट इफेक्ट कहते हैं. थालेर के मुताबिक कम समय तक टिकने वाले प्रलोभन (शॉर्ट टर्म टेंप्टेशन) में पड़ने की वजह से लोग बुढ़ापे के लिए पैसे नहीं बचा पाते या हेल्दी लाइफस्टाइल नहीं जी पाते.
किताब और फिल्म
2008 में थालेर की किताब आई थी 'Nudge', जिसे थालेर ने प्रो. कास आर. सन्सटीन के साथ लिखा था. ये खूब फेमस हुई. 2015 में आई फिल्म 'दि बिग शॉर्ट' में थालेर ने कैमियो किया था. इस फिल्म में क्रिश्चियन बेल, रायन गूसलिन, ब्रैड पिट, स्टीव केरेल और सेलेना गोमेज जैसे स्टार्स थे.

सेलेना गोमेज़ के साथ रिचर्ड थालेर
डॉलर से बना सरनेम, खुद भी हैं अर्थशास्त्री
थालेर को नोबेल देने वाली जूरी का कहना है कि थालेर ने इकॉनमिक्स को ज्यादा इंसानी बनाया है. नोबेल अवॉर्ड के साथ उन्हें 90 लाख स्वीडिश क्राउन यानी 11 लाख अमेरिकन डॉलर यानी लगभग 7 करोड़ 17 लाख रुपए मिले हैं. इस पैसे का क्या करेंगे के सवाल पर थालेर हंसते हुए कहते हैं कि वो इसे जितना हो सकेगा, उतने तर्कहीन तरीके से खर्च करेंगे. संयोग से थालेर का फैमिली नाम 'डॉलर' शब्द के जर्मन अर्थ से निकला है.
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