हिंदुस्तान में लोग ठंड से कल्ला रहे हैं. जब सुबह-सुबह ऑफिस जाने की तैयारी करो तो लगता है कि इससे भयंकर ठंड कहीं नहीं हो सकती है. ऊपर से हमारे अखबार और चैनल रोज़-रोज़ 40-50 साल के रिकॉर्ड तोड़ देते हैं. मगर आज बात करते हैं दुनिया के सबसे ठंडे गांव की, जहां तापमान अभी -71 डिग्री सेल्सियस है. अगर इतने से ही कनकना गए हो तो जान लो गांव वालों के शौचालय घर के बाहर हैं.रूस के ओयमायकोन गांव में किसी भी इंसानी बस्ती का सबसे कम तापमान रिकॉर्ड हुआ है. इतने में सिर्फ ठंड में नहाने की दिक्कत नहीं है. इतनी ठंड में वहां कोई भी फसल नहीं उगती है. इसलिये वहां के लोग सिर्फ रेंडियर और घोड़े का मीट खाते हैं. कार हमेशा चालू रखी जाती हैं क्योंकि अगर बंद हो गई तो दुबारा चालू नहीं होगी. मोबाइल काम ही नहीं करते. कब्र खोदने के लिए ज़मीन पर 3 दिन तक जलते कोयले रखे जाते हैं ताकि जमी हुई बर्फ पिघल सके.

वैसे इस ठंडे मौसम में इस गांव के होने के बसे होने की खास वजह है. इस गांव के पास एक गरम पानी का सोता है. इस माइनस तापमान में गांव को ज़िंदा रहने के लिए पानी मिल जाता है. 1920 में इस रास्ते से गुज़रने वाले एस्कीमो बंजारे यहां रुका करते थे, धीरे-धीरे यहां तकरीबन 500 लोगों की बस्ती बन गई.

खुले में बना शौचालय.
इस तापमान की कुछ और समस्याओं का जायज़ा लीजिए.
पेन काम नहीं करते क्योंकि स्याही जम जाती है. चश्मा चेहरे से चिपक जाता है. बैटरी काम नहीं करती. यहां के स्कूलों में छुट्टी तब होती है जब तापमान -52 सेल्सियस से नीचे जाता है. भीषण ठंड वाले इस इलाके में गर्मियों में तापमान 30 सेल्सियस तक चला जाता है. इस गांव में हर हाल में बिजली की सप्लाई चालू रखी जाती है. अगर पावर बंद हुई तो ये गांव 5 घंटे में ठंड और पानी के पाइप जमने से रहने लायक नहीं रह जाएगा. मगर इस गांव का सबसे बड़ा आश्चर्य ये है कि इस गांव के टॉयलेट्स घर के बाहर होते हैं.कुल मिलाकर बात ये है कि ये गांव बहुतै ठंडा है. अगली बार जब ठंडी लगे तो इस गांव के बारे में सोच लेना जिसके नाम का मतलब होता है, 'गर्म पानी की धारा'
गांव का पावर स्टेशन.















