1. पहली किताब जो पढ़ी
फैजाबाद में रहते थे हम. 11 साल का था. तब क्राइम एंड पनिशमेंट पढ़ी थी. हिंदी में. उस दौर में रशियन लिटरेचर हिंदी में ट्रांसलेट होकर खूब आता था. फिर उस टाइम अन्ना कैरेनिना पढ़ा था. उसके बाद महाभारत. ये तो घर में ही रखी थीं. पूरा वॉल्यूम नहीं था, मगर बहुत छोटा भी नहीं था. रामायण भी पढ़ डाली. हिंदी की बात करूं तो जो पहली चीज पढ़ी वो था शरद जोशी का व्यंग्य, जीप में सवार इल्लियां. प्रेमचंद की कहानियों का संकलन मानसरोवर भी पूरा घोंट गया था.2. सबसे पहले जो लिखा
मसाला दोसा पर पोएम लिखी थी. मम्मी पापा को सुनाई. वो मेरी शकल देख रहे थे कि इसे क्या हो गया है. ये सब काम 9-10 की उम्र में ही किए. फिर देहरादून के हिलग्रींस बोर्डिंग स्कूल में एक कॉमिक बुक ड्रॉ किया था. मुझे आज भी उसका टाइटल याद है- किम ह्यूज हो गए फ्यूज. एक वंडरमैन करके कैरेक्टर भी बनाया था. चार पन्ने की कॉमिक्स बनाकर बेचता था. नोटबुक की सेंटर पेज से पन्ने उखाड़ लेता था. कॉमिक्स के बदले बच्चे मुझे चॉकलेट देते थे. मजे की बात ये है कि मेरी भतीजी (दबंद के डाइरेक्टर अभिनव कश्यप की बेटी) भी यही करती है. कॉमिक्स बनाती है. प्रत्यांगिरा नाम है उसका. अभी कुछ ही दिन पहले उसने एथलेटिक्स में नेशनल जीता. 200 मीटर में.3. साहित्य आज तक में क्या खास रहेगा
मुझे कुछ नहीं मालूम. सच में. जो मुझसे पूछा जाएगा, बक दूंगा. ऐसे ही तो करता आया हूं. पंगे तो बाद में पड़ते हैं.साहित्य आज तक के कॉम्प्लिमेंट्री पास पाने के लिए यहां रजिस्टर करें. https://www.youtube.com/watch?v=EAYe4uX1p5g


















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