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निकोलस मादुरो को जिस अमेरिकी डेल्टा फोर्स ने पकड़ा, उसकी खौफनाक कहानी

US Delta Force: डेल्टा फोर्स अमेरिका की सबसे गुप्त और खतरनाक सैन्य यूनिट है, जो आतंकवाद, हाई-वैल्यू टारगेट और असाधारण मिशनों के लिए जानी जाती है. इसकी ट्रेनिंग, ऑपरेशन और रिकॉर्ड ज़्यादातर गोपनीय रहते हैं, इसलिए यह फोर्स जितनी ताकतवर है, उतनी ही रहस्यमय भी.

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निकोलस मादुरो को पकड़ने वाली डेल्टा फोर्स: अमेरिका की सबसे रहस्यमय ताकत

वो रात जब जंगल से उड़ते हेलीकॉप्टरों के साये में एक तानाशाह की नींद टूट गई. धुंधली रोशनी, सन्नाटा, फिर अचानक धमाके. कुछ क्षणों में दुनिया की सबसे ताकतवर और सबसे गुप्त सैन्य इकाई ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उसके महल से उठा लिया, उसका किला तोड़कर बाहर निकाला और फिर एक युद्धपोत पर ले जाकर अमेरिका की ओर उड़ गया . सारा काम दो-ढाई घंटे से भी कम में पूरा. चीन, रूस, लैटिन अमेरिका के नेताओं को रातों की नींद उड़ा देने वाली यही वह शक्ति है जिसे अमेरिका की डेल्टा फोर्स कहते हैं. दुनिया की सबसे रहस्यभरी, सबसे घातक और आज तक रहस्यों में लिपटी हुई विशेष ऑपरेशन यूनिट.

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नीचे विस्तार से जानेंगे कि डेल्टा फोर्स क्या है, कैसे बनी, कैसे प्रशिक्षण देती है, उसका संगठन कैसा है, उसने क्या-क्या मिशन किए हैं, ताकत कितनी है और उसका रिकॉर्ड कैसा रहा है.

डेल्टा फोर्स क्या है?

डेल्टा फोर्स असल में 1st Special Forces Operational Detachment–Delta (1st SFOD-D) कहलाती है - अमेरिकी सेना की अंदरूनी एक टियर-वन “स्पेशल मिशन” यूनिट. इनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका के मुताबिक इसका काम सिर्फ़ पारंपरिक युद्ध नहीं, बल्कि ऐसे अत्यंत खतरनाक, उच्च-स्तरीय मिशन करना है, जिनमें बड़ी चुनौती, गुप्त रणनीति और बारीक जोखिम शामिल होता है.

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यह यूनिट काउंटर-टेररिज़्म (आतंकवाद विरोधी), हाई वैल्यू टारगेट को पकड़ने या उसे नष्ट करने, बंधकों को बचाने, सीधे हमले (direct action) के साथ-साथ विशेष निगरानी एवं खुफिया मिशनों में माहिर है.

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अमेरिका की घातक डेल्टा फोर्स (फोटो- इनसाइक्लोडिया ब्रिटानिका)

डेल्टा फोर्स को कई कवर नामों से भी जाना जाता है- जैसे “Combat Applications Group (CAG)”, “Army Compartmented Elements (ACE)”, “Task Force Green” वगैरह. क्योंकि उसकी असल पहचान और ऑपरेशन अक्सर गुप्त रखे जाते हैं.

स्थापना और इतिहास

डेल्टा फोर्स को औपचारिक रूप से 19 नवंबर 1977 को स्थापित किया गया. इसका विचार 1970 के दशक में एक ऐसे यूनिट की आवश्यकता से आया जो आतंकवाद, हाई-प्रोफाइल किडनैपिंग, और असमय खतरनाक परिस्थितियों को संभाल सके.

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इसका सबसे बड़ा प्रेरक स्रोत ब्रिटिश SAS (Special Air Service) था. उस समय के अमेरिकी कर्नल चार्ल्स बेकविथ SAS के साथ सेवा कर चुके थे और उन्होंने देखा कि एक विशेष तरह की सेना की ज़रूरत है. जो आतंकवादी हिंसा, बंधक-मुक़ाबला और सीक्रेट मिशनों को अंजाम दे सके. ब्रिटिश SAS के अनुभव से प्रेरित होकर, उन्होंने इस तरह का यूनिट बनाने की सिफ़ारिश की, और अंतत: 1977 में डेल्टा फोर्स का गठन हुआ.

इससे पहले अमेरिका के पास ऐसे किसी यूनिट की औपचारिक क्षमता नहीं थी जो चरम जोखिम वाले, अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी मिशन को कुशलता से कर सके. बेकविथ ने SAS की पद्धति को अपनाया और अमेरिकी सशस्त्र बलों के लिए इसका एक आधुनिक संस्करण तैयार किया.

संरचना और संख्या

डेल्टा फोर्स का मुख्यालय फोर्ट ब्रैग, नॉर्थ कैरोलिना में है. यह यूनिट Joint Special Operations Command (JSOC) के तहत संचालित होती है, जबकि प्रशासनिक रूप से U.S. Army Special Operations Command (USASOC) से जुड़ी रहती है.

संख्या में यह यूनिट बहुत बड़ी नहीं है क्योंकि हर सदस्य सबसे कड़ी चुनौतियों से गुजरता है. सार्वजनिक और विश्वसनीय आंकड़ों के अनुसार, डेल्टा में लगभग दो हजार (लगभग 2,000) लोग हैं, जिनमें से लगभग 300-400 प्रशिक्षित “ऑपरेटर” होते हैं जो फील्ड मिशनों में भाग लेते हैं. 

बाकी लोग तकनीकी सहायता, खुफिया, उड्डयन-सपोर्ट, चिकित्सा और अन्य विशेषज्ञ क्षेत्रों में काम करते हैं.

डेल्टा फोर्स का संगठन स्क्वाड्रन पर आधारित है. आम तौर पर सात (A-D assault, E aviation, G clandestine, plus support आदि). प्रत्येक स्क्वाड्रन में कई टीमें होती हैं, जैसे सीधे हमले वाली टीम, निगरानी-स्नाइपर टीम आदि.

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मुश्किल सेलेक्शन, कठिन ट्रेनिंग (फोटो- यूएस आर्मी)
ट्रेनिंग और चयन 

डेल्टा फोर्स का प्रशिक्षण दुनिया का सबसे कठिन ट्रेनिंग सिस्टम माना जाता है. इसकी विशेष ख़ासियत है कि यह आम फौजी उम्मीदवारों के लिए खुला नहीं है. उम्मीदवार पहले ही रैंजर या विशेष सेना (Special Forces) जैसे प्रतिष्ठित इकाइयों से आते हैं. 

चयन (Selection)
चुनाव प्रक्रिया बेहद कठिन है. उम्मीदवारों को कम से कम 2.5 साल शेष सेवा समय और एक मजबूत सेवा रिकॉर्ड होना चाहिए . चयन की पहली कड़ी में लड़ाकू कौशल, मानसिक परीक्षण, रात-दिवस नेविगेशन और कठिन मानसिक परीक्षा शामिल होती है.

सबसे खतरनाक बाधा है “The Long Walk”. जिसमें लगभग 20 किलो का भारी बैग लादकर 40 मील की मार्च करनी होती है. जिसे कम समय में पूरा करना मुश्किल होता है. इन बड़ी कठिनाइयों के कारण करीब 9 में से 10 उम्मीदवार असफल हो जाते हैं. 

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ऑपरेटर ट्रेनिंग कोर्स (OTC)

जो लोग सेलेक्शन पास करते हैं, उन्हें लगभग 6 महीने का ऑपरेटर ट्रेनिंग कोर्स मिलता है. जिनमें उन्हें कई युद्ध कलाओं में माहिर किया जाता है. मिसाल के तौरपर- 

  • एडवांस मार्क्समैनशिप (शिकारी निशानेबाज़ी)
  • स्पेशल ब्रेचिंग एवं विस्फोटक
  • कोर्टर कंबैट (नजदीकी लड़ाई)
  • खुफिया जानकारी इकट्ठा करना
  • क्लोज़-प्रोटेक्शन और VIP सुरक्षा
  • अलग-अलग वातावरण में वक्त बीताना, जैसे हवा, पानी, शहर, जंगल वगैरह.

ये ट्रेनिंग लगातार विकसित होती रहती है और वास्तविक लड़ाकू अनुभवों के आधार पर नई तकनीकें शामिल होती हैं.

किस तरह के मिशन करती है?

डेल्टा फोर्स का काम किसी भी दोहराए जाने योग्य पैटर्न में नहीं आता, वह सबसे जटिल, सबसे संवेदनशील और सबसे खतरनाक मिशन उठाती है. कुछ मुख्य प्रकार इसके मिशन हैं.

1. हाई-वैल्यू टारगेट ऑपरेशन: आतंकवादियों के प्रमुखों को पकड़ना या मार गिराना. जैसे: अबू बक्र अल-बगदादी का आतंकवादी नेता के रूप में सामना.

2. बंधक बचाव (Hostage Rescue): ऐसे अभियानों में टीम निहत्थे बंधकों को सुरक्षित निकालने के लिए दुश्मन के बीच घुसती है.

3. डायरेक्ट एक्शन (Direct Action): सीधी जबर्दस्त कार्रवाई, किसी सुरक्षित लक्ष्य पर सटीक हमला. वे युद्ध अभियानों की तरह दिख सकता है लेकिन उससे ज़्यादा गुप्त और तेज़.

4. विशेष निगरानी / खुफिया (Special Reconnaissance): गुप्त निगरानी, दुश्मन की चालों को पता लगाना, खुफिया जुटाना.

5. क्लोज़-प्रोटेक्शन: उच्च-प्रोफ़ाइल व्यक्तियों के लिए खुफिया सुरक्षा देना, जब वे खतरे में हों.

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मुख्य मिशन और रिकॉर्ड

डेल्टा फोर्स की अधिकांश गतिविधियां सदैव गुप्त रहती हैं. लेकिन कुछ मिशन सार्वजनिक हुए हैं:
1. 1980 - इरान हौज़टेज रेस्क्यू (Operation Eagle Claw): इरान में अमेरिका के दूतावास को आतंकवादी नियंत्रण से मुक्त करने की कोशिश. यह मिशन विफल रहा और इसमें कई लोग मारे गए. 
2. 1989 - पनामा (Operation Acid Gambit): पनामा की जेल से एक अमेरिकी नागरिक को बचाया गया - यह एक बड़ी सफलता थी. 
3. 1993 - सोमालिया (Battle of Mogadishu): यह वही “ब्लैक हॉक डाउन” घटना थी जिसमें हेलीकॉप्टर गिरा और कई ऑपरेटर्स मारे गए. . 

4. 2001 के बाद - अफ़ग़ानिस्तान और इराक: 9/11 के बाद आतंकवादियों के खिलाफ लगातार अभियानों में यह टीम सक्रिय रही. 
5. 2019 - अल-बगदादी रेज़: इसमें आतंकवादी नेता अबू बक्र अल-बगदादी के ठिकाने पर छापा मारा गया. 

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डेल्टा फोर्स ने मादुरो को पकड़ा (फोटो- AP)
और अब - 2026 का वेनेजुएला ऑपरेशन

हाल ही में इसी यूनिट को “ऑपरेशन Absolute Resolve” के तहत वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को Caracas में उनके महल से उठा लेने का मिशन दिया गया. इसमें महीनों की तैयारी, खुफिया काम और संयुक्त वायु-भूमि-समुद्री हमले शामिल थे. अधिकतर डेल्टा टीम के साथ सीआईए एजेंटों ने भी मिलकर लाल निशानों और बंदूकबाज़ों का सामना किया, और अंत में मादुरो को युद्धपोत पर ले जाया गया.

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डेल्टा फोर्स का रिकॉर्ड और छवि

डेल्टा फोर्स की छवि दुनिया में अलग-थलग है - कुछ लोग इसे विश्व का सबसे कुशल और स्थानिक सैन्य कौशल का प्रतीक मानते हैं, वहीं कुछ आलोचक कहते हैं कि इसकी गुप्त गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता के सिद्धांतों के बीच विवाद खड़ा करती हैं. इसकी सफलता दर बेहद उच्च मानी जाती है जब मिशन योजना अच्छी हो. कुछ नाकाम अभियान भी रहे, पर इनके अनुभव ने अमेरिकी विशेष ऑपरेशंस की रणनीति को और परिष्कृत किया.

डेल्टा फोर्स न सिर्फ एक सैनिक इकाई है, बल्कि आधुनिक युद्ध की नई भाषा भी है - जिसमें गति, गुप्तता, सटीकता और उच्च-स्तरीय खुफिया सम्मिलित है. यह पारंपरिक बटालियनों की तरह नहीं लड़ती; यह अकेले एक रणनीति- मशीन की तरह संचालित होती है, और दुनिया के सबसे संवेदनशील मिशनों को अंजाम देती है.

अब जब वेनेजुएला के महल से एक राष्ट्रध्‍य को उठाकर युद्धपोत पर ले जाया गया है, तो डेल्टा फोर्स की यह कहानी सिर्फ़ एक मिशन नहीं - यह युद्ध, राजनैतिक दांव-पेंच, और एक सैन्य शक्ति की अदम्य तकनीक का परिचय है.

वीडियो: वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस की पूरी कहानी

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