साल 2008 में इस शहर का प्लान तैयार किया गया था. पहले इस शहर को साल 2020 तक बनकर तैयार होना था लेकिन अब ये शहर 10 साल लेट है. यानी 2030 तक पूरी तरह ऑपरेशनल होने की बात कही जा रही है. हालांकि काफी कंपनियां यहां आ चुकी हैं. लोग यहां आकर रहने लगे हैं.

मसदार शहर में ऐसे पॉड्स के जरिए एक जगह से दूसरी जगह जाते हैं. फोटो मसदार की ऑफिशियल साइट से साभार.
मसदार में बड़े-बड़े सोलर पैनल रेगिस्तान में लगे हैं ताकि शहर को बिजली मिल सके. बिजली के लिए कहीं कोयले या डीजल आदि बायोफ्यूल को इस्तेमाल नहीं किया जाता. शहर में ऐसी स्ट्रीटलाइट्स लगी हैं. जो सेंसर वाली हैं. रात होते ही अपने आप जल जाती हैं. दिन होते ही बंद हो जाती हैं. इनमें सौर छतरियां लगी हैं, जो लाइट जलने के लिए जरूरी पावर का इंतजाम करती हैं. शहर में ट्रांसपोर्ट के लिए पॉड्स दौड़ते हैं. छोटी-छोटी टैक्सीनुमा गाड़ियां. इनमें कोई ड्राइवर नहीं होता. एलेक्सा या सीरी की तरह आप बोल दीजिए कि फलां जगह जाना है, ये पॉड आपको वहां पहुंचा देगा. साइंस फिक्शन मूवी का शहर 'द लाइन' 170 किलोमीटर की एक सीधी रेखा में फैला शहर. नाम दिया गया है 'द लाइन'. ये शहर सऊदी अरब में बनेगा. सऊदी अरब, संयुक्त अरब आमीरात का हिस्सा नहीं है बल्कि एक अलग देश है. यूएई के मसदार से इसकी दूरी करीब 2400 किलोमीटर है. तो नियोम है किसी साई-फाई फिल्म जैसा. एक ऐसा शहर, जहां हर सुविधा पांच मिनट की वॉक के भीतर मिलेगी. एक ऐसा शहर, जहां कोई सड़क नहीं होगी, कोई गाड़ी नहीं चलेगी, कोई हॉर्न नहीं बजेगा. यानी कोई प्रदूषण नहीं होगा. एक ऐसा शहर, जो पूरी तरह आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस पर काम करेगा. जो हजारों लोगों को रोजगार देगा और भविष्य की दुनिया के लिए नींव रखेगा.
सुनने में किसी साइंस फिक्शन मूवी जैसा लग रहा है ना. दावा है कि ये शहर तीन लेयर में बसा होगा. सबसे ऊपर होगी असली जमीन. पेड़ पौधों से भरी. पैदल चलने के लिए. प्रकृति के असली अहसास के लिए. दावा है कि यहां कोई वाहन नहीं होगा सिवाय साइकिल के. सबसे नीचे वाली लेयर में मेट्रो चलेंगी. अगर आपको लंबी दूरी की यात्रा करनी है तो नीचे जाएं मेट्रो पकड़ें और अपनी मंजिल तक पहुंचें. ये मेट्रो तेज से भी तेज होंगी क्योंकि ये सीधी लाइन में चलेंगी. दूसरी लेयर होगी पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए, जिसको सर्विस लेयर कहा जाएगा. इस लेयर में बसें होंगी, यात्रा के लिए अन्य सुविधाएं होंगी. यानी ऑफिस जाना है तो इस लेयर में आएं, पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम का इस्तेमाल करें.

इस तरह तीन लेयर में बसाया जाएगा शहर. फोटो- neom.com से साभार
इज़राइल और जॉर्डन के पास, लाल सागर के तट पर बसा ये नियोम इलाके का शहर, वाकई कमाल के कुदरती नजारों वाला है. यहां समंदर है, पहाड़ हैं, रेगिस्तान है और भरपूर गुंजाइश है. गुंजाइश है ऐसा शहर बनाने की जहां मुंबई की तरह चॉल ना हों, न्यूयॉर्क जैसे जाम ना लगते हों, बीजिंग जैसी दौड़ती जिंदगी ना हो, और टोक्यो जैसी आपाधापी ना हो.
कल्पना तो सुंदर है लेकिन शहर कैसे होगा ये तो साल 2030 तक पता चलेगा. इसके लिए सउदी सरकार पानी की तरह पैसा बहा रही है. विदेशी निवेश भी जमकर हो रहा है. लेकिन नतीजा क्या होगा अभी कहा नहीं जा सकता. तीन लेयर में शहर बनाना कितना बेहतर आइडिया है इस पर भी शायद आने वाले वक्त में अपनी तरह की बहस हो. नतीजा क्या होगा, नहीं पता लेकिन इतना जरूर तय है कि पृथ्वी पर सीमित संसाधन हैं और आबादी लगातार बढ़ रही है ऐसे में शहरों के वर्तमान स्वरूप को बदलने की जरूरत है.




















