
गनपाउडर सीरीज का लोग काफी इंतजार कर रहे थे. कई दर्शकों ने तो इसकी तारीफों के पुल भी बांधे हैं. उनका कहना है कि जो दिखाया, वो गलत तो नहीं दिखाया.

गेम्स ऑफ थ्रोन्स ने टीवी का खेल काफी हद तक बदल दिया है. दर्शकों की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं. (तस्वीर में: गनपाउडर के पहले एपिसोड का एक दृश्य)
बीबीसी की सफाई: जैसा इतिहास था, वैसा ही तो दिखाएंगे लोगों की खरी-खोटी पर बीबीसी ने सफाई दी. कहा, कुछ गलत नहीं दिखा रहे हैं. इतिहास में जो जैसा था, वैसा ही दिखा रहे हैं. मतलब खून था, सो खून दिखा रहे हैं. इस सीरीज की जो कहानी है, वो सच्ची है. एक बहुत मशहूर घटना हुई थी ब्रिटेन में. साल था 1605 का. तब इंग्लैंड के किंग जेम्स चार्ल्स स्टुअर्ट 'किंग जेम्स I' को मारने की एक साजिश बनाई गई थी. बस राजा नहीं, उसके परिवार को भी. और कई बड़े-बड़े लोगों को. इसके पीछे थे कुछ कैथलिक ईसाई. इसका मुखिया था रॉबर्ट कैट्सबे. प्लान बनाया गया. तय हुआ कि 5 नवंबर, 1605 के दिन साजिश को अंजाम देंगे. जब इंग्लैंड की संसद का सत्र शुरू होगा. उसी दिन 'हाउस ऑफ लॉर्ड्स' को उड़ा देंगे. हमारी संसद के दो हिस्से हैं न. लोकसभा और राज्यसभा. ऐसे ही ब्रिटिश संसद के भी दो धड़े हैं. एक है, हाउस ऑफ लॉर्ड्स. दूसरा है, हाउस ऑफ कॉमन्स. इसी हाउस ऑफ लॉर्ड्स को उड़ाने की प्लानिंग थी. ये साजिश मुकम्मल नहीं हो पाई मगर. फेल हो गई. इसी 'गनपाउडर प्लॉट' पर बनी है बीबीसी की ये सीरीज.

गेम्स ऑफ थ्रोन्स के स्टार किट हैरिंगटन इस सीरीज में रॉबर्ट कैट्सबे का किरदार निभा रहे हैं. इस गनपाउडर प्लॉट के पीछे सबसे ज्यादा हाथ इसी कैट्सबे का था.
ब्रिटेन में कैथलिक ईसाइयों की हालत खराब थी
1570 में पोप ने क्वीन एलिजाबेथ का हुक्का-पानी बंद कर दिया था. इसके बाद ब्रिटेन में कैथलिकों पर खूब छड़ी चली. एकदम सख्ती हो गई. ये दौर बड़ी टेंशन वाला था. धर्म तो एक ही था यहां. ईसाई धर्म. उसके दो हिस्से थे मगर. कैथलिक और प्रोटेस्टेंट. चर्च का प्रभाव कम करने की कोशिश की जा रही थी. उसका दखल घटाने की कोशिश जोरों पर थी. लोगों को कसम खाने पर मजबूर किया जाता. कि वो राजा को ही चर्च का और देश का मुखिया समझते हैं. जो ऐसा करने से इनकार करता, उसकी मरम्मत की जाती. कई बार तो उन्हें सजा-ए-मौत भी हो जाती थी. कैथलिक कट्टर थे. उनकी धर्म में बड़ी दिलचस्पी थी. पोप के आगे राजा-रानी और देश को भी कुछ नहीं समझते थे. सारी आस्था पोप के प्रति थी उनकी. इसी कारण कैथलिक चर्च पर पाबंदियां बढ़ने लगी थीं. फिर भी कैथलिक नहीं मान रहे थे. खुलकर बताते नहीं थे. चुपके-चुपके अपना धर्म मानते थे.

ये ही वो गुमनाम चिट्ठी है, जिसके कारण इस साजिश का भांडा फूट गया था (तस्वीर: विकीपीडिया)
क्वीन एलिजाबेथ के बाद किंग जेम्स I राजा बने थे क्वीन एलिजाबेथ का कोई बच्चा नहीं था. वो अपना वारिस चुने बिना मर गईं थी. बड़ी कोशिशों के बाद जेम्स चार्ल्स स्टुअर्ट को राजा चुन लिया गया. उनके मरने के बाद. वो एलिजाबेथ की कजन के बेटे थे. 'मैरी, क्वीन ऑफ स्कॉट्स' के बेटे. क्वीन मैरी को 1587 में मार दिया गया था. वो खुद कैथलिक ही थीं. सो कैथलिक दिल से चाहते थे कि जेम्स राजा बने. उन्हें किंग जेम्स से बड़ी उम्मीदें थीं. उनको लगता था कि शायद एक दिन किंग जेम्स खुद भी कैथलिक बन जाएं. ये वो दौर था, जब कैथलिक और प्रोटेस्टेंट के बीच कांटे की टक्कर थी. आगे निकलने की. दूसरे को गिराने की. कैथलिक लगातार ब्रिटेन और यूरोप के कई प्रोटेस्टेंट राजाओं और रानियों को मारने की कोशिश कर रहे थे. बहुत मार-काट मची हुई थी धर्म के नाम पर.

पूरे ब्रिटेन में 5 नवंबर को बोनफायर डे मनाया जाता है. ये इसी गनपाउडर प्लॉट की यादें हैं, जिसका इस दिन जश्न मनाया जाता है (तस्वीर: विकीपीडिया)
कैथलिकों ने राजा से जो उम्मीद लगाई थी, वो टूट गई शुरुआत में किंग जेम्स चार्ल्स स्टुअर्ट कैथलिकों के लिए ठीक रहे. बहुत दरियादिली तो नहीं दिखाई. मगर ले-देकर ठीक ही था व्यवहार. उन्होंने वादा किया कि अगर कैथलिक ठीक से रहें, तो उनके साथ सख्ती नहीं की जाएगी. धीरे-धीरे समय बीतता गया. कैथलिक अधीर होने लगे. उन्होंने राजा से जो उम्मीद लगाई थी, वो टूटने लगी. जो सोचा था, वैसा बिल्कुल नहीं हो रहा था. कैथलिक बिल्कुल खुश नहीं थे.

ये मास्क गाय फाउक्स (Guy Fawkes) का प्रतीक है. भले ही लोग उसे बहुत बड़ा विलेन मानते हों, लेकिन कइयों के लिए वो शख्स सत्ता के विरोध का भी प्रतीक है.
नाराजगी में राजा को मारने की साजिश रची गई इसी नाराजगी में राजा को खत्म करने का फैसला लिया गया. पोल खुल गई मगर. किसी भेदी ने चुगली कर दी. हुआ यूं कि एक अधिकारी के पास एक गुमनाम चिट्ठी पहुंची. इसमें सारी साजिश का भांडा फोड़ दिया गया था. ये तारीख थी 26 अक्टूबर, 1605 की. 4 नवंबर की रात हाउस ऑफ लॉर्ड्स की तलाशी हुई. वहां मिला 36 गैलन गनपाउडर यानी बारूद. इतना विस्फोटक पूरे हाउस ऑफ लॉर्ड्स को मिट्टी में मिला देता. इस गनपाउडर के साथ पकड़ा गया गाय फाउक्स (Guy Fawkes). पुलिस ने उसको पकड़ा और जेल में डाल दिया. साजिश में शामिल ज्यादातर लोग रफूचक्कर हो गए. उनकी तलाश होती रही. कैट्सबे मारा गया. उसे गोली लग गई थी. बाकी कुछ लोग पकड़े गए. कुल आठ थे ये. इनके खिलाफ मामला चला. सबको दोषी पाया गया.

इस प्रिंट में उस दिन की तस्वीरें हैं, जब दोषियों को घसीटकर फांसी देने के लिए ले जाया जा रहा था (तस्वीर: विकीपीडिया)
बहुत भयंकर थी वो मौत, जो इन लोगों को मिली 30 जनवरी, 1606. पहले चार दोषियों को फांसी मिली. उन्हें लकड़ी के पटरों पर बांधा गया. लंदन की गलियों से घसीटते हुए सेंट पॉल चर्चयार्ड लाया गया. सबसे पहले जिसे फांसी चढ़ाया गया, उसका नाम था इवरार्ड डिग्बी. उसके कपड़े उतरवा दिए गए. उसका लिंग काटा गया. उसकी अंतड़ियां निकाली गईं. शरीर के चार टुकड़े कर दिए गए. बाकी तीनों का भी ये ही हश्र हुआ. अगले दिन यानी 31 जनवरी को बाकी चार दोषियों को सजा दी गई. उन्हें भी फांसी दी गई. फिर उनके शरीर के टुकड़े कर दिए गए. गाय फाउक्स की बारी दूसरे दिन आई थी. वो फांसी के तख्ते से कूद गया. उसकी गर्दन टूट गई.

हर साल 5 नवंबर को गाय फाउक्स का पुतला बनाकर आग के हवाले कर दिया जाता है. ये तस्वीर भी उसी बोनफायर जश्न की है.
400 साल से ज्यादा हो गया, तब भी सुर्खियों में है इस 'गनपाउडर प्लॉट' के पीछे असली दिमाग गाय फाउक्स का नहीं था. सबसे ज्यादा कुख्यात उसका ही नाम हुआ मगर. विलन बन गया वो लोगों की नजर में. लोग उसका पुतला बनाते हैं. फिर उसे बोनफायर पर जला देते हैं. 400 साल से ज्यादा का समय गुजर चुका है. फिर भी इंग्लैंड ने इस घटना को बराबर याद रखा हुआ है. इसी का नतीजा है कि गाय फाउक्स की गिनती ब्रिटिश इतिहास के सबसे बड़े खलनायकों में होती है. कहते तो हैं कि समय के साथ याद्दाश्त धुंधली पड़ जाती है. सोचिए, कितनी बड़ी थी ये घटना. 412 साल हो गए, लेकिन याद रत्तीभर भी मिटी नहीं है.










