जब अमेरिकी डेल्टा फोर्स ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ा, तब राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ये सब लाइव देख रहे थे. ट्रंप के मुताबिक, यह उन्हें ‘टीवी शो’ जैसा लगा. फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, "मैंने काफी अच्छे मिशन किए हैं, लेकिन ऐसा पहले कभी नहीं देखा." वेनेजुएला में जो कुछ भी हुआ, उसकी स्क्रिप्ट कई महीने पहले से लिखी जा रही थी. यह अचानक किया गया हमला नहीं था, बल्कि एक प्री-प्लांड ऑपरेशन था, जिसे अंजाम देने के लिए CIA की एक टीम अगस्त से वेनेजुएला में एक्टिव थी.
CIA की महीनों की प्लानिंग, मादुरो सरकार में घुसा एजेंट... वेनेजुएला में ऐसे कामयाब हुआ अमेरिकी ऑपरेशन
वेनेजुएला में जो कुछ भी हुआ, उसकी स्क्रिप्ट कई महीने पहले से लिखी जा रही थी. यह अचानक किया गया हमला नहीं था, बल्कि एक प्री-प्लांड ऑपरेशन था, जिसे अंजाम देने के लिए CIA की एक टीम अगस्त से वेनेजुएला में एक्टिव थी. इस ऑपरेशन की एक-एक बात जानिए.


पूरी कहानी समझने के लिए पांच महीने पीछे चलते हैं. CNN ने एक सूत्र के हवाले से लिखा, ट्रंप ने अपने भरोसेमंद लोगों के साथ मिलकर इस मुद्दे पर काम करने के लिए एक टीम बनाई थी. इस टीम में ट्रंप के सीनियर सहयोगी स्टीफन मिलर, विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और CIA डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ समेत कई बड़े अधिकारी शामिल थे. ये लोग कई महीनों तक लगातार इस पर लगे रहे. आपस में अक्सर बात होती थी, कभी मीटिंग में तो कभी फोन पर, और कई बार तो रोज ही चर्चा होती थी.
सितंबर की शुरुआत में, जब अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला से कथित तौर पर ड्रग्स ले जा रही नाव पर हमला किया था, उससे पहले ही मादुरो को सत्ता से हटाने का प्लान बनना शुरू हो चुका था. एक तरफ अमेरिका कैरेबियन इलाके में खुले तौर पर अपनी सेना बढ़ा रहा था. वहीं दूसरी तरफ, चुपचाप एक और तैयारी भी चल रही थी.
अगस्त में ही CIA ने गुप्त रूप से वेनेजुएला में एक छोटी टीम भेजी थी. इस टीम का काम राष्ट्रपति मादुरो पर नज़र रखना था. वे कहां जाते हैं, कहां रहते है, क्या खाते हैं, कब सोते हैं… जैसी तमाम जानकारी जुटाईं जा रही थीं. सूत्रों के मुताबिक, इसी निगरानी से यह पता चल सका कि 3 जनवरी को ऑपरेशन के दिन मादुरो कहां होंगे.
इतना ही नहीं, अमेरिकी सेना के खास कमांडो, जिनमें डेल्टा फोर्स भी शामिल थी, उन्होंने मादुरो के सुरक्षित ठिकाने का हूबहू स्ट्रक्चर बनाकर अभ्यास किया. वे बार-बार ट्रेनिंग करते रहे कि उस मजबूत किलेबंदी वाले घर में अंदर कैसे घुसा जाए.
सरकार में शामिल था CIA का एजेंट
ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के प्रमुख जनरल डैन केन ने बताया,
टीम को मादुरो की रोज़मर्रा की पूरी जानकारी मिल गई थी. वे कहां रहते थे, कहां यात्रा करते थे, क्या खाते थे, क्या पहनते थे, उनके पालतू जानवर कौन-कौन से थे.
CNN को इस ऑपरेशन की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने बताया कि इसमें एक शख्स (एजेंट) ऐसा भी था, जो वेनेजुएला सरकार के अंदर रहकर CIA के लिए काम कर रहा था. इसी शख्स ने मादुरो की गिरफ्तारी से पहले उनके ठिकाने और उनकी गतिविधियों पर नज़र रखने में अमेरिका की मदद की.
नवंबर में ही दे दिया था अल्टीमेटम
CNN के मुताबिक, वॉइट हाउस के दो सीनियर अधिकारियों ने बताया कि मादुरो को सत्ता से हटाने की तैयारी चल रही थी, फिर भी अमेरिका यह मानकर चल रहा था कि मादुरो खुद ही अपना पद छोड़ देंगे. लेकिन ऐसा हुआ नहीं.
एक अधिकारी ने बताया कि नवंबर में ट्रंप और मादुरो के बीच फोन पर बात हुई थी. इस बातचीत में ट्रंप ने मादुरो से बार-बार कहा कि उनके लिए बेहतर यही होगा कि वे सत्ता छोड़ दें और देश से बाहर चले जाएं. अधिकारी के मुताबिक, यह बातचीत लगभग ‘एक आखिरी अल्टीमेटम’ जैसी थी.
चार दिन पहले ही होना था ऑपरेशन
अमेरिका ने 3 जनवरी को ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ शुरू किया. क्रिसमस से कुछ दिन पहले ही ट्रंप ने इस ऑपरेशन को हरी झंडी दे दी थी. यह ऑपरेशन चार दिन पहले होना था, लेकिन खराब मौसम की वजह से फिलहाल इसे आगे बढ़ा दिया गया. सेना और खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों ने सलाह दी कि थोड़ा इंतज़ार किया जाए, ताकि मौसम साफ हो और बादल कम हों.
ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के प्रमुख जनरल डैन केन ने बताया कि शुक्रवार, 2 जनवरी की रात 10:46 बजे (अमेरिकी समय) ट्रंप ने ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ को आखिरी मंजूरी दे दी. इस दौरान ट्रंप फ्लोरिडा के पाम बीच में अपने मार-ए-लागो क्लब में थे. वे अपने सलाहकारों के साथ बैठकर पूरे ऑपरेशन का लाइव प्रसारण देख रहे थे.
ऑपरेशन खत्म होने के बाद फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा,
मतलब, मैंने इसे देखा, सच में, जैसे कि मैं टेलीविजन शो देख रहा हूं. और अगर आपने रफ्तार देखी होती, हिंसा देखी होती... हमने इसका हर हिस्सा देखा.

ट्रंप की मंजूरी मिलने के कुछ ही देर बाद अमेरिकी हेलीकॉप्टर गहरे पानी से 100 फीट ऊपर उड़ते हुए काराकस की तरफ बढ़ रहे थे. अमेरिकी डेल्टा फोर्स के कमांडो काराकस में निकोलस मादुरो के घर में घुस गए. उस वक्त मादुरो अपनी पत्नी सिलिया फ्लोरेस के साथ सो रहे थे. पूरे ऑपरेशन के दौरान काराकस में बिजली बंद कर दी गई थी.
BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति ने बताया कि मादुरो लोहे की दीवारों से बने एक सुरक्षित कमरे में भागने की कोशिश कर रहे थे. वे दरवाज़े तक तो पहुंच गए, लेकिन उसे बंद नहीं कर पाए.
कुछ घंटों बाद, शनिवार, 3 जनवरी की सुबह ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक तस्वीर पोस्ट की. इसमें मादुरो हथकड़ी में दिख रहे थे, उन्होंने ग्रे रंग की ट्रैक पैंट और काले गॉगल्स पहन रखे थे और वे अमेरिकी हिरासत में थे.

यह कई महीनों से चल रही कार्रवाई का नाटकीय अंत था. जिसका मकसद शुरू से साफ था. मादुरो को सत्ता से हटाना. अमेरिका इस मकसद में सफल भी रहा. इसके बाद मादुरो और उनकी पत्नी को पहले एक जहाज पर बैठाया गया, फिर एक प्लेन से अमेरिका लाया गया.
प्लेन न्यूयॉर्क के मैनहट्टन से करीब 60 मील दूर स्टीवर्ट एयर नेशनल गार्ड बेस पर उतरा. यहां से दोनों को ब्रुकलिन के मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर ले जाया गया. अब मादुरो और उनकी पत्नी को ड्रग तस्करी से जुड़े आरोपों का सामना करना पड़ेगा.
न्यूयॉर्क टाइम्स ने नाम न छापने की शर्त पर एक अधिकारी के हवाले से बताया कि इस हमले में नागरिकों और सैनिकों समेत कम से कम 40 लोग मारे गए.
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‘वेनेजुएला को अमेरिका चलाएगा’
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका तब तक वेनेजुएला को 'चलाएगा' जब तक सत्ता का 'एक सुरक्षित, सही और समझदारी भरा बदलाव' नहीं हो जाता. उनसे पूछा गया कि अमेरिका यह सब कैसे करेगा, तो उन्होंने कोई डिटेल नहीं दी.
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी कंपनियां वेनेजुएला में जाकर उसके तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को ठीक करेंगी. इससे अमेरिका को कमाई होगी. ट्रंप ने कहा कि ऐसा करके अमेरिका लंबे समय से उठाए गए नुकसान की भरपाई करेगा.
वीडियो: दुनियादारी: ट्रंप ने बताया वेनेजुएला पर अमेरिका का 'कब्जा' कब तक रहेगा?


















