एक गुरिल्ला कमांडर, जिसने अपना देश बना लिया ये साल 1945 की बात है. विश्व युद्ध ख़त्म होने के बाद दुनिया दो विचारधाराओं में बंट गई. एक, पूंजीवादी अमेरिका. दूसरा, सोवियत संघ. इनकी आपसी लड़ाई का पहला अध्याय लिखा गया जापान और चीन के बीच बसे कोरियन प्रायद्वीप पर. इसके दो टुकड़े हो गए. उत्तर और दक्षिण. उत्तर पर सोवियत का असर था. दक्षिण पर अमेरिकी प्रभाव था. 1948 में दोनों दो देश बन गए. उत्तर कोरिया का नेतृत्व संभाला एक 36 साल के शख्स ने. जो पहले चीन और रूस के नेतृत्व में गुरिल्ला युद्ध लड़ चुका था. इसका नाम था- किम इल संग.

उत्तर कोरिया (फोटो: गूगल मैप्स स्क्रीनशॉट)
मां उस देश की थी, जिससे पूरा मुल्क चिढ़ता था किम ने न केवल नया देश खड़ा किया. बल्कि उस पर हुकूमत के लिए अपना राजवंश भी बना लिया. ऐसा राजवंश, जिसमें आगे के सभी शासक किम थे. 2011 में उत्तर कोरिया की सत्ता मिली किम के पोते को. वो पोता, जिसे 27 साल तक बाहरी दुनिया की नज़रों से छुपाकर रखा गया था. वो पोता, जिसकी मां जापान में पैदा हुई थी. और शायद इसी वजह से कभी अपने ससुर का स्नेह नहीं पा सकीं. वो पोता, जिसे बचपन से लगता था कि मां और दादा के बीच की खटास के पीछे उसके चाचा 'जांग सोंग थाएक' का हाथ है. शायद इसीलिए सत्ता पाने के तीन साल बाद उसने जांग की हत्या करवा दी. आरोप लगाया गया कि उन्होंने देशद्रोह किया है. कैसे करवाई गई ये हत्या? सरेआम लोगों के सामने खड़ा करके उसे मशीन गन से भून डाला गया. बाद में साउथ कोरिया के कुछ अख़बारों ने ख़बर चलाई कि जांग की लाश को भूखे कुत्तों के आगे फेंक दिया गया. ये ख़बर सनसनीखेज़ लगती है. बहुत मुमकिन है, झूठी हो. मगर उस आदमी की छवि ऐसी है कि तमाम लोग इस सेंसेशनल दावे को भी सच मान लें.
ये ज़िक्र है उत्तर कोरिया के मौजूदा लीडर किम जोंग उन का. जो अपने दादा द्वारा स्थापित की गई राजशाही की तीसरी पीढ़ी हैं. आज हम आपको किम, उनके परिवार और नॉर्थ कोरिया के हालात विस्तार से बताएंगे.
किम का ज़िक्र क्यों उठा अभी? 21 अप्रैल को ख़बर आई कि शायद किम बहुत बीमार हैं. इतने बीमार कि शायद ज़िंदा न बचें. या हो सकता है, वो गुज़र भी चुके हों. अपने दादा और पिता की तरह किम भी बहुत सिगरेट पीते हैं. उन्हें ओबेसिटी, यानी ऐसी स्थिति जब मोटापा बीमारी बन जाए, भी है. कहा गया कि दादा और पिता की तरह उन्हें भी कई बीमारियां हैं. दिल की भी परेशानी है. दक्षिण कोरियाई एक अख़बार 'डेली NK' ने कहा, किम के दिल का ऑपरेशन हुआ है. और शायद इसके बाद से ही उनकी स्थिति बहुत बिगड़ गई है. ये बात इतनी उछली कि प्रेस ब्रीफिंग में ट्रंप से भी सवाल पूछा गया. ट्रंप ने कहा, वो किम की सेहत के बारे में नहीं जानते. मगर किम की अच्छी सेहत की दुआ करते हैं.

उत्तर कोरिया अपनी मीडिया के सहारे किम जोंग-उन की लार्जर दैन लाइफ़ छवि बनाता है. कभी हंसते हुए तस्वीरें आती हैं. कभी ऐसी कि बुजुर्ग महिलाएं उन्हें दुलार रही हैं. कभी आर्मी जनरल्स को निर्देश देती तस्वीरें. उन्हीं अलग-अलग मूड की तस्वीरों में से एक ये है. (फोटो: AFP)
ट्रंप ने बहुत दुरुस्त बात कही ट्रंप के बयानों का कई बार तथ्यों से कोई सरोकार नहीं होता. मगर ये जो बात कही उन्होंने, कि वो किम की सेहत के बारे में नहीं जानते, सौ टका सच्ची है. नॉर्थ कोरिया में क्या हो रहा है, ये पता लगा पाना बड़ा दुरूह है. वो एक किस्म का ब्लैक होल है. जहां से जानकारियां बाहर नहीं आतीं. 2011 में जब किम के पिता 'किम जोंग इल' की हार्ट अटैक से मौत हुई, तो बाहर किसी को भनक नहीं लगी. दुनिया को ये बात पता चली दो दिन बाद. तब, जब ख़ुद उत्तर कोरिया ने ये बताया.

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप (फोटो: रॉयटर्स)
CIA के लिए 'हार्डेस्ट ऑफ द हार्ड' है नॉर्थ कोरिया नॉर्थ कोरिया से ख़बर लाना इतना मुश्किल है. कि CIA के लोग कहते हैं कि वो मुश्किल से भी मुश्किल टारगेट है. इसकी वजह है, नॉर्थ कोरिया की सीलबंद सीमाएं. उन्हें लांघना बहुत मुश्किल है. वहां सरकार के पास बहुत सघन जासूसी नेटवर्क है. बाहरी दुनिया से संपर्क करना, अंदर की जानकारियां बाहर पास करना एक तो बहुत मुश्किल है. ऊपर से अगर आप पकड़े गए या भनक भी लगी, तो मारे जाएंगे. सबसे सीक्रेट किरदार ख़ुद किम जोंग उन. उनका अंदरूनी नेटवर्क बहुत छोटा है. उसमें सेंध नहीं लगाई जा सकती. उससे छनकर कोई ख़बर बाहर नहीं आती. बस उतना ही पता चलता है, जितना वो ख़ुद पता चलने देते हैं. इन सबके बावजूद किम फैमिली और नॉर्थ कोरिया से जुड़ी कुछ जानकारियां पब्लिक डोमेन में हैं. इन्हें बाहर लाने में नॉर्थ कोरिया से भागकर आए लोगों का बड़ा हाथ है.
किम की फैमिली इन्हीं जानकारियों के बूते आपको किम के परिवार के बारे में बताते हैं. किम के दो सगे भाई-बहन हैं. बड़ा भाई किम जोंग चुल. छोटी बहन किम यो जोंग. इनके अलावा तीन सौतेले भाई-बहन भी हैं. एक, किम जोंग नाम. वो सारे भाई-बहनों में सबसे बड़ा था. मगर एक दिक्कत थी उसके साथ. उसे बाहर की दुनिया बहुत अच्छी लगती थी. संगीत का भी बहुत शौक था. एक बार जापान के डिज़्नीलैंड में घुसने की कोशिश करते हुए पकड़ा गया था. पहले पिता, फिर सौतेले भाई किम को ये बात बहुत खटकती थी. 2017 में मलयेशिया एयरपोर्ट पर जोंग नाम की लाश मिली. CCTV खंगाला, तो पता चला दो लोगों ने जोंग की हत्या की है. वो भी नर्व-एजेंट नाम के एक ख़तरनाक कैमिकल से. कहा गया कि ये दोनों किम के भेजे एजेंट्स थे.
किम के बाद कौन? मतलब अब चार भाई-बहन बच गए हैं किम के. दो सगे. दो सौतेले. किम का अपने दोनों सगे भाई-बहनों से बहुत जुड़ाव बताया जाता है. बड़े भाई की राजनीति में कोई रुचि नहीं है. मगर छोटी बहन यो जोंग कई अहम मौकों पर किम के साथ नज़र आती हैं. नॉर्थ कोरिया में किम के बाद सबसे ताकतवर जगह यो जोंग की ही है. वो कभी सॉफ्ट डिप्लोमसी करती हैं. कभी नॉर्थ कोरिया के परिचित अंदाज में दूसरे देशों को धमकाती हैं. मसलन मार्च में यो जोंग का एक बयान आया था. इसमें उन्होंने कहा कि नॉर्थ कोरिया के मिसाइल टेस्ट पर दक्षिण कोरिया की शिकायत ऐसी है, मानो कोई डरा हुआ कुत्ता भौंक रहा हो. जानकारों को लगता है कि अगर कभी किम की असमय मृत्यु होती है, तो शायद उनकी बहन सत्ता संभालें. शायद तब तक, जब तक कि किम के तीनों बच्चे बड़े नहीं हो जाते.

नॉर्थ कोरिया में किम के बाद सबसे ताकतवर जगह यो जोंग की ही है. (फोटो: AFP)
क्या बचपन था! किम के बच्चों का ज़िक्र आया, तो थोड़ा आपको किम का बचपन बताते हैं. कहते हैं कि किम के पिता को अपने छह बच्चों में सबसे ज़्यादा स्पार्क किम में ही दिखता था. किम को कैसे बचपन से ही सत्ता के लिए तैयार किया जा रहा था, इससे जुड़े कई किस्से हैं. मसलन, किम के आठवें जन्मदिन की पार्टी का किस्सा. जब किम को आर्मी जनरल की पोशाक पहनाई गई. और सेना के असली जनरलों ने उनके आगे सिर झुकाकर आशीर्वाद लिया. कहते हैं, किम को बचपन से ही महंगी कारों का शौक था. सात साल की उम्र से वो कार चला सकें, इसके लिए महंगी गाड़ियों को ख़ास तरह से डिजाइन करवाया जाता था.

किम जोंग उन की बचपन की फोटो (फोटो: AFP)
दिल-दिल बास्केटबॉल 1994 से 1998 के बीच नॉर्थ कोरिया में भयंकर अकाल पड़ा. कहते हैं, इसमें 20 से 30 लाख लोग मारे गए. मगर किम इन सबसे दूर स्विट्ज़रलैंड में थे. वहां एक नकली नाम से स्कूल में उनका दाखिला करवाया गया था. ख़ूब आलीशान लाइफस्टाफल थी उनकी. पढ़ाई-लिखाई में बहुत दिलचस्पी थी नहीं. अंग्रेज़ी फिल्में अच्छी लगती थीं. फुटबॉल और बास्केटबॉल का भी काफी शौक था. माइकल जॉर्डन के फैन हुआ करते थे. उनके स्केच बनाया करता था.

किम स्विट्ज़रलैंड में माइकल जॉर्डन का स्केच बनाया करते थे. (फोटो: गूगल मैप्स स्क्रीनशॉट)
दिसंबर 2011: सत्ता का बैटन पास हुआ पिता के उत्तराधिकारी के तौर पर किम को बाहर की दुनिया के आगे पेश किया गया 2010 में. फिर दिसंबर 2011 की एक ठिठुरती दोपहर लोगों ने देखा, आसमान से बर्फ गिर रही है और काले कपड़े पहने सैकड़ों लोग सड़क किनारे तांता लगाए बिलख रहे हैं. छाती पीट रहे हैं. पता चला, किम जोंग इल चल बसे. एक लंबी काली कार में लीडर की अंतिम यात्रा निकली. और गाड़ी के साथ चल रहे थे 27 साल के किम. जिन्हें उनके पिता ने अपना राजनैतिक उत्तराधिकारी चुना था.

गाड़ी के साथ चल रहे 27 साल के किम. (फोटो: AFP)
किम, द रूलर किम को अपने पिता और दादा से अलग परवरिश मिली थी. उन्होंने बाहर की दुनिया, उसके तौर-तरीके देखे थे. कइयों को लगा, शायद किम के आने पर उत्तर कोरिया थोड़ा खुले. कुछ मामलों में ये हुआ भी. मसलन, अपने पिता के मुकाबले किम लोगों के सामने ज़्यादा आते हैं. उन्होंने बातचीत के रास्ते असहमतियां सुलझाने का संकेत दिया. वो ट्रंप से बातचीत के लिए सिंगापोर और वियतनाम पहुंचे. मगर इनके अलावा कई बातों में किम का नॉर्थ कोरिया भी उनके पिता और दादा के समय जैसा रहस्यमय है. बल्कि किम ने नॉर्थ कोरिया को ब्लैकमेलर स्टेट बना दिया है. दो न्यूक्लियर टेस्ट उनके पिता करके गए. और अब नॉर्थ कोरिया से आने वाली ज़्यादातर ख़बरें न्यूक्लियर टेस्ट और मिसाइल लॉन्च से जुड़ी होती हैं. अपनी न्यूक्लियर पावर के दम पर किम पूरी दुनिया को धमकाते रहते हैं.

इस तस्वीर में किम अपने पिता के साथ बैठे हैं. 2010 में किम के पिता ने बतौर उत्तराधिकारी किम को दुनिया के सामने इन्ट्रोड्यूस किया. इसके दो बरस पहले 2008 में किम के पिता को दिल का दौरा पड़ा था. किम के नाम का ऐलान करने के एक साल बाद 2011 में हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई. (फोटो: AFP)
कितने विशेषण- न्यूक्लियर मैडमैन, पिगबॉय किम के कई रूप हैं. कभी वेस्टर्न मीडिया उन्हें 'मैडमैन' कहती है. उन्हें किसी कार्टून करेक्टर की तरह दिखाया जाता है. उनके मोटापे की हंसी उड़ाई जाती है. कई बार तो उन्हें 'पिग बॉय' तक लिख दिया जाता है. सुअर की तरह दिखाते हुए उनके स्केच बनाकर लोग नॉर्थ कोरिया पर सांकेतिक गुस्सा जताते हैं. न्यू यॉर्कर मैगज़ीन ने जनवरी 2016 के अपने अंक में कवर पेज पर छापी थी उनकी एक तस्वीर. एक मोटा गोल-मटोल बच्चा, जो न्यूक्लियर हथियाओं और तोपों से खेल रहा है.

किम को एक ज़िद्दी और गुस्सैल शख़्स के तौर पर देखा जाता है. जो स्कीजोफेनिया के मरीज़ की तरह पूरी दुनिया को अपना दुश्मन मानता है. हल्की सी आलोचना या मामूली सा ख़तरा महसूस हो किसी से, तो उसे गायब करवा देता है. लेकिन क्या दुनिया इस अड़ियल और मूडी लीडर को अनदेखा कर सकती है? क्या नॉर्थ कोरिया पर आर्थिक प्रतिबंध लादकर उसे सही रास्ते पर लाया जा सकता है? शायद नहीं. क्योंकि किम के पास न्यूक्लियर तकनीक है. और इसका ग़लत इस्तेमाल पूरी दुनिया के लिए ख़तरा है. और इसके लिए फिलहाल सबसे कारगर रास्ता बातचीत का ही लगता है.
तानाशाह के दो हथियार- स से सत्ता. स से सख़्ती एक CIA एनालिस्ट का लेख पढ़ा. इसके मुताबिक, 2011 से 2016 के बीच किम ने 340 लोगों को मौत की सज़ा दी. कई लोगों को तो बस इस वजह से फांसी चढ़ा दिया गया कि उन्होंने लीडर की बात पर धीमे तलाई बजाई थी. कइयों को इसलिए लटका दिया गया कि मीटिंग के दौरान उन्हें झपकी आ गई थी.
युवल नोआ हरीरी नाम के एक मशहूर लेखक हैं. पिछले दिनों उन्होंने अपने एक लेख में लिखा. कि अगर नागरिकों के दिल की धड़कन, उनका ब्लड प्रेशर, उनकी ब्रेन मैपिंग, ऐसी जानकारियां सरकार तक पहुंच जाएं, तो नॉर्थ कोरिया की सत्ता और उत्पात मचाएगी. कौन क्या सोच रहा है. कौन खुश होकर ताली बजा रहा है. कौन किस बात से खुश या उदास हो रहा है. किम की तस्वीर देखकर किसको मन ही मन गुस्सा आया. ये सारी चीजें सरकार जान जाएगी और लोगों की शिनाख़्त करके उन्हें ठिकाने लगा देगी. सोचिए, एक लेखक जो दुनिया को सरकारी सर्विलांस के ख़तरों से आगाह कर रहा है. उसे इसके लिए किम की मिसाल माकूम लगती है. शायद इसलिए कि उदाहरण जितना स्थापित हो. जितनी आसानी से समझ आए, बात उतनी अंदर तक घुसती है.
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