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क्रिकेट इतिहास के 5 बड़े मौके, जब केवल एक कैच ड्रॉप ने सारा खेल बदल डाला

'पकड़ो कैच जीतो मैच' क्यों बोलते हैं, पाकिस्तान टीम का हाल देखकर समझ गए ना!

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हसन अली का एक कैच छोड़ना पाकिस्तान को विश्व कप हरा गया. (तस्वीर- Twitter@DennisCricket से साभार है.

पकड़ो कैच जीतो मैच.

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क्रिकेट मैचों के दौरान कमेंटेटर ये लाइन बार-बार दोहराते हैं. गुरुवार 11 नवंबर को इसकी और एक बड़ी वजह देखने को मिली. टी20 विश्व कप 2021 के सेमीफाइनल में. पाकिस्तान कसी हुई गेंदबाजी कर रहा था. ऑस्ट्रेलिया के 5 बल्लेबाजों को उसके गेंदबाज चलता कर चुके थे. ऑस्ट्रेलिया को जीत के लिए 12 गेंदों में 22 रन चाहिए थे. लेकिन खतरनाक दिख रहे मैथ्यू वेड का कैच हसन अली ने क्या छोड़ा पाकिस्तान के हाथ से विश्व कप छूट गया. क्योंकि अगली तीनों गेंदों पर तीन गगनचुंबी छक्के जड़कर मैथ्यू वेड ने ऑस्ट्रेलिया को सेमीफाइनल में पहुंचा दिया. इस विश्व कप की सबसे मजबूत टीम दिख रही पाकिस्तान का टी20 विश्व कप जीतने का सपना चकनाचूर हो गया. अब तो बस हाथ मलना रह गया था. मतलब ये कि क्रिकेट में ये नहीं कह सकते कि एक कैच छूट गया तो कोई बात नहीं. बहुत बड़ी बात है जनाब. इस रिपोर्ट में ऐसी ही पांच बड़ी बातों, मतलब मैचों के बारे में जानेंगे जिनमें बस एक कैच ही छूटा था और सारा खेल बदल गया. 1. किरण मोरे ने छोड़ा ग्राहम गूच का विकेट साल था 1990 का. भारतीय क्रिकेट टीम इंग्लैंड पहुंची. टेस्ट सीरीज खेलने. इंग्लैंड को उसी के घर में हराने की चुनौती थी. एक मैच में इंग्लैंड के दिग्गज बल्लेबाज ग्राहम गूच 36 रन पर खेल रहे थे. तभी उनका कैच पकड़ने का मौका मिला. विकेटकीपर किरण मोरे को. वो कैच मोरे पकड़ लेते तो भारत मैच जीत सकता था. लेकिन मोरे ने गेंद टपका दी. ड्रॉप कर दी. बस, इसके बाद तो गूच ने पहली पारी में तिहरा शतक जड़ दिया. पूरे 333 रन बना डाले. दूसरी पारी में भी कहर बरपाया. 123 रन ठोके. उस एक कैच ड्रॉप की वजह से भारत 247 रनों से हार गया. 2. अब्दुल रजाक ने 2003 विश्व कप में सचिन का कैच छोड़ा साल 2003. वनडे क्रिकेट का विश्व कप चल रहा था. आमने-सामने थे इंडिया और पाकिस्तान. पहले बल्लेबाज़ी पाकिस्तान ने की. 273 का स्कोर बनाया. सईद अनवर ने उस मैच में शतक बनाया था. फिर भारत की बैटिंग आई. दूसरे ही ओवर में सचिन तेंदुलकर ने शोएब अख्तर की गेंद पर थर्ड मैन वाला यादगार छक्का मारा. फिर लगातार दो चौके. पाकिस्तान समझ गया आज पिटना तय है. लेकिन एक मौका बना था सचिन को आउट करने का. तब वो 32 के स्कोर पर खेल रहे थे. वसीम अकरम ने गेंद फेंकी. सचिन ने मिड ऑफ के ऊपर से चौके मारने की कोशिश की. लेकिन नाकाम रहे. गेंद अब्दुल रजाक के हाथ में... आई और ड्रॉप हो गई. वसीम अकरम का मुंह देखने लायक था. उन्हें पता था अब क्या होगा. जो हुआ भी. सचिन ने ताबड़तोड़ 98 रन ठोक डाले. उनकी बैटिंग ने पाक गेंदबाजी खेमे में ऐसी दहशत मचाई कि उन्हें आउट करने के बाद भी वो दोबारा मैच में वापसी नहीं कर पाए. भारत ने आसानी से मैच जीत लिया. 3. मार्लन सैमुअल्स ने छोड़ा मार्टिन गप्टिल का कैच 2015 में आईसीसी विश्व कप का चौथा क्वार्टर फ़ाइनल चल रहा था. पहले बल्लेबाज़ी कर रही थी न्यूजीलैंड . मार्टिन गप्टिल जब 4 रनों पर खेल रहे थे, तब वेस्टइंडीज़ की टीम से एक बड़ी गलती हो गई. और उस गलती का ख़ामियाज़ा टीम को हार के रूप में भुगतना पड़ा. मैच के पहले ही ओवर में मार्टिन गप्टिल ने स्क्वायर लेग पर एक शॉट खेला. कैच गया मार्लन सैमुअल्स के हाथों. लेकिन वो कैच नहीं पकड़ पाए. मौक़े का फ़ायदा उठा के गप्टिल ने टीम का स्कोर पहुंचा दिया 233 पर और टीम जीत के साथ जा पहुंची सेमीफ़ाइनल में. 4. थिसारा परेरा ने छोड़ा रोहित शर्मा का कैच 13 नवंबर 2014. रोहित शर्मा की यादगार 264 रनों वाली पारी इसी दिन देखने को मिली थी. मुकाबला था श्रीलंका से. भारत पहले बल्लेबाजी कर रहा था. ओपनर रोहित केवल 4 रन के स्कोर पर थे जब थिसारा परेरा ने उनका कैच छोड़ दिया. रोहित ने इसका ऐसा फायदा उठाया कि इतिहास ही बना डाला. 264 रन अकेले ही ठोक डाले. ये वनडे क्रिकेट का आज तक का सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर है. 5. हर्शल गिब्स ने छोड़ा स्टीव वॉ का कैच 1999 का विश्व कप था. क्वार्टरफाइनल में आमने सामने थे ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ़्रीका. ऑस्ट्रेलिया को जीत के लिए 272 रन बनाने थे. लेकिन दक्षिण अफ्रीका के धाकड़ गेंदबाजों ने महज 48 रनों पर ऑस्ट्रेलिया के 3 विकेट चटका दिए थे. तब क्रीज पर आए कैप्टन स्टीव वॉ और वनडे क्रिकेट की सबसे यादगार और बेहतरीन पारियों में से एक खेल गए. 110 गेंदों पर 120 रन पीट दिए. लेकिन इस पारी के दौरान उनका एक कैच छूटा था. वो भी दुनिया के सबसे धाकड़ फील्डर के हाथ से. हर्शल गिब्स. कैच भी ऐसा जिसे हमारे यहां गली-मोहल्ले के क्रिकेट में लड्डू कैच बोलते हैं. फिर क्या ही था. स्टीव ने अपनी तूफानी बल्लेबाज़ी से बड़ा स्कोर बना दिया, ऑस्ट्रेलिया ने वो मैच जीत लिया. और उसी साल विश्व कप की ट्रॉफ़ी भी उठाई.

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