हरियाणा विधानसभा चुनाव में करारी हार झेलने के बाद भी कांग्रेस की राज्य ईकाई के भीतर गुटबाजी खत्म नहीं हो रही है. कांग्रेस नेता बृजेंद्र सिंह ने राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा की तर्ज पर राज्य में सद्भाव यात्रा निकाली. उद्देश्य था समाज में भाईचारा और एकता का प्रदर्शन. लेकिन यह यात्रा भी कांग्रेस गुटबाजी को उजागर करती दिख रही है.
शैलजा-सुरजेवाला के बाद क्या हरियाणा कांग्रेस में हुड्डा कैंप के लिए नया खतरा तैयार हो रहा है?
कांग्रेस नेता Brijendra Singh की Sadbhav Yatra को लेकर पार्टी में ही एकमत बनता नहीं दिख रहा है. जहां यह यात्रा भी गुटबाजी का शिकार होती दिख रही है.


हिसार के पूर्व सांसद और IAS से नेता बने बृजेंद्र सिंह ने अक्टूबर 2025 में राज्य भर में यात्रा शुरू की थी. इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार उनकी यह यात्रा हरियाणा की 90 विधानसभी सीटों में से 51 से होकर गुजर भी चुकी है. फिलहाल यात्रा अंबाला और यमुनानगर जिलों को पार करने के बाद कुरुक्षेत्र जिले से गुजर रही है. लेकिन अब तक की यात्रा में यही दिखा है कि बृजेंद्र सिंह को पार्टी के भीतर ही पूरा समर्थन नहीं मिल रहा है.
यात्रा को लेकर बंटे गुटहरियाणा कांग्रेस के भीतर दो बड़े गुट माने जाते हैं. हुड्डा गुट और सुरजेवाला-शैलजा गुट. इसमें हुड्डा गुट में हरियाणा के पूर्व मुख्यंमत्री भूपेंद्र हुड्डा, उनके बेटे दीपक हुड्डा और समर्थित विधायक माने जाते हैं. वहीं रणदीप सुरजेवाला और कुमारी शैलजा जैसे सीनियर नेता हुड्डा गुट से अलग खेमे के माने जाते हैं. अब बृजेंद्र सिंह की यात्रा को लेकर भी दोनों गुटों में खींचतान देखने को मिल रही है.
जहां एक ओर सुरजेवाला और शैलजा गुट खुलकर बृजेंद्र सिंह की यात्रा को समर्थन दे चुका है, तो वहीं हुड्डा का गुट इस यात्रा से दूरी बनाता हुआ दिख रहा है. राज्यसभा MP रणदीप सिंह सुरजेवाला, उनके बेटे आदित्य सुरजेवाला, पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी शैलजा समेत उनके कैंप के कई नेता बृजेंद्र सिंह की यात्रा में शामिल हो चुके हैं. इसके अलावा हरियाणा कांग्रेस के कई पदाधिकारी भी यात्रा में आए हैं.
लेकिन हुड्डा कैंप का कोई भी बड़ा नेता अब तक बृजेंद्र सिंह की यात्रा में शामिल नहीं हुआ है. यहां तक कि यात्रा शुरू होने के बाद भूपेंद्र हुड्डा से पूछा भी गया था कि क्या वह इसमें शामिल होंगे. तो उन्होंने कहा था कि अगर यह कांग्रेस का प्रोग्राम होगा तो मैं जाउंगा. भूपेंद्र हुड्डा के कई करीबी नेता भी इसे बृजेंद्र सिंह की निजी यात्रा बता चुके हैं. हालांकि कुछ नेताओं ने यह भी कहा कि उन्हें यात्रा से दूर रहने का कोई निर्देश नहीं दिया गया है.
फिलहाल यात्रा को मिले अब तक का रिस्पॉन्स देखकर यही लगता है कि हुड्डा कैंप और रणदीप-शैलजा कैंप इसे लेकर पूरी तरह बंटा हुआ है. वरिष्ठ पत्रकार रविंदर श्योराण का भी यही मानना है. उन्होंने दि लल्लनटॉप को बताया कि
राहुल गांधी का 'समर्थन'हरियाणा कांग्रेस में इस समय हुड्डा कैंप बनाम ‘ऑल’ चल रहा है. यानी एक तरफ भूपेंद्र हुड्डा और उनके करीबी नेता और दूसरी तरफ पार्टी की राज्य ईकाई के अन्य नेता. यहां तक कि प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र भी हुड्डा कैंप से अलग लाइन बनाकर चल रहे हैं.
रविंदर श्योराण के मुताबिक बृजेंद्र सिंह की यात्रा को लेकर भी हरियाणा कांग्रेस सीधे तौर पर बंटी हुई है, जहां हुड्डा कैंप फिलहाल यात्रा के खिलाफ है और बाकी नेता साथ. लेकिन खास बात यह है कि गांधी परिवार और पार्टी आलाकमान बृजेंद्र सिंह के साथ है. रविंदर श्योराण बताते हैं कि बृजेंद्र सिंह ने राहुल गांधी से सलाह मशविरा के बाद ही यात्रा शुरू की थी. यात्रा के दौरान भी वह राहुल गांधी से मिल चुके हैं. यहां तक कि यात्रा के अंत में खुद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी या मल्लिकार्जुन खरगे में से कोई एक इसमें शामिल भी होगा. ऐसे में भूपेंद्र हुड्डा को भी यात्रा में शामिल होना पड़ सकता है.
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रविंदर के मुताबिक पार्टी आलाकमान और गांधी परिवार बृजेंद्र सिंह की यात्रा के जरिए राज्य में एक तरह से पावर बैलेंस भी करना चाहते हैं. जहां हुड्डा कैंप फिलहाल सबसे मजबूत स्थिति में है, लेकिन पार्टी आलाकमान का मानना है कि इस यात्रा से हुड्डा कैंप की ताकत को भी बैलेंस किया जा सकेगा. पार्टी आलाकमान का यह भी मानना है कि यात्रा का लोगों पर प्रभाव जरूर पड़ रहा है और पार्टी की स्थित भी मजबूत हो रही है.
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