स्टॉक मार्केट रेग्युलेटर सेबी (Securities and Exchange Board of India-SEBI) ने देश में स्पॉट गोल्ड एक्सचेंज का रास्ता साफ करते हुए इसका फ्रेमवर्क जारी कर दिया है. यहां सोने का कारोबार इलेक्ट्रॉनिक स्वर्ण रसीद (EGR) के रूप में होगा. सेबी ने इसके लिए ट्रेडिंग के इच्छुक एक्सचेंजों से आवेदन करने को कहा है. फ्रेमवर्क में कहा गया है कि स्पॉट गोल्ड एक्सचेंज पर सोने की अलग-अलग मात्राओं के साथ कॉन्ट्रैक्ट हो सकते हैं. अभी यहां कम से कम 5-10 ग्राम सोने की ट्रेडिंग का प्रस्ताव है. लेकिन जानकारों का कहना है कि स्पॉट एक्सचेंज की योजना रंग लाई तो 1-1 ग्राम सोने की भी खरीद बिक्री होगी. गोल्ड एक्सचेंज के फायदे सोने की शुद्धता और कीमतों को लेकर पारदर्शिता आएगी. अभी कोई भी व्यक्ति घर में रखे सोने या गहनों को बेचते समय पूरी तरह जूलर की मनमर्जी पर निर्भर रहता है. लैब टेस्टिंग या हॉलमार्किंग के बाद भी सही या पूरी कीमत की गारंटी नहीं होती. ट्रेडेड ईजीआर की हर समय एक मार्केट वैल्यू रहेगी, जिस पर वह खरीदा या बेचा जा सकेगा.
सालाना करीब 1000 टन सोना आयात करने वाले देश में आधे से ज्यादा कारोबार असंगठित और अनरेगुलेटेड है. फिजिकल गोल्ड के ईजीआर में कन्वर्ट होने से ज्यादातर सोना रेग्युलेटेडे मार्केट में आएगा. सोने की स्मगलिंग और कालाबाजारी पर रोक लगेगी.
लिक्विडिटी इस गोल्ड एक्सचेंज की एक बड़ी खूबी है. फिजिकल गोल्ड को बाजार में तुरंत बेचकर भुनाया तो जा सकता है, लेकिन यह इतना भी जल्द नहीं हो सकता. अगर हुआ भी तो वहां प्योरिटी, डिजाइन, एलॉय और तमाम बहानों से कीमत को लेकर झंझट होगा. अर्जेंसी या झटपट बेचने के चक्कर में कीमतों से समझौता करना पड़ता है.
माना जा रहा है कि लिक्विडिटी के मामले में ईजीआर यानी ट्रेडेड गोल्ड, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) से भी बेहतर होगा. डिजिटल फॉर्म में होने से यह इनकी सभी खूबियों से भी लैस होगा.
सर्राफा बाजारों में जूलर ईजीआर की ट्रेडिंग कर सकेंगे. मसलन, संभव है कि आप अपना ईजीआर सीधे एक्सचेंज पर न ले जाकर किसी जूलर को दें और उसके बदले गहने बनवा लें.
एक अनुमान के मुताबिक देश में करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये का सोना लोगों के घरों और मंदिरों में पड़ा है. यह एक्सचेंज इस स्वर्ण भंडार को अर्थव्यवस्था में लाने में मददगार साबित हो सकता है.
चूंकि यह एक्सचेंज शेयर मार्केट रेग्युलेटर सेबी की निगरानी में होगा, इसलिए लोग इस पर भरोसा कर सकते हैं. अब भी शेयर मार्केट में निवेश करने वाले आम भारतीयों की संख्या काफी कम है. स्टॉक मार्केट के जोखिम से बचने वाले लोग सोने की ट्रेडिंग की तरफ आकर्षित हो सकते हैं.

स्पॉट गोल्ड एक्सचेंज की सांकेतिक तस्वीर (साभार: आजतक)
कैसे होगी गोल्ड की ट्रेडिंग? गोल्ड एक्सचेंज बहुत हद तक स्टॉक एक्सचेंजों की तरह काम करेगा. यहां आप सोना खरीदने या बेचने के लिए ऑर्डर डालेंगे. ट्रेडिंग के बाद जैसे कंपनियों के शेयर आपके डिमैट अकाउंट में आते हैं, वैसे ही EGR या गोल्ड की डिलिवरी हो सकेगी. यहां तीन तरह के ट्रांजैक्शन होंगे-
रसीद बनाना (Creation of EGR),डिपॉजिटरीज की ओर से एक कॉमन इंटरफेस बनाया जाएगा. इसे सोने की देखरेख करने वाले वॉल्ट मैनेजर, स्टॉक एक्सचेंज और क्लियरिंग कॉरपोरेशन (Clearing corporations) एक्सेस कर पाएंगे. वॉल्ट मैनेजर तय करेंगे कि ट्रेडिंग के लिए जो फिजिकल गोल्ड आ रहा है, उसकी क्वालिटी और प्योरिटी कैसी है.
एक्सचेंज पर रसीद की खरीद-बिक्री (Trading of EGR)
और रसीद को असली सोने में बदलना ( Conversion of EGR into physical gold ).
ट्रेडिंग के लिए बाहर से आने वाला सोना पहले वॉल्ट में जाएगा. वॉल्ट मैनेजर EGR जारी करेगा. इसके बाद डिपॉजिटरी इसकी ट्रेडिंग के लिए ISIN कोड जारी करेगा. EGR की सूचना डिपॉजटरी से मिलने के बाद एक्सचेंज पर लिस्टिंग और उसके बाद ट्रेडिंग होगी. क्लियरिंग कॉरपोरेशन ट्रेड हुए EGR का शेयरों की तरह सेटलमेंट करेगा.
अगर किसी निवेशक को ईजीआर के बदले असली सोना चाहिए तो वह अपनी इलेक्ट्रॉनिक रसीद वॉल्ट में सरेंडर करेगा. वॉल्ट मैनेजर EGR लेकर फिजिकल गोल्ड देगा. EGR वहीं रद्द होगा. अलग-अलग क्वांटिटी के सोने के लिए (जैसे 1 किलो, 100 ग्राम, 10 ग्राम) ट्रेडिंग लॉट होंगे. ईजीआर को सोने में कन्वर्ट कराने की एक न्यूनतम सीमा रखी जाएगी. माना जा रहा है कि जब 50 ग्राम का सोना ईजीआर के रूप में जमा हो जाएगा, तभी इसकी फिजिकल डिलिवरी ली जा सकेगी.

रिटेल गोल्ड और गहनों की सांकेतिक तस्वीर
1 ग्राम EGR भी आ सकता है इंडिया बुलियन एंड जूलर्स एसोसिएशन (IBJA) के सेक्रेट्री जनरल सुरेंद्र मेहता ने 'दी लल्लनटॉप' को बताया,
"स्पॉट गोल्ड एक्सचेंज देश के सर्राफा बाजार को पूरी तरह बदलकर रख देगा. हर आदमी रियल टाइम में अपने सोने की वास्तविक कीमत जान सकेगा. कालाबाजारी और धोखाधड़ी के दिन हवा होंगे. लोग घर में रखे सोने की असली कीमत भुना सकेंगे. अभी तक जितने भी निवेश जरिये हैं, वहां सोने को डिमैट और डिमैट से फिर असली सोने में भुनाने की इतनी सहूलियत नहीं है."सुरेंद्र मेहता ने कहा कि अभी सेबी ने कम से कम 5-10 ग्राम सोने के कारोबार की बात कही है, लेकिन हमारा अनुमान है कि एक बार एक्सचेंज शुरू हो गया तो जल्द ही 1 ग्राम सोने की भी ट्रेडिंग होगी. यह जरूरी भी होगा. अगर आप 25 ग्राम ईजीआर लेकर किसी जूलर के पास सोने की चेन खरीदने जाएं, जिसका वजन 23 ग्राम हो, तो बाकी 2 ग्राम सोना वह कैसे लौटाएगा. ईजीआर के साथ यह संभव हो सकेगा. यह भी हो सकता है कि सरार्फा बाजारों में अधिकांश जूलर फिजिकल गोल्ड की जगह ईजीआर की ट्रेडिंग करते दिखें. गौरतलब है कि दुनिया के कई बड़े शहरों जैसे शांघाई, हांग कांग, लंदन, न्यूयॉर्क के गोल्ड एक्सचेंज दुनिया भर में जाने जाते हैं.














