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34 साल पुरानी सत्ता उखाड़ फेंकने वाली 'दीदी' हैप्पी बर्थडे

15 साल की उम्र से राजनीति में एक्टिव हैं ममता बनर्जी.

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क्रेडिट: ap
15 साल की उम्र से राजनीति में एक्टिव हैं. 17 की उम्र में मेडिकल सुविधाएं न मिलने से उनके पिता की मौत हो गई थी. छोटी उम्र में फैमिली की जिम्मेदारी संभाली. आज वही जिम्मेदार बिटिया पश्चिम बंगाल संभाल रही हैं. पश्चिम बंगाल की पहली महिला मुख्यमंत्री ममता बनर्जी. तड़क भड़क से दूर रहने वाली ममता का आज (5 जनवरी) जन्मदिन है. आगे जानिए ममता दीदी की जिंदगी से जुड़े कई किस्से.... 1. लोअर मिडिल क्लास बंगाली ब्राह्मण परिवार में 1955 में जन्म. फैमिली कंडीशन बहुत अच्छी नहीं थी. पापा फ्रीडम फाइटर थे. मेडिकल सुविधाएं न मिलने की वजह से ममता बनर्जी के पिता की मौत हो गई थी. तब ममता की उम्र 17 साल थी. 2. ममता बनर्जी राजनीति में 15 साल की उम्र से सक्रिय हैं. जोगमाया देवी कॉलेज में कांग्रेस की स्टूडेंट विंग 'छात्र परिषद् यूनियंस' के लिए काम किया. 70 के दशक में कांग्रेस से जुड़ी रहीं. 1976-80 के दौरान महिला कांग्रेस की जनरल सेक्रेटरी रहीं. 1984 में सीपीआई (एम) के नेता सोमनाथ चटर्जी को जादवपुर लोकसभा सीट के हराकर 29 साल की उम्र में देश की सबसे युवा सांसद बनीं. ममता इसके बाद साल 1996, 1999, 1998, 2004 और 2009 में दक्षिणी कोलकाता सीट से लोकसभा सांसद चुनी गईं. 3. फरवरी 1997 का एक किस्सा बेहद दिलचस्प है. तत्कालीन रेलवे मिनिस्टर रामविलास पासवान के रेल बजट से ममता नाखुश थीं. बजट में पश्चिम बंगाल को नजरअंदाज करने की बात कहते हुए ममता ने अपनी शॉल उनके ऊपर फेंककर अपने इस्तीफे का ऐलान किया. 4. कांग्रेस से मतभेद की वजह से ममता ने 22 दिसंबर 1997 को कांग्रेस को अलविदा कह दिया. दीदी ने कोलकाता में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) बनाने का ऐलान किया. 5. 1999 में एनडीए की सरकार में टीएमसी शामिल हुई. ममता बनर्जी को रेल मंत्री का पद दिया गया. हालांकि उन्होंने एनडीए का दामन भी छोड़ दिया. 2001 में कांग्रेस के साथ मिलकर ममता ने पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव लड़ा. चुनाव में गठबंधन महज 86 सीटें हासिल कर सका. ममता की मुख्यमंत्री बनने का सपना उस साल अधूरा रह गया. 6. 20 मई 2011 को ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल की पहली महिला मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. 34 साल तक राइटर्स बिल्डिंग में काबिज सीपीआई (M) को ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने विधानसभा चुनावों में हरा दिया. टीएमसी और कांग्रेस गठबंधन 294 में से 227 पर विजयी रही. 7. हमेशा कॉटन की साड़ी और हवाई चप्पलों में नजर आने वाली ममता तड़क भड़क से बेहद दूर रहती हैं. एक पुरानी कार का इस्तेमाल मुख्यमंत्री बनने के बाद वो अब भी करती हैं. ममता को पेंटिंग, सिंगिंग और कविता लिखने का शौक है. तीखे से मिजाज की दिखने वाली ममता अक्सर अपने अलग स्टैंड्स और बयानों की वजह से खबरों में बनी रहती हैं. ममता के मिजाज का पता इससे भी लगता है कि मुख्यमंत्री शपथग्रहण समारोह में सिंगूर आंदोलन के दौरान रेप और हत्या की शिकार तापसी मल्लिक का परिवार को भी न्योता दिया गया था. साथ ही नंदीग्राम कांड में मारे गए लोगों के परिवार वाले भी बुलाए गए थे. इन दोनों की मामलों में ममता पीड़ितों के साथ खड़ी नजर आई थीं. ममता बनर्जी की कविता- राजनीति
'राजनीति' एक शब्द, जिससे मन में कभी जागता था श्रद्धाभाव अब हो गए हैं इसके मायने बड़ा कारोबार पार्टी के दफ़्तर बन गए हैं बाज़ार सच, राजनीति बनकर रह गई है 'गंदा खेल' 'राजनीति' जो होनी चाहिए थी सिद्धांतों और मूल्यों का पर्याय समय ने बदला है इसका अर्थ अब है यह है अपराध की पाठशाला नहीं बीता है बहुत वक़्त जब राजनीति की कुंजी थी 'जनशक्ति' अफ़सोस, अब इसके मायने हो गये हैं 'धनशक्ति' भरोसा, ईमानदारी, निष्ठा है ये शब्द बेहद नेक, बेहद पाक लेकिन गायब होते जा रहे हैं धीरे-धीरे अब ये राजनीति के शब्दकोष से 'राजनीति है जनसेवा, देशसेवा' बनती जा रही हैं ये सब बातें अब भूली-बिसरी-सी यादें राजनीति तो है आज ग्लैमर और फैशन 'सच' ग्लैमर और फैशन बदलने ही होंगे हमें ये हालात, बदलनी होगी राजनीति की बदरंग तस्वीर कहीं ऐसा न हो हिमालय कि यह गंगा गंदगी के भंवरजाल में डूब जाए, समा जाए

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