योगी आदित्यनाथ से नहीं बनी

शिव प्रताप शुक्ला की योगी आदित्यनाथ से पटती नहीं थी.
यूपी के बड़े ब्राह्मण नेताओं में शुमार शिव प्रताप शुक्ला की 2002 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले गोरखपुर के सांसद और फिलहाल यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनकी तल्खी बढ़ गई थी. योगी आदित्यनाथ ने शिव प्रताप शुक्ला के खिलाफ हिंदू महासभा से राधामोहन दास अग्रवाल को चुनाव मैदान में उतार दिया. राधामोहन अग्रवाल 24,329 वोटों से जीत गए. इसके बाद शिवप्रताप शुक्ला ने सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली. बीजेपी ने जब 2002 में सूर्यप्रताप शाही को यूपी बीजेपी का अध्यक्ष बनाया तो शिवप्रताप शुक्ला को यूपी बीजेपी का उपाध्यक्ष बनाया गया. बाद में जब लक्ष्मीकांत वाजपेयी और केशव प्रसाद मौर्य भी यूपी बीजेपी के अध्यक्ष बने तो शिव प्रताप शुक्ला पार्टी के उपाध्यक्ष बने रहे.
2016 में पहुंचे राज्यसभा
बीजेपी केंद्रीय नेतृत्व ने जून 2016 को शिवप्रताप शुक्ला को राज्यसभा भेजने का फैसला लिया. गोरखपुर विश्वविद्यालय से लॉ ग्रेजुएट बने शिवप्रताप शुक्ला ने शिक्षा के क्षेत्र में खास काम किया था. उन्होंने सभी के लिए शिक्षा योजना की शुरुआत की थी. इसके अलावा जेल सुधार और ग्रामीण विकास के लिए कई योजनाएं भी शुरू कीं. पूर्वी यूपी में ब्राह्मण और क्षत्रिय के बीच वर्चस्व की चली आ रही लड़ाई को बैलेंस करने के लिए मंत्रालय सौंपा गया है.एबीवीपी से शुरू की थी राजनीति

19 साल जेल में भी रहे शिव.
शिवप्रताप ने 1970 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से छात्र राजनीति की शुरुआत की. आपातकाल के दौरान मीसा के तहत 19 महीने तक जेल में बंद रहे. 1981 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रांतीय सचिव बनाए गए. 2002 में यूपी बीजेपी के उपाध्यक्ष बनाए गए. उसके बाद से उपाध्यक्ष बने रहे थे.
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