The Lallantop

फांसी से दो घंटे पहले पाक ने छोड़ा, पर उसके बाद कहानी दर्दनाक हो गई

ये कहानी बताती है कि जासूसी में फंस जाने के बाद क्या-क्या हो सकता है किसी के साथ.

Advertisement
post-main-image
गले में माला पहने कश्मीर सिंह अपनी पत्नी के साथ. (Source Reuters)
पाकिस्तान की सेना ने पूर्व भारतीय नौसैनिक कुलभूषण जाधव को फांसी की सज़ा सुनाई है. पाकिस्तान का कहना है कि कुलभूषण एक RAW एजेंट हैं. उन पर भारत के लिए जासूसी के अलावा बलूचिस्तान में अस्थिरता फैलाने का इल्ज़ाम लगाया गया है. ऐसे ही एक और भारतीय को पाकिस्तान ने पकड़ा था. और जासूसी के इल्ज़ाम में उस भारतीय को सजा-ए-मौत सुना दी थी.
मगर कुछ ऐसा हुआ कि फांसी से दो घंटे पहले मौत की सज़ा स्थगित हुई पर उनको भारत लौटने में 35 साल लग गए. इनका नाम था कश्मीर सिंह. मगर  जेल की जो दास्तान इस भारतीय ने सुनाई वो बड़ी ही दर्दनाक थी.
कश्मीर सिंह पंजाब के होशियारपुर जिले के नांगलचोरां गांव के रहने वाले थे. वो 1967 में पुलिस में भर्ती हुए थे मगर किन्हीं वजहों से 1971 में नौकरी छोड़ बैठे थे और किसी काम धंधे के सिलसिले में ही पाकिस्तान चले गए थे. पाकिस्तान ने कश्मीर सिंह को साल 1973 में रावलपिंडी शहर से पकड़ कर जेल में डाला था. जब उन्हें गिरफ्तार किया गया था तब उनकी उम्र 32 साल थी. उन पर इल्ज़ाम लगा कि वो भारतीय जासूस है. और आतंकी गतिविधि फैलाने के लिए आया है. जब वो वापस भारत लौटे तो सब कुछ बदल चुका था. यहां तक कि गांव का नाम भी नंगलखिलाड़ियां हो गया था.
कश्मीर सिंह (Source Reuters)
कश्मीर सिंह (Source Reuters)

डॉन न्यूज़ के मुताबिक पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने कश्मीर सिंह को मौत की सजा सुनाई थी. 28 मार्च 1978 को फांसी लगना तय हुआ था. फांसी लगने में दो घंटे का समय बचा था. लेकिन फांसी नहीं हुई. पर ये भी हुआ कि उनको छोड़ा नहीं गया. बाद में पाकिस्तान के कार्यवाहक मानवाधिकार मंत्री अंसार बर्नी मसीहा बनकर आ गए. बर्नी को कश्मीर सिंह लाहौर सेंट्रल जेल में मिले थे. उस वक़्त बर्नी मानवाधिकारों और सुधारों को लेकर जेलों के दौरे पर थे. ये वक्त 2000 के बाद का था. प्रेसिडेंट परवेज मुशर्रफ ने कश्मीर सिंह की सजा को माफ कर दिया.
35 साल पाकिस्तान की कैद में रहने के बाद जब वो वापस वतन लौटे तो वाघा बॉर्डर पर उनका शानदार स्वागत किया गया था. बॉर्डर पर उनकी बीवी परमजीत कौर और एक बेटा इंतजार कर रहे थे. कश्मीर सिंह के दो बेटे और एक बेटी हैं. एक बेटा और बेटी उस वक़्त इटली में थे. जब वहां मौजूद उनके बेटे से मीडिया ने पूछा था कि वो कैसे अपने पिता को पहचानेंगे तो उन्होंने कहा था कि वो मेरे पिता हैं. मेरी रगों में उनका खून है, कैसे नहीं पहचानूंगा. और अब तो मैंने उनकी तस्वीर देख ली है. जब कश्मीर सिंह गिरफ्तार हुए थे तब उनके बेटे की उम्र महज़ 4 साल थी.
जब कश्मीर सिंह लाहौर की कोट लखपत जेल से खुली हवा में बाहर आए तो एक रात उन्होंने फाइव स्टार होटल में गुज़ारी. 35 साल बाद उन्होंने सितारों से सजा आसमान देखा. तब उन्होंने कहा था, 'मौत की सज़ा मिलने के बाद जिंदा रहना बहुत मुश्किल था. लेकिन एक उम्मीद थी जो जिंदा रखे रही.'
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जब कश्मीर सिंह ने 4 मार्च 2008 को वाघा सीमा गेट को पार कर भारत की सरहद में कदम रखा तो पाकिस्तानी दल ने तालियां बजाईं. भारतीयों ने उन्हें फूल और मिठाई दी. बर्नी ने तब इसे 'प्रेम वृक्ष' कहा था. जिसका लुत्फ़ उन्होंने यूं बताया था, 'यह पहली बार हुआ है जब रिहा हुए किसी कैदी ने पाकिस्तान के झंडे वाली किसी सरकारी कार में सफर किया.'
जब कश्मीर सिंह वापस आये तो उन्होंने खुद के जासूस होने की बात से ऐसे ही इंकार किया जैसे वो शुरू से ही करते रहे. उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान में तस्करी के लिए गए थे और पाक सुरक्षा एजेंसियों ने गिरफ्तार कर जासूसी का आरोप लगा दिया.'
कश्मीर सिंह (Source AP)
कश्मीर सिंह

बीबीसी से बात करते हुए कश्मीर सिंह ने बताया था कि 35 साल की सज़ा में से उन्होंने करीब 20 से 25 साल काल कोठरी में गुज़ारे थे. लोहे की बेड़ियों में 18 साल तक बंधे रहे. कहा कि बंधे पैर और पैरों पर पड़े कभी न मिटने वाले निशान कभी नहीं भूल सकता.
कश्मीर सिंह ने बताया, 'मन में अपने नन्हें बच्चों का तसव्वुर, जिन्हें मैं पीछे छोड़ आया था, घर वापस लौटने की टीस, इन एहसासों को क्या और कैसे शब्द दूं और कैसे बयान करूं. नहीं कर सकता.'
कश्मीर सिंह का कहना था कि मौत की सजा मिलने के बाद मैं कभी उम्मीद तो कभी नाउम्मीदी के झूले में झूलता रहा. कभी अपनों की बेहद याद सताती और कभी मैं अपने आप को इतना कठोर कर लेता जैसे शायद कोई नहीं है. उन्होंने बीबीसी से ही बताया था कि 28 मार्च 1978 की रात जब फांसी दी जानी थी उस रात पुलिस वाले मुझे आकर चेक कर रहे थे. चार बजे फांसी लगनी थी. दो बजे मुझे पता चला मेरी फांसी को टाल दिया गया है. और फिर मैं मौत के करीब जाकर वापस लौट आया. लेकिन देश लौटने में 30 साल और लग गए.
आज फिर एक भारतीय पाकिस्तान की चंगुल में है. जिसे सज़ा-ए-मौत सुना दी गई है. मगर दोनों देशों के रिश्ते इतने ख़राब हैं कि उस भारतीय की जिंदगी खतरे में हैं. दुआ है कोई बर्नी जैसा मसीहा आए और कुलभूषण की जान न सिर्फ बचे बल्कि जल्दी ही वतन भी लौट आए.


ये भी पढ़िए :

क्या है कुलभूषण का सच, जिन्हें भारतीय जासूस बता पाकिस्तान ने सज़ा-ए-मौत दी

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

लखनऊ का लड़का, जिसे रॉ ने पाकिस्तानी सेना में अफसर बनवा दिया

एक भारतीय मुसलमान ने पाकिस्तान को क्यों नरक बताया

Advertisement
Advertisement