नारद कनफ्यूज हुए कि ये शाप है या वरदान
नारद को मिला वासना का गुलाम बनने का श्राप.
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फोटो - thelallantop
ब्रह्मा धरती पर लाइफ जेनरेट करने की जल्दी में थे. उनके जो पहले चार बेटे हुए वे तो निकल गए तपस्या करने. अब उनके पास बचे नारद. ब्रह्मा ने उनको पुचकार कर कहा तुम मेरा ये छोटा सा काम करो, शादी कल्लो. फिर ढेर सारे बच्चे पैदा करो और धरती पर फसल लहलहा दो. नारद थे प्रैक्टिकल आदमी. उनको लगा कि तपस्या ज्यादा मीठा लड्डू है. बाप से कहने लगे कि बड़े भाई लोग को तो भेज दिए तपस्या करने और हमको सौंप रहे हो ये भरम जाल. हमसे न हो पाएगा. ब्रह्मा का पारा गरम. फटाक से श्राप दे मारा. कहा कि जाओ बेट्टा नारद. अब तुमको जिंदगी यही काम करते बीतेगी. अक्ल तुम्हारी चली जाएगी घास चरने. उम्र भर तुम्हारे मन में इश्क का कीड़ा कुलबुलाता रहेगा और तुम वासना के वशीभूत होकर रह जाओगे. तो यह श्राप दिया था नारद को ब्रह्माजी ने. यह श्राप था कि गॉड गिफ्ट, इस पर विद्वानों में मतभेद है. स्रोत: ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्मखण्ड
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