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करणी सेना के इन गुंडों पर देशद्रोह का केस कब दर्ज होगा?

पद्मावत से आहत हुआ राजपूत इतना वीर है कि आग लगाकर भाग जाता है.

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धमकी देने वाली करणी सेना अब आगजनी पर उतर आई है.
1990 में अंग्रेजी के चर्चित लेखक वीएस नायपॉल ने एक किताब लिखी थी. नाम था India, A Million Mutinies Now. सामान्य हिंदी में समझें तो भारत, जहां लाखों क्रांतियां होती हैं. वो दौर था, जब देश के हर हिस्से में छोटी-बड़ी घटनाएं होती रहती थीं. जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के विस्थापन और वहां पनप रहे आतंकवाद से लेकर बिहार में अलग राज्य झारखंड की मांग के लिए हो रहे आंदोलन और महाराष्ट्र में मराठी अस्मिता के लिए बाल ठाकरे का संघर्ष. सब कुछ था उस दशक में जिसे देख-सुनकर वीएस नायपॉल ने वो किताब लिखी थी.
अब स्थिति दूसरी है. अब भारत क्रांतियों का देश नहीं, आहत होती भावनाओं का देश है. हर बात पर भावनाएं आहत हो जाती हैं. पिछली साल जेएनयू में नारेबाजी हुई, वीडियो जारी किया गया और कहा गया कि देश विरोधी नारे लगे हैं, भारत तेरे टुकड़े होंगे के नारे लगे हैं. वीडियो खूब वायरल हुआ, तो लोग आहत हो गए. बात देश की थी, तो बड़ा वर्ग आहत हुआ था. खूब भला-बुरा कहा गया, कन्हैया कुमार और उमर खालिद जैसे छात्रनेताओं की गिरफ्तारी हुई, देशद्रोह का केस  दर्ज हुआ और एक लंबी बहस हुई, जो आज भी कभी-कभी सिर उठा लेती है. अब पद्मावत फिल्म आने वाली है तो भावनाएं फिर से आहत हैं. इन आहत भावनाओं से होता क्या है, इसको समझाने का ठेका फिलहाल करणी सेना के पास है.

लगातार धमकी देने वाली करणी सेना अब हिंसा पर उतर आई है.

करणी सेना की कुछ धमकियों पर गौर फरमाइए-
सिनेमा हॉल में आग लगा देंगे.
पोस्टर फाड़ देंगे.
जो फिल्म देखने जाएगा, उसे अंजाम भुगतना होगा.
पूरे देश में चक्काजाम करेंगे.
महिलाएं जौहर कर लेंगी.
दीपिका पादुकोण और संजय लीला भंसाली की कब्र खोद देंगे.
फिल्म वालों के गले काट देंगे... वगैरह-वगैरह-वगैरह.
जब इन धमकियों से भी करणी सेना की आहत भावनाएं शांत नहीं हुईं, तो उन्होंने आगजनी कर दी. ये आगजनी हरियाणा के फरीदाबाद के पार्श्वनाथ मॉल के पीवीआर सिल्वर सिटी सिनेमा में की गई है. खुद करणी सेना ने इसका वीडियो भी बनाया है और उसे फेसबुक पर शेयर भी किया है.
वीडियो देखिए-

वीडियो में साफ तौर पर एक गोल्ड क्लास लिखा टिकट काउंटर नजर आ रहा है. काउंटर के पास एक नकाबपोश आता है. वह बाइक पर आने की बात बताता है. फिर दूसरा दिखता है, जबकि तीसरा उनका वीडियो बना रहा होता है. दोनों आपस में बात करते हैं.
एक कहता है-
'मैं पेट्रोल फैला रहा हूं तू माचिस पकड़.'
फिर दूसरे नकाबपोश की आवाज आती है
'आग कौन लगाएगा?'
पहला शख्स दूसरे को आग लगाने को कहता है. जो वीडियो बना रहा है उसकी आवाज आती है और कहता है-
'कोई भी आग लगा दो.'
इसके बाद काउंटर पर आग लगा दी जाती है और करणी सेना जिंदाबाद, राजपूत समाज जिंदाबाद के नारे लागते हुए तीनों भाग जाते हैं.

करणी सेना के फेसबुक पेज से हिंसा का वीडियो शेयर भी किया जा रहा है, लेकिन पुलिस करणी सेना के सदस्यों की गिरफ्तारी नहीं कर रही है.

इस आगजनी को देखिए और फिर से जेनएयू का मसला याद करिए, उन नारों को याद करिए, जिसमें कहा जाता है भारत तेरे टुकड़े होंगे. वो नारे थे, तो लाखों लोग आहत हुए थे. पूरी फोर्स लगानी पड़ी थी, दो लोग जेल गए थे और पूरे देश में इस बात की चर्चा हुई थी, बौद्धिक बहसें हुई थीं. लेकिन करणी सेना ने तो नारे ही नहीं लगाए हैं, आग भी लगाई है. उसने तो सुप्रीम कोर्ट के फैसले को भी नहीं माना, सरकार को नहीं माना, देश की कानून व्यवस्था को नहीं माना, संविधान को नहीं माना और एक मॉल में आग लगा दी. इसका गर्व भी इतना कि खुद ही वीडियो बनाकर शेयर भी करने लगे. एक देश के साथ इससे ज्यादा क्या खिलवाड़ हो सकता है.
करणी सेना के नेता ने दीपिका की नाक काटने की धमकी दी है.
करणी सेना के नेता ने दीपिका की नाक काटने की धमकी दी है. कुछ ने तो कब्रें खोदकर रखने की भी बात खुलेआम न्यूज़ चैनल के कैमरों के सामने स्वीकार की है.

लेकिन जेएनयू से बाहर आए डॉक्टर्ड वीडियो पर आहत होने वाले लोग करणी सेना पर आहत नहीं हो रहे हैं. अब तक कोई हुजूम इस देश में करणी सेना के खिलाफ सड़क पर नहीं निकला, किसी ने भीड़ इकट्ठी कर और रैली कर नहीं कहा कि करणी सेना गलत कर रही है, दोषियों को गिरफ्तार किया जाए. किसी ने अभी तक नहीं कहा कि करणी सेना पर देशद्रोह का केस दर्ज किया जाए. इतना ही नहीं, खुले आम धमकी देने वाले, न्यूज़ चैनलों के अंदर बैठकर दीपिका और संजय लीला भंसाली की कब्र खोदने का दावा करने वाले गर्व से अपना काम बता रहे हैं और सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है. ये हालत तब की है, जब सुप्रीम कोर्ट ने साफ तौर पर कह रखा है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार का काम है.
देश आहत भावनाओं से नहीं, संविधान से चलता है. देश चलाने के लिए भावनाएं नहीं विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका है. देश एक मुकम्मल देश ही रहे, करणी सेना जैसे कुछ आहत लोगों की वजह से औरों को परेशानी न हो, इसका खयाल रखना सरकार का काम है.


 
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