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फैज-ए-इलाही मस्जिद हिंसा मामले में सपा सांसद मोहिब्बुल्लाह नदवी का नाम कैसे आया?

मोहिब्बुल्लाह नदवी उत्तर प्रदेश के रामपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं. साथ ही संसद मार्ग स्थित मस्जिद के इमाम भी हैं. आज, 9 जनवरी को मीडिया ने इस पूरे मामले में उनका पक्ष जानने की कोशिश की. लेकिन वह बिना कोई जवाब दिए निकल गए.

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समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिब्बुल्लाह नदवी. (Sansad TV)

दिल्ली के तुर्कमान गेट के पास फ़ैज़-ए-इलाही मस्जिद के नज़दीक हुई झड़प और पथराव के मामले में समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिब्बुल्लाह नदवी जांच के घेरे में आ सकते हैं. दिल्ली पुलिस उन्हें जांच में शामिल होने के लिए समन भेजने की तैयारी कर रही है. इस मामले में अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. मगर सवाल है कि आखिर सपा सांसद का नाम इस मामले में कैसे आया?

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समाचार एजेंसी ANI ने सूत्रों के हवाले से बताया कि हिंसा से पहले नदवी मौके पर मौजूद थे और दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के बार-बार अनुरोध के बावजूद वह कुछ समय तक वहां से नहीं हटे. इससे पहले सेंट्रल रेंज के संयुक्त पुलिस आयुक्त मधुर वर्मा ने मीडिया को बताया था कि शुरुआती जांच में सामने आया है कि नदवी मौके पर मौजूद थे, लेकिन तोड़फोड़ शुरू होने से पहले वहां से चले गए थे. पुलिस इस पहलू की जांच कर रही है.

मोहिब्बुल्लाह नदवी उत्तर प्रदेश के रामपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं. साथ ही संसद मार्ग स्थित मस्जिद के इमाम भी हैं. आज, 9 जनवरी को मीडिया ने इस पूरे मामले में उनका पक्ष जानने की कोशिश की. लेकिन वह बिना कोई जवाब दिए निकल गए.

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हिंसा को लेकर पुलिस ने बताया कि 6-7 जनवरी की दरम्यानी रात दिल्ली के रामलीला मैदान इलाके में फ़ैज़-ए-इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई चल रही थी. इसी दौरान हिंसा भड़क गई और कई लोगों ने पुलिस पर पत्थर फेंके. इस पथराव में इलाके के थाना प्रभारी समेत पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए.

हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा और आंसू गैस के गोले छोड़े गए. पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया और एक नाबालिग को हिरासत में लिया. पुलिस का कहना है कि 10 से 15 लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में भी लिया गया है.

गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान मोहम्मद आरिब (25), मोहम्मद कैफ (23), मोहम्मद काशिफ (25) और मोहम्मद हमीद (30) के रूप में हुई है, जबकि 17 साल के एक लड़के को पकड़ा गया है. पुलिस के अनुसार, हिंसा में शामिल अन्य लोगों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो की जांच की जा रही है.

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पुलिस सूत्रों ने बताया कि स्थिति तब बिगड़ी जब सोशल मीडिया पर यह दावा किया गया कि तुर्कमान गेट के सामने स्थित मस्जिद को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान गिराया जा रहा है. इस खबर के फैलते ही बड़ी संख्या में लोग वहां इकट्ठा हो गए. पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में पता चला है कि पथराव में करीब 150 से 200 लोग शामिल थे और उन्होंने पुलिस व नगर निगम के कर्मचारियों पर पत्थर और कांच की बोतलें फेंकीं.

वीडियो: पुरानी दिल्ली में मस्जिद के पास तोड़-फोड़, पत्थरबाज़ी हुई, 5 पुलिसकर्मी घायल

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