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भारत-चीन तनाव: लद्दाख, गालवान घाटी और LAC पर जो हुआ, उसकी पूरी कहानी

इस मामले पर कब जवाब देगी मोदी सरकार?

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लद्दाख में तनाव के बाद देश भर में चीन के प्रोडक्ट्स बॉयकॉट करने की मांग हो रही है. सांकेतिक फोटो: India Today
15 जून, 2020. याद रखिएगा इस तारीख को. 15 जून की रात हम अपने घरों में आराम से सो रहे थे. लद्दाख में भारत और चीन के बीच हुए विवाद का समाधान हम निकाल चुके थे. चीन की फौज को कमज़ोर भी बता दिया था. इसीलिए हमारी नींद तब तक नहीं टूटी, जब तक ये खबर नहीं आ गई कि लद्दाख में तीन भारतीय सैनिक शहीद हो गए हैं. इसमें एक कर्नल रैंक के अधिकारी थे, माने अपनी यूनिट के कमांडिंग अफसर. और साथ में दो जवान.
सैनिकों को पीट-पीटकर मार डाला
रक्षा मामलों पर नज़र रखने वाले कई पत्रकारों ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि इस दौरान गोली नहीं चलाई गई. ये हत्याएं पीट-पीटकर की गई हैं. जो चीन 40 दिन से भारत के इलाके में जमा हुआ था, जिस चीन के बारे में हमें लगता था कि बात चल रही है, वो लौट रहा है, उसने हमारे ही इलाके में हमारे ही सैनिकों को पीट-पीटकर मार डाला. सोशल मीडिया का एक हिस्सा इस बात में सुख ढूंढ रहा है कि चीन को भी नुकसान हुआ है. उस तरफ से भी सैनिकों की मरने की खबरें आई हैं. एक के बाद एक जानकारियां आती जा रही हैं. बहुत शोर हो रहा है. कहीं शहादत का गान है, तो कहीं बदले का गुस्सा. और इस शोर में वो सवाल गुम होते जा रहे हैं जिनके जवाब देने से मोदी सरकार आज तक बचती आई है.
इस नक्शे में आप गलवान घाटी को बेहतर तरीके से देख सकते हैं. नीली और लाल लाइन के पास जो बिंदू दिख रहा है. अभी वहीं पर तनाव है.
इस नक्शे में आप गलवान घाटी को बेहतर तरीके से देख सकते हैं. नीली और लाल लाइन के पास जो बिंदू दिख रहा है. अभी वहीं पर तनाव है.

1962 के बाद सबसे गंभीर मसला
भारत और चीन के सेनाओं में आपस में गोली नहीं चलाई जा सकती है. इसके लिए करार है, लेकिन मारपीट होती है. और मारपीट में भी कभी भारत के जवानों को इतनी बुरी तरह से नहीं पीटा गया कि एक अफसर समेत तीन जवानों की जान ही चली जाए. ये बहुत बड़ी घटना है. लद्दाख में भारत-चीन के बीच चल रहे विवाद को 1962 की लड़ाई के बाद सबसे गंभीर मसला बताया गया. तीन सैनिकों की जान गई, तो नई दिल्ली में हलचल हो रही है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत और तीनों सेना प्रमुखों के साथ मुलाकात की. इस बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर भी मौजूद थे. इसके बाद रक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की.
चीन ने क्या कहा
इस घटना के बारे में चीन का भी बयान आया है. चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत की सेना ने गैरकानूनी काम करने के लिए हमारे इलाके में घुसपैठ की. हम भारत से मांग करते हैं कि वो दोनों देशों के बीच हुए करारों का पालन करे और अपने फ्रंटलाइन्स ट्रूप्स को काबू में रखे. खबरें ये भी आ रही हैं कि 15 जून वाली हिंसा में चीनी सैनिकों की भी मौत हुई है, लेकिन चीन की तरफ से इस बारे में कुछ नहीं कहा गया. चीन के सरकारी अखबार 'ग्लोबल टाइम्स' की रिपोर्टर वांग वेनमेन ने पांच चीनी सैनिकों की मौत और 11 के जख्मी होने की जानकारी ट्वीट की थी. लेकिन फिर उन्होंने इस ट्वीट पर सफाई देते हुए कहा है कि कितने चीनी सैनिकों की मौत हुई है ये उन्हें नहीं मालूम. इसके अलावा 'ग्लोबल टाइम्स' ने भी लिखा है कि कितने चीनी सैनिकों की मौत हुई है, ये वो कंफर्म नहीं कह सकते. जब इन मौतों की खबर सोशल मीडिया पर आई, तो भारत की सेना के बयान का इंतज़ार होने लगा. पहले बयान में सेना ने कहा कि विवाद में कैजुअल्टी हुई है. कुछ ही देर में नया बयान जारी किया गया कि दोनों तरफ कैजुअल्टी हुई हैं.
Indian Army Lac
LAC के नज़दीक भारतीय फौजी (फोटो: पीटीआई)

1975 के बाद पहली बार भारत चीन के बीच सीमा विवाद में जानें गई हैं. लेकिन 15 जून की घटना को अपवाद मानकर खारिज करना बहुत बड़ी गलती होगी. कुछ बुरा हो सकता है, इसका अंदेशा बहुत पहले से था.

ये टाइमलाइन देखिए

# चीन की तरफ से इस झगड़े की तैयारी तो अप्रैल में ही शुरू हो गई थी, जब चीन ने ईस्टर्न लद्दाख में LAC के पास सेना बढ़ाना शुरू कर दिया था. लद्दाख में गालवान घाटी और LAC पर पड़ने वाली पैंगोंग झील के उतरी किनारे के पास चीन की सेना का जमावड़ा बढ़ने लगा था. लेकिन पहली बार भारत और चीन की सेनाओं के बीच झगड़ा हुआ मई के पहले हफ्ते में.
# 5 मई चीन और भारत के सैनिकों की आपस में हिंसक झड़प हुई. मार-पीट भी हुई. ये हिंसक झड़प पैंगोंग झील के उतरी किनारे के पास हुई. झगड़ा इसलिए हुआ, क्योंकि चीन के सैनिक LAC पार करके कई किलोमीटर तक भारत के इलाके में आग गए थे और जब भारत के जवान पेट्रोलिंग करने गए, तो चीनी सैनिकों ने रोक दिया. फिर आपस में मारपीट हुई. दोनों तरफ से कई जवान जख्मी हुए.
# पैंगोंग झील के साथ ही गालवान घाटी में भी तीन जगह PLA के सैनिक भारत के इलाके में पहुंच गए. चीनी सैनिकों ने टेंट गाड़ना शुरू कर दिया. वो अपने साथ वाहन भी लाए थे. सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने भारत के सड़क निर्माण के काम को भी रोकने की कोशिश की. ये सब गुपचुप हो रहा था. मारपीट की खबरें भी पांच दिन बाद मीडिया तक पहुंची थी.
# फिर 9 मई को चीन के सैनिक सिक्किम के नाकु ला सेक्टर में भारत के इलाके में घुस गए. यहां चीनी और भारतीय सैनिकों के बीच झड़प हुई. भारत के चार और चीन के सात जवान जख्मी होने की खबर आई. यहां लोकल मिलिट्री कमांडर स्तर पर झगड़ा सुलझा लिया गया.
# 12 मई को LAC के पास चीन के हेलिकॉप्टर उड़ते देखे गए. तो भारत ने भी सुखोई-30 लड़ाकू विमान लद्दाख में एलएसी के पास उड़ाया. इस बीच भारत और चीन दोनों ही सेनाएं LAC के पास अपनी फोर्स बढ़ा रही थी. मिरर डिप्लॉयमेंट किया जा रहा था. लोकल कमांडर स्तर पर झगड़ा सुलझाने के लिए बातचीत भी कई गई.
# फिर 23 मई को भारत के थल सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे लेह गए.
# 26 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत और तीनों सेना प्रमुखों के साथ बैठक की.
# इतना सब कुछ होने के बावजूद भी भारतीय सेना या सरकार की तरफ से आधिकारिक तौर पर इस झगड़े पर चुप्पी साधी गई, किसी ने कुछ नहीं कहा. पहली बार 30 मई को रक्षा मंत्री ने 'आजतक' से बातचीत करते हुए माना कि हां, लद्दाख में टकराव चल रहा है. लेकिन ये भी कहा कि बातचीत के जरिए सुलझा लिया जाएगा.
# इसके साथ ही 2 जून को दोनों सेनाओं में मेजर जनरल स्तर की बातचीत हुई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला.
# 2 जून को ही अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और पीएम मोदी की फोन पर बात हुई. दोनों के बीच लद्दाख के झगड़े पर बात हुई.
# 5 जून को भारत और चीन के राजदूतों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आपस में बात की. इसके एक दिन बाद 6 जून को लद्दाख के भारत और चीन के बीच लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की बातचीत हुई.
# ये बातचीत चल ही रही थी कि 8 जून को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत और तीनों सेना प्रमुखों के साथ रिव्यू मीटिंग की.
# इसके बाद 9 जून को गालवान घाटी के कुछ इलाकों और हॉट स्प्रिंग में भारत और चीन की सेनाओं में तनाव कम होने की खबर आई. दोनों सेनाएं पीछे हटने को राज़ी हो गई हैं. सूत्रों से खबर आई कि चीन ने अपने टेंट्स भी हटा लिए हैं. हालांकि आधिकारिक तौर पर इस खबर की पुष्टि भारतीय सेना या सरकार के स्तर पर नहीं की गई थी.
# इस झगड़े के बारे में जो आखिरी बयान आया था, वो सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे का था. उन्होंने कहा था- मैं सबको आश्वस्त कर देना चाहता हूं कि भारत और चीन की सीमा पर हालात काबू में हैं. सुलह के लिए हम आपस में बात कर रहे हैं.
सरकार की ओर से क्या कहा गया
ये सारी टाइमलाइन हमारे सामने है. लेकिन जनता के प्रति असल उत्तरदायित्व रखने वाले हमारे चुने हुए जनप्रतिनिधि माननीय रक्षामंत्री - राजनाथ सिंह लोगों को क्या बता रहे थे? राजनाथ सिंह ने 14 जून को जम्मू जन संवाद नाम से वर्चुअल रैली के दौरान कहा था कि भारत और चीन के बीच सैन्य और राजनयिक स्तर पर बातचीत चल रही है. चीन भी झगड़ा सुलझाना चाहता है. राजनाथ सिंह ने कहा था कि हम किसी को अंधेरे में नहीं रखेंगे और देश पर कोई आंच भी नहीं आने देंगे. 7 जून को एक वर्चुअल रैली में अमित शाह ने कहा था कि पूरी दुनिया को मालूम है कि अमेरिका और इजरायल के अलावा कोई देश अपनी सीमाओं की रक्षा कर सकता है, तो वो भारत है. बावजूद इसके विपक्ष के सवाल बने रहे. असदुद्दीन ओवैसी से लेकर राहुल गांधी तक सरकार से सवाल करते रहे. राहुल ने तो पीएम मोदी की चुप्पी तक को मुद्दा बनाने की कोशिश की. लेकिन सरकार की तरफ से आईं शायरियां. राजनाथ सिंह ने वैसे ये भी कहा था कि कांग्रेस के नेता सवाल पूछ रहे हैं कि भारत-चीन सीमा विवाद पर क्या हो रहा है? मैं देश की जनता को आश्वस्त करना चाहूंगा कि संसद में इस बारे में विस्तार से जानकारी दूंगा. संसद कब बैठेगी, फिलहाल तय नहीं है. लेकिन राजनाथ सिंह किसी जल्दी में नज़र नहीं आए.
इस पत्रकार ने सच लिखा, पर सरकार ने नहीं सुनी
रक्षा मामलों पर लिखने वाले पत्रकार अजय शुक्ला लगातार इस दावे पर अडिग हैं कि चीन सब जगह पीछे नहीं हटा है. LAC के आगे एक और नई एलएसी आकार ले रही है. चीन के सड़कें एलएसी के अंदर तक आ रही हैं. उन पर टैंक और गन आ रही हैं. यहां तक कि चीन की बॉर्डर मीटिंग भी भारतीय ज़मीन पर हो रही है. इतने संगीन सवालों पर अजय शुक्ला को सिर्फ एक जगह से जवाब मिला - इंटरनेट ट्रोल्स.
45 साल बाद LAC पर भारत और चीन के बीच इतनी बड़ी घटना हुई है. मोदी सरकार को अब ये बताना होगा कि वो ये संतुलन वापस लाने के लिए क्या करेगी?


 

दी लल्लनटॉप के लिए ये खबर सुरेश और निखिल ने तैयार की है.

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Video: लद्दाख के गलवान घाटी में हिंसक झड़प, भारतीय सेना के कर्नल और सेना के दो जवान शहीद

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