मन गदगद है. आप दिल्ली में वर्ल्ड कल्चर फेस्ट करा रिये हो. यहीं अखबार में पढ़ा. पप्पू सुकुल की दुकान पर पान खाते हुए. आर्ट ऑफ लिविंग सिखाने के लिए दिल्ली का चोला बदल डाले हो. बड़ेब्बड़े लोग इनवाइट किए हुए हैं. दुनिया भर से लोग आ रहे हैं. 52 देशों के 35 लाख लोग. आएंगे कि नहीं ये नहीं पता. लेकिन हम पढ़े ऐसा तो बता रहे हैं.

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आपने जबसे बताया है कि इस प्रोग्राम के तहत यमुना की सफाई होगी. दुनिया का कल्चर सिमट कर एक जगह आ जाएगा. कसम से आंखों के सामने उम्मीद के जुगनू जलने लगे हैं. हमें दिखने लगा है कि हमारे ऊसर का भी कुछ न कुछ हो जाएगा. यूपी के छोटे से बंजर गांव का ये लौंडा बल्लियों उछल रहा है. हवा के साथ उड़ती रेह जब यहां आदमी की खाल पर पड़ती है तो खाल फट जाती है. जमीन हमेशा जलती रहती है. बड़ी प्रॉब्लम है बाबा.

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आपसे रिक्वेस्ट है बाबा. अगली बार इधर भी वो रौनक लाइये न. यहां के हालात बहुत खराब हैं. अगल बगल 20 किलोमीटर तक कोई ढंग का हॉस्पिटल नहीं है. 10 किलोमीटर तक कोई साधन नहीं चलता. खुद से जुगाड़ करना पड़ता है. पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन चिरसंचित अभिलाषा है. भैया साधन तब चलेंगे जब वहां रोड हो. वही नहीं तो कैसे हो पाएगा श्री श्री. आप आएंगे तो साथ में फौज आएगी. हमारे लिए सड़क बनाएगी. जब आप लौट जाएंगे तो सड़क उखाड़ कर तो ले नहीं जाएंगे.

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सुनें हैं कोरट आप पर पांच करोड़ का जुर्माना ठोक दिहिस. कित्ती एहसान फरामोश दुनिया है. आप इधर आओ बाबा. ऊसर में. यहां 1-2 किलोमीटर तक आदमी छोड़ो, चिड़िया की जात नहीं दिखती. नीलगाय घूमती हैं कभी कभी. रात में सियार और लोमड़ियों की आवाजें आती हैं. यहां आओ आप. कोई माई का लाल आपको नोटिस देकर दिखा दे तो उसके नाम का पत्थर पूज दूं. जो पांच करोड़ वहां कोरट में खर्च करने जा रहे हो आप. उत्ते में तो कितना इंतजाम हो जाता. हम तो हियां पलक पांवड़े बिछाए बइठे हैं. यहां इत्ता खाली आदमी भी मिल जाएगा आपको. बेगार करने के लिए. आप फौज से सड़क बनवाना और इन लखैरों से टेंट कुर्सी लगवाना. मटर आलू छिलवाना. सब इंतजाम है बाबा.
हम थोड़ा थोड़ा गुच्छा हैं आपछे. आप लोग भरे पेट में आइसक्रीम ठूंसते जा रहे हैं. मोटे मोटे असामी आपके चेले हैं. भुच्च देहाती गरीब की पहुंच आपके दरवज्जे तक है नहीं. बड़क्कों की ये दुनिया तो झमक ही जाती है. परलोक बना देते हो धुप्पल में अलग से. इत्ता ऊलजुलूल खा लेने वाले को फिर मेडिटेशन की जरूरत भी आ पड़ती है. क्योंकि रात में नींद नहीं आती. तो उनको जरूरत होती है सुदर्शन क्रिया की. इसलिए आप बहुत नोबल वर्क कर रहे हैं बाबा. आखिर उनको भी मौज करने का हक है. लेकिन बाबा एक नजर इधर भी. ये ऊसर आपको पुकार रहा है.आप बाबे लोग हमेशा जमी जमाई मार्केट क्यों चुनते हैं प्रोग्राम के लिए. दिल्ली, पुणे, नासिक, प्रयाग, नैमिषारण्य, मथुरा, बनारस, मुंबई, आगरा वगैरह. यहां तो पहले से ही इतने संत पैदा हुए हैं. वह ऑलरेडी पुण्यभूमि हुए पड़ी है. उसको और पुण्य करने की क्या जरूरत है. आप तो जाइए चम्बल. जहां सिर्फ पाप का साम्राज्य रहा है. साला दिन में आदमी उधर से गुजरने में डरता रहा है. येब्बड़े बड़े डकैत थे वहां. दौड़ा कर पिछवाड़े पर गोली मारते थे. वहां पाप इतना बढ़ा था कि उसकी गन्ध अभी तक गई नहीं है. भिंड मुरैना निकल जाओ. वहां की बंजर जमीन को हरा भरा करो. खेती किसानी में बड़ी दिक्कत है वहां.
आपकी संपत्ति पर तो कोई टैक्स भी नहीं लगता बाबा. फिर भी जुर्माना देने में अचकचाए पड़े हो. कहते हो कि जेल चले जाएंगे लेकिन जुर्माना न देंगे. छाती पर लाद कर स्वर्ग जाओगे का बाबा? उस पैसे से जरूरतमंदों को मेडिटेशन करा दो. अखबार वखबार पढ़ते हो कि नै? रोज कित्ता किसान मर रहा है. कोई आरक्षण के लिए लड़ रहा. कोई धरम बचाने के लिए मर रहा. उनको भी मेडिटेशन कराओ. कि खाली पूंजीपतियों के लिए मेडिटेशन की कोचिंग है. चलो कोई नी. आपकी भी मजबूरियां होंगी. बिजनेस में सबकी होती हैं. लेकिन मेरे ऑफर पर विचार करना आप. इस ऊसर बांगड़ में एक मस्त प्रोग्राम रखना. बहुत बेगार मिलेगी. और झंझट कोई न होगी. बदले में थोड़ा काम हमारा भी हो जाएगा. प्लीज बाबा.










