एक सेकेंड, थोड़ा फ्लैशबैक में चलिए, ये वही मैच था जिसमें अपना पहला वर्ल्डकप खेल रहे सचिन ने 54 रन बनाए थे. इंडिया के कैप्टन थे मोहम्मद अज़हरुद्दीन और पाकिस्तान के इमरान खान. ये वही मैच था जिसमें इंडिया ने 216 रन बनाए थे, ये वही मैच था जिसमें लग रहा था पाकिस्तान जीत जाएगा, और ये वही मैच था जिसमें अंत में इंडिया 43 रन से जीत गया था और हां ये वही मैच था, जब इंडिया-पाकिस्तान वर्ल्डकप में पहली बार आमने-सामने थे और पाकिस्तान पहली बार हारा था, और आज तक हारता चला आ रहा है.वापस लौटिए. देशभक्ति उफान पर थी, हर्षा भोगले ऑस्ट्रेलिया के पीटर रोबक के साथ कमेंट्री कर रहे थे. रोबक को दर्शकों के हाथ में भारत-पाक के अलावा एक तीसरा झंडा दिखा. उन्होंने हर्षा भोगले से जानना चाहा ये झंडा किसका है? हर्षा भोगले कुछ न बोले. उनका सवाल सुनकर भी अनसुना कर गए. बाद में हर्षा भोगले ने बताया कि झंडा खालिस्तान का था. उन्होंने जान-बूझकर पीटर को नहीं बताया वरना वो खालिस्तान के बारे में और पूछ बैठते. उस समय भारत में खालिस्तान का मुद्दा गरम था. अगर ये बात वो पीटर रोबक से कह देते तो ये बात रेडियो पर चल जाती. और क्योंकि कमेंट्री का प्रसारण आकाशवाणी पर भी हो रहा था तो संभव था कि इस पर विवाद भी हो जाते. इस तरह बातें बनाने में माहिर हर्षा भोगले ने बात दबाकर भी बात बना दी. और एक बड़ा बवाल होने से बचा लिया. एक बात और ये वही मैच था जिसमें मियांदाद और मोरे के बीच ये हुआ था.
तभी किरण मोरे को चिढ़ाने के लिए जावेद मियांदाद मेंढ़क की तरह कूद गए थे. किरण मोरे ने मियांदाद के खिलाफ अपील की थी. इस बात पर जावेद मियांदाद को गुस्सा आ गया. वो गेंद भी कौन फेंक रहा था खुद सचिन तेंदुलकर. उनकी बॉल पर जावेद ने मिड ऑफ पर शॉट लगाया औरभागे अपने रन के लिए. लेकिन जल्द ही खतरे का अहसास हुआ और क्रीज में वापस लौट गए. थ्रो आया और मोरे ने गिल्लियां उड़ा दी. जावेद मियांदाद ने उस खिसिया के जो मेंढ़क कूद लगाई, आज तक तस्वीर आप देखते हैं. बाकी आगे जो हुआ वो आप जानते ही हो, पाकिस्तान 43 रन से हारा था. वीडियो देखें -
फंसे हुए मैच को निकाल ले गई धोनी-जाधव की जोड़ी -
























