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जिस इंसान के सामने बच्चे सबसे ज्यादा कमजोर हो जाते हैं, वो ये है

हम अभी तक ये पता नहीं कर पाये हैं कि बच्चे किन स्थितियों में वल्नरेबल हैं.

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फोटो - thelallantop
रायन स्कूल में प्रद्युम्न नाम के बच्चे की हत्या के बाद देश में काफी बवाल हुआ. हर स्कूल की सिक्योरिटी के बारे में बात की जाने लगी. बच्चों से जुड़े अपराधों की चर्चा की जाने लगी. पर कोई निष्कर्ष नहीं निकल पाया है. हम अभी तक ये पता नहीं कर पाये हैं कि बच्चे किन स्थितियों में वल्नरेबल हैं. आखिर हम उनको दुनिया से अलग कर के तो रख नहीं सकते. इतने सारे सवालों के चक्कर में बच्चों के शोषण का एक एरिया हम लोग भूल गये. कुछ खबरों पर एक निगाह: मार्च 5, 2017 टाइम्स ऑफ इंडिया, अहमदाबाद 16 साल की एक छात्रा ने अपने 27 साल के ट्यूशन टीचर पर एक साल तक लगातार रेप करने का आरोप लगाया. मार्च 10, 2014 टाइम्स ऑफ इंडिया, कोच्चि 12 साल की एक छात्रा ने अपने 52 साल के ट्यूशन टीचर पर कई बार रेप करने का आरोप लगाया. सितंबर 10, 2014 इंडियन एक्सप्रेस, बेंगलुरू 10 साल की एक छात्रा ने अपने 32 साल के ट्यूशन टीचर पर कई बार रेप करने का आरोप लगाया. Child New आज की दुनिया में हर परिवार अपने बच्चों के लिए ट्यूशन टीचर लगवाता है. इस टीचर पर लोगों को अगाध विश्वास रहता है. ये टीचर किसी स्कूल से जुड़ा भी हो सकता है और नहीं भी जुड़ा हो सकता है. ये टीचर दो तरह के होते हैं. एक जो ट्यूशन को व्यवसाय की तरह लेते हैं. दूसरे जो पार्ट टाइम काम करके अपना खर्चा निकालना चाहते हैं. पर दोनों ही स्थितियों में इनकी वैधानिकता नहीं जांची जाती है. ऐसा मान लिया जाता है कि ये अच्छा ही होगा. पुराने जमाने में तो लोग ट्यूशन रखना पाप समझते थे क्योंकि मां बाप की ही जिम्मेदारी मानी जाती थी बच्चों को पढ़ाना. पर बदलते वक्त में सिलेबस बदले और मां बाप आउटडेटेड हो गये. तो फिलहाल के वक्त में ट्यूशन टीचर अपरिहार्य हो गया है. Child school पर इसमें एक पेच आता है. टीचर के बारे में आप कुछ नहीं जानते. आप बस इतना जानते हैं कि वो अच्छे से बात करता है और आपके बच्चे के भविष्य के बारे में चिंतित है. ज्यादातर घरों में ट्यूशन टीचर को एक अलग कमरा दे दिया जाता है बच्चे को पढ़ाने के लिए. ये किसी भी तरह के व्यवधान से मुक्ति के लिए किया जाता है पर इसके साथ ही बच्चे को टीचर के साथ अकेला छोड़ दिया जाता है. जो कि अपने आप में एक खतरनाक स्थिति है. दसवीं बारहवीं क्लास के जवान होते बच्चे हॉर्मोनल प्रभाव में रहते हैं. वहीं छोटी कक्षाओं के बच्चों को कुछ समझ ही नहीं आता. दोनों ही तरह के बच्चे जब मां बाप को इस टीचर को अतिरिक्त इज्जत देते हुए देखते हैं तो उनके मन में इस टीचर से विद्रोह करने की इच्छा ही खत्म हो जाती है. वो भी ये मान लेते हैं कि ये जो कह रहा है, कर रहा है, सही ही कर रहा होगा. teacher और यहीं पर कई दुर्भाग्यपूर्ण घटनायें होने के मौके निकल आते हैं. जैसा कि हमने खबरों में देखा, ये चीजें एक लंबे वक्त तक होती रहती हैं और परिवार को पता तक नहीं चलता. मेरे जानने वालों में कई ऐसे लोग हैं जिन्होंने ट्यूशन को व्यवसाय की तरह लिया है. ये लोग बताते हैं कि बहुत सारे टीचर स्टूडेंट्स से 'अफेयर' करने की कोशिश करते हैं. अपने से बड़ी उम्र के व्यक्ति से संपर्क होना और उसकी निजी जिंदगी के बारे में जानना बच्चों को थ्रिल से भर देता है. बहुत ही सफाई से ये लोग उनको पॉर्न और अन्य चीजों की आदत डालने लगते हैं. बाल मन और किशोर मन हर तरह की चीजें एक्सप्लोर करना चाहता है और ये लोग उसका नाजायज फायदा उठा लेते हैं. बच्चा किसी से कुछ कह नहीं पाता. techer child ट्यूशन के किसी भी टीचर की कोई वेरिफिकेशन नहीं होती है. आज की व्यस्त जिंदगी में वो आपके बच्चे का दोस्त, गाइड और निजी सलाहकार बन जाता है. ये उस व्यक्ति पर निर्भर करता है कि वो बच्चे को लेकर कितना गंभीर और संवेदनशील है. सोचिए कि अगर वो व्यक्ति संवेदनशील नहीं निकला तो? एक इंसान जिसे ना तो टीचिंग का कोई फॉर्मल अनुभव है, ना ही वो संवेदनशील है. पर आपके बच्चे को पढ़ा रहा है क्योंकि आप उसकी बातों से प्रभावित हैं. क्योंकि आपने बिल्कुल ही मेहनत नहीं की है अपने बच्चे की समस्या हल करने में. तो क्या हो सकता है? वो भी तब जब टीचर ही 18-19 साल का हो? इस स्थिति में तो वो खुद ही वल्नरेबल है. अगर बड़ी उम्र का है और चालाक है तब तो स्थिति और खतरनाक है. एक स्थिति और देखिए: मार्च 5, 2013 डीएनए, गाजियाबाद 18 साल के एक छात्र ने अपनी ट्यूशन टीचर का रेप किया. वो टीचर बीकॉम की स्टूडेंट थी और पार्ट टाइम पढ़ाती थी. Rape यहां पर मामला उलटा हुआ है. पर अगर जड़ में जाएं तो वजहें और प्रभाव दोनों एक ही हैं. परिवार जिम्मेदारी नहीं ले रहा. बच्चों को टीचर के साथ अकेले छोड़ा जा रहा है. मॉनिटरिंग नहीं की जा रही है. आंख मूंदे हुए हैं लोग. और दुर्भाग्यपूर्ण नतीजे सामने आते जा रहे हैं. इसका मतलब ये नहीं है कि जो भी लड़का पढ़ाने निकलता है, वो रेपिस्ट है. पर इसका मतलब ये भी नहीं है कि जो पढ़ाने निकलता है वो पाणिनि है. इन मामलों में विवेक से काम लेना होगा. बेसिक्स की ओर जाना होगा. सत्य, ईमानदारी, और जिम्मेदारी. भरोसा रखिए और बिल्कुल भी भरोसा ना रखिए. बिना बच्चे को प्रेशर में डाले भी ये काम हो सकता है. यही चीजें स्कूलों में भी काम आएंगी. हम इस चीज से लगातार अनभिज्ञ बने रहते हैं कि हमारा बच्चा किससे मिल रहा है, किससे नहीं मिल रहा. क्या कर रहा है, क्या सोच रहा है, नहीं पता. हम जितना ही उनके साथ लगेंगे, उनको जितना अपना दोस्त बनाएंगे, उनको जितना सेक्स और पॉर्न से संबंधित जानकारियां देते रहेंगे, उनको ताकतवर बनाते जाएंगे. इंटरनेट के जमाने में अब शर्माने की जरुरत नहीं है. हमें उनके साथ लगना ही होगा. ये स्वीकार करना होगा कि हमारे बच्चे कम उम्र में ही इन चीजों को समझने लगे हैं और इसमें कोई बुराई नहीं है. बस जरूरत है समझदार और ताकतवर बनने की.

ये आर्टिकल ऋषभ ने लिखा है.

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