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भारत-पाकिस्तान के जल युद्ध में कूदेगा चीन? सिंधु नदी के बदले ब्रह्मपुत्र का पानी रोका तो क्या होगा?

India-Pakistan के बीच युद्ध विराम भले ही हो चुका हो, मगर Indus Water Treaty अब भी होल्ड पर है. ऐसे में अब पाकिस्तान अपने आका चीन से भारत का पानी रोकने की गुहार लगा रहा है. क्या ब्रह्मपुत्र नदी का पानी (Brahmaputra water) रोकने से भारत को चीन और पाकिस्तान के साथ दो तरफा जंग (Two Front War) का सामना करना पड़ेगा? अगर ऐसा हुआ तो क्या नतीजा हो सकता है?

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सिंधु मुद्दे पर दो तरफा चुनौती से घिर सकता है भारत (फोटो- AI)

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के चुनिंदा ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की. तीन दिनों तक सरहद पर मिसाइलें, ड्रोन और एयर क्राफ्ट नजर आते रहे. अब युद्ध विराम हो चुका है. मगर सिंधु जल समझौता अब भी स्थगित है. भारत के इस एक्शन से पाकिस्तान बेचैन हो उठा है. जब खुद एक्शन पर रिएक्शन देते नहीं बना तो शहबाज शरीफ ने अपने पुराने दोस्त चीन से गुहार लगाई. सिंधु के बदले ब्रह्मपुत्र का पानी रोकने को कहा, जिसे नॉर्थ-ईस्ट इंडिया की लाइफ लाइन कहा जाता है. क्या चीन वाकई में ऐसा करके भारत को टू फ्रंट वॉर में उलझाने की कोशिश करेगा? अगर हां, तो फिर भारत-पाकिस्तान और चीन के बीच इस तीन तरफ जल युद्ध का अंजाम क्या होगा?

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गौरतलब है कि भारत ने हाल ही में सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया है, जो 1960 में वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता से बनी थी. इस संधि के तहत भारत ने उदारता दिखाते हुए पाकिस्तान को सिंधु बेसिन के 80% से ज्यादा पानी का अधिकार दिया था. लेकिन अब आतंकवाद और लगातार दुश्मनी के चलते भारत ने इस ऐतिहासिक संधि पर पुनर्विचार कर पाकिस्तान को बड़ा झटका दिया है. सिंधु जल का प्रवाह रुकने से पाकिस्तान की खेती, ऊर्जा उत्पादन और पीने के पानी की आपूर्ति पर सीधा असर पड़ेगा. हालांकि प्रभाव तत्काल नहीं दिखेगा, लेकिन लंबे समय में पाकिस्तान के लिए यह एक गंभीर संकट बन सकता है.

भारत एक साथ दो मोर्चों पर चुनौती झेल रहा है. पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि विवाद और चीन के साथ ब्रह्मपुत्र नदी पर रणनीतिक टकराव. जहां पाकिस्तान भारत से सिंधु जल संधि के तहत मिलने वाले पानी को रोकने पर बौखला गया है. ट्रिब्यून की खबर के मुताबिक पाकिस्तान अब चीन से अपील कर रहा है कि वह भारत का पानी रोककर उसे सबक सिखाए. 

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ब्रह्मपुत्र नदी: भारत के लिए क्यों है जीवनरेखा?

ब्रह्मपुत्र नदी भारत के पूर्वोत्तर राज्यों, खासकर अरुणाचल प्रदेश और असम के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक ये न केवल खेती और जल आपूर्ति का प्रमुख स्रोत है, बल्कि हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स के लिए भी बेहद अहम है. भारत के उत्तर-पूर्वी इलाकों में ब्रह्मपुत्र पर निर्भर लाखों किसान, मछुआरे और उद्योग हैं.

चीन का सुपर डैम प्लान: क्या भारत के लिए खतरा?

हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के मुताबिक चीन तिब्बत के मेडोग क्षेत्र में ब्रह्मपुत्र पर एक विशाल डैम बनाने की तैयारी में है. यह डैम Three Gorges Dam से भी बड़ा हो सकता है, जिससे चीन को ऊर्जा उत्पादन के साथ-साथ ब्रह्मपुत्र के पानी के प्रवाह पर भी नियंत्रण मिल सकता है.
चीन ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि डैम से भारत में पानी के बहाव पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा. लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में अगर चीन चाहे तो वह प्रवाह नियंत्रित कर भारत को रणनीतिक रूप से दबाव में ला सकता है.

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चीन पानी रोके तो भारत पर क्या असर होगा?

अगर चीन ब्रह्मपुत्र का पानी रोकता है या प्रवाह बदलता है, तो इसका असर कई तरीकों से भारत पर पड़ सकता है.

  • असम और अरुणाचल प्रदेश में जल संकट: खेती, मछली पालन और घरेलू जल आपूर्ति पर असर.
  • बाढ़ और सूखे का खतरा: मानसून के मौसम में अचानक पानी छोड़ने से बाढ़ और बाकी समय पानी रोकने से सूखे की संभावना.
  • विद्युत उत्पादन पर असर: ब्रह्मपुत्र बेसिन में बने हाइड्रो प्रोजेक्ट्स की क्षमता प्रभावित हो सकती है.


लेकिन यह असर सीमित होगा. राष्ट्रीय स्तर पर विनाशकारी नहीं होगा. क्योंकि भारत के पास गंगा, यमुना, गोदावरी, कृष्णा जैसी दर्जनों नदियां हैं. जो पूरी तरह देश के भीतर से निकलती हैं.

भारत कैसे देगा पानी-पानी का हिसाब?

 भारत भी चीन की किसी भी चाल का मुकाबला करने के लिए तैयारी कर रहा है. ऐसे कई कदम हैं, जो भारत की तैयारियों को दिखाते हैं.

  • फास्ट-ट्रैक डैम्स का निर्माण: अरुणाचल और असम में तेजी से जल भंडारण परियोजनाएं बनाई जा रही हैं.
  • जल विज्ञान डेटा साझा करने के समझौते: भारत चीन से लगातार बाढ़ के मौसम में जल प्रवाह का डेटा साझा करने पर जोर दे रहा है.
  • डिप्लोमेटिक प्रेशर: भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चीन से डैम निर्माण में पारदर्शिता और downstream देशों के अधिकारों का सम्मान करने की मांग कर रहा है.
पाकिस्तान के सपनों की चकनाचूर हकीकत

पाकिस्तान की यह कल्पना कि चीन भारत का पानी रोककर उसे झुका देगा, हकीकत से कोसों दूर है. भारत और चीन के बीच विवाद सीमाओं तक सीमित हैं, जबकि भारत पाकिस्तान के खिलाफ आतंकवाद के मसले पर बेहद सख्त है. इसलिए चीन के लिए भारत के खिलाफ पानी को हथियार बनाना उतना आसान या तात्कालिक नहीं है जितना पाकिस्तान सोच रहा है. भारत भी जल कूटनीति के मोर्चे पर सतर्क है और हर चुनौती के लिए तैयार है.

वीडियो: खर्चा-पानी: सिंधु जल समझौते पर रोक से पाकिस्तान को कितना नुकसान?

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