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50 साल पहले की रिसर्च के लिये मिला फिजिक्स का नोबेल

इस रिसर्च से दुनिया में कई नई चीजें आयी हैं.

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फोटो - thelallantop
2016 का फिजिक्स नोबेल तीन ब्रिटिश वैज्ञानिकों को गया है. डेविड थुलेस, डंकन हल्दाने और माइकल कोस्तेर्लित्ज़. पर इनकी रिसर्च नई नहीं है. पुरानी है. सत्तर के दशक की. नोबेल कमिटी ने सबको सरप्राइज कर दिया है इस चीज से. पर कमिटी का कहना है कि इस रिसर्च की बदौलत दुनिया में कई नयी चीजें हुयीं. एक नया दरवाजा खुल गया. हम नयी चीजें बनाने लगे जो कभी दुनिया में थी ही नहीं. इसलिए इसे सम्मानित करना जरूरी है.
बचपन में हम लोगों ने पदार्थ की तीन अवस्थाएं ही पढ़ी थीं: सॉलिड, लिक्विड और गैस. पर बड़े हुए तो पता चला कि और अवस्थाएं भी होती हैं जो समझ नहीं आती. जैसे सुपर-कंडक्टर, सुपरफ्लुइड और थिन मैग्नेटिक फिल्म. इनका उपयोग बड़ा होता है बस पता नहीं चलता कि क्या होता है. मटेरियल साइंस और इलेक्ट्रॉनिक्स के लोग इस बात से बहुत खुश होंगे. क्योंकि नयी चीजों से सबसे ज्यादा फायदा इन्हीं को होता है.
82 साल के थुलेस वाशिंगटन यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर हैं. 65 साल के हल्दाने प्रिन्सटन यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर हैं. 73 साल के माइकल ब्राउन यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर हैं. तीनों ब्रिटेन में पैदा हुए पर अमेरिका में काम करते हैं. पर थुलेस को प्राइज की आधी रकम मिलेगी. बाकी दोनों को आधी में संतोष करना पड़ेगा. इन वैज्ञानिकों ने 'पदार्थ की अवस्थाओं' पर ही रिसर्च किया था. रिसर्च की इस मेथड को टोपोलॉजी कहते हैं. सब कुछ एकदम मैथ के इक्वेशन से समझा दिया. इन इक्वेशन के आधार पर नई चीजें बनती जा रही हैं. छोटी और पतली. नैनो, माइक्रो पता नहीं क्या-क्या. अब लोग कहते हैं कि कुछ दिनों में चीजें इतनी पतली और छोटी हो जायेंगी कि एकदम पारदर्शी हो जायेंगी.

पर टोपोलॉजी है क्या? क्या आम इंसान इसे समझ नहीं सकता?

फिजिक्स के टोपोलॉजी कॉन्सेप्ट: मैथमेटिक्स का वो ब्रांच जिसका इस्तेमाल दुनिया के बारे में नयी जानकारियां जुटाने के लिए किया जाता है. 

टोपोलॉजी

ये मॉडर्न ज्योमेट्री है. जो ज्योमेट्री हमने पढ़ी है उसमें चीजों को घुमाया जा सकता है, उल्टा किया जा सकता है पर उनको खींचा और मोड़ा नहीं जा सकता. वो फिक्स रहती हैं. इसको ज्योमेट्री में कन्ग्रुएन्स कहा जाता है. मतलब एक चीज को दूसरी के ऊपर रखो तो दोनों एकदम फिट बैठेंगी. फिर जब पर्सपेक्टिव ड्राइंग आई इंजीनियरिंग में तब ज्योमेट्री थोड़ी सी बदली. इसमें ऊपर से देखने पर प्लेट गोल लगती है. पर थोड़ी दूर जा के देखें तो एलीप्स लगने लगती है. कहने का मतलब कि एक एंगल पर गोले को प्रोजेक्ट करें तो वो एलीप्स हो जायेगा. हालांकि कहने में आसान है पर पढनेवाला ही जनता होगा. टोपोलॉजी इन सबसे आगे है. और ये ज्योमेट्री की बेसिक में जाती है. जो कि किताब से पढने पर समझ नहीं आती. इसमें आप किसी चीज के साथ सब कुछ कर सकते हैं. उतना तक कि उसको उल्टा फिर पुराने फॉर्म में लाया जा सके. इसमें एक गोले को खींचकर ट्रायंगल भी बनाया जा सकता है. स्क्वायर भी. क्योंकि सर्किल के कुछ पार्ट को खींचकर ट्रायंगल की भुजाएं बनायीं जा सकती हैं. और फिर उन्हें वापस सर्किल में भी बदला जा सकता है. Mug_and_Torus_morph पर ऐसा होने के लिए एकदम स्मूथ प्रोसेस होना चाहिये. कहीं कोई रुकावट नहीं आनी चाहिए. जैसे कि गोले को 8 में तो बदला जा सकता है. बीच से ऐंठकर. पर 8 को वापस गोला बनाने में दिक्कत है. क्योंकि बीच में एक जोड़ आता है.
टोपोलॉजी और ज्योमेट्री में फर्क एक और तरीके से समझा जा सकता है. मिट्टी का लोंदा टोपोलॉजी के हिसाब से परफेक्ट है. जैसा चाहें वैसा बना सकते हैं. पर एक बार इसे आग में पका दिया फिर ये ज्योमेट्री के हिसाब से हो जाता है. फिक्स.
तो इन वैज्ञानिकों ने टोपोलॉजी की इन सारी चीजों को मैथ से समझा दिया. अब सोचिये कि मिट्टी के लोंदे से कितनी चीजें बनायीं जा सकती हैं. तो इसी आधार पर कई चीजों की खोज हुई. और इन वैज्ञानिकों को दुनिया में जबरदस्त योगदान देने के लिए उनकी रिसर्च के पचास साल बाद सम्मानित किया है. पर इस बार सबसे बड़े दावेदार थे ग्रेविटेशनल वेव की रिसर्च करने वाले वैज्ञानिक. पर इनकी जगह पुरानी थ्योरी को तरजीह दी गयी है. Reference: www.math.wayne.edu
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