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बगीचे में बैठे इस शख्स पर उड़ता विमान ढेर सारी पॉटी कर गया, जो ठोस नहीं थी!

इस शख्स पर जो बीती, वही जानता है!

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प्रतीकात्मक तस्वीर. (साभार- पीटीआई)
घर के सामने बग़ीचा होने का सपना कौन नहीं देखता. कौन नहीं सोचता कि उस बग़ीचे में बैठ नरम घास पर पैर फेरते हुए दिन को बीतते देखें. कलमवीरों ने इस पर किताबें लिख दीं, कवियों ने अनेक कविताएं. लेकिन ब्रिटेन के एक शख्स के साथ कुछ ऐसा हो गया कि शायद अब वो जिंदगी में कभी बगीचे में नहीं बैठेगा. इस अंग्रेज के लिए बगीचे में बैठने का अनुभव 'लाइफ़टाइम हॉरर' में बदल गया. क्या हुआ? ब्रिटिश ऑनलाइन न्यूजपेपर दि इंडिपेंडेंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, ब्रिटेन के विंडसर कैसल में रहने वाले कैरन डेविस के बगीचे में कुछ समय पहले पॉटी गिरी. जी पॉटी, मानव मल. वो भी ढेर सारा. कहां से? आसमान से. उनके बगीचे के ऊपर से विमान गुजर रहा था, जो डेविस के बगीचे में पॉटी करता हुआ निकल गया. बीते जुलाई महीने में हुई इस घटना का जिक्र डेविस ने हाल में एक मंच पर किया. वो रॉयल बॉरो ऑफ़ विंडसर ऐंड मैडेनहेड के विमानन फोरम पर क्लेवर वेस्ट (इंग्लैंड का इलाका) के काउंसलर के तौर पर पहुंचे थे. चर्चा के दौरान कैरन डेविस ने बताया कि वे अपने बगीचे में खड़े थे, तभी ऊपर से गुजरते एक विमान ने इतना ज्यादा मानव मल गिराया था कि उनका पूरा बगीचा, उसमें लगे बड़े-बड़े छाते और खुद डेविस मल से सन गए थे. इवेंट में शिरकत करने वाले दूसरे काउंसलरों ने इस घटना को 'वेरी रेयर' बताया. कहा कि विमान से गिरने वाले मानव मल को जमा दिया जाता है. आमतौर पर लैंडिंग से ठीक पहले विमान ये जमा हुआ मल त्यागते हैं. चर्चा में शामिल एक अन्य काउंसलर ने बताया कि डेविस पर मल गिराने वाला विमान भी एक नजदीकी एयरपोर्ट पर पहुंचने वाला था. लेकिन उन पर और उनके गार्ड पर गिरा मल ठोस नहीं था. अब कुछ भी कह लीजिए, डेविस पर जो बीती वो वही जानते हैं. भारत में कोई मामला? अक्टूबर 2016 में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के बीच इसी बात को लेकर ठनी थी. तब दिल्ली में ऐसे ही वाकये के बाद शिकायत दर्ज हुई थी. एनजीटी के फटकार लगाने के बाद डीजीसीए ने एयरलाइंस को एक सर्कुलर जारी किया था. इसके मुताबिक़, उड़ान के दौरान विमान से मानव मल नीचे गिरता है तो 50 हजार रुपये का जुर्माना भरना पड़ेगा. वहीं, डीजीसीए ने एनजीटी को कहा कि वो इस आदेश को लेकर 'मज़ाक का पात्र' बन गया है क्योंकि बीच हवा में विमानों के टॉयलेट से मानव मल गिरना नामुमकिन है. आमतौर पर विमान में लगे टैंकों में सीवेज जमा होता है, जिसे विमान के उतरने के बाद फेंका जाता है. लेकिन कभी-कभी विमान से मल-मूत्र का रिसाव हो जाता है. विमानों से इस तरह मल गिरने की घटनाएं भारत समेत कई देशों में रिपोर्ट हो चुकी हैं. इंडिया टुडे ने इस मामले में अपनी एक रिपोर्ट में कुछ उड्डयन विशेषज्ञों से बात की थी. इनमें उड्डयन तकनीकी विशेषज्ञ मार्क डी मार्टिन भी शामिल थे. उन्होंने बताया था,
"आधुनिक विमानों में ऑन रोड कचरे को केमिकल की मदद से स्टोर किया जाता है. इसे हाइड्रोलॉजिक न्यूमेटिक और एयर कंडीशनिंग लाइनों से दूर रखा जाता है. आधुनिक विमानों में ऐसा कोई सिस्टम नहीं है जिसके ज़रिए मानव मल को बीच हवा में गिराया जा सके. ऐसा तभी संभव है जब विमान जमीन पर खड़ा हो और लैवेटरी ट्रक उसके साथ जोड़ा जाए."
मार्टिन ने बताया था कि 1970 के दशक में विमानों में सीवर वेस्टलाइन पर्याप्त तौर पर सील नहीं होती थी. इसकी वजह से कभी-कभी कचरा लीक होने की आशंका रहती थी. लेकिन अब आधुनिक विमानों में ऐसा कोई मसला नहीं होता. सिस्टम क्या है? आधुनिक विमानों में मल को टैंको में रखा जाता है और विमान उतरने के बाद लैवेटरी ट्रक के माध्यम से फेंक दिया जाता है. विमानों का 'वैक्यूम टॉयलेट सिस्टम' जींस कैंपर ने 1974 में डिज़ाइन किया था. सबसे पहले परीक्षण के लिए इसे 1982 में एक बोइंग फ्लाइट में फिट किया गया था. पहले सिस्टम अलग था. मल को कीटाणुनाशक द्रव, पानी और अन्य केमिकलों से ट्रीट किया जाता है. इसीलिए ये सख़्त होकर 'ब्लू आइस' या 'नीली बर्फ़' में तब्दील हो जाता है. जैसे ही हवा भारी होती, तो यह ब्लू आईस-रूपी कचरा ज़मीन पर गिर जाता था. सामान्य तौर पर ऐसा विमान के नीचे उतरने पर होता था. तो कभी कोई पुराना व्यक्ति अपनी छत पर गिरी नीली बर्फ़ को रोमांटिसाइज़ करे, तो उसे बताएं कि असल में वो था क्या! वैसे, ना ही बताएं! और भ्रम दूर करने हैं तो यह रिपोर्ट पढ़ें - प्लेन में की हुई टट्टी आखिर जाती कहां है?

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