लेकिन इससे पहले एक पत्र का ज़िक्र करना ज़रूरी हो जाता है. रविवार 17 मार्च को मनोहर पर्रिकर की मृत्यु के ख़बर आने के बाद ही एक लेटर वायरल होने लगा. ये लेटर गोवा प्रदेश कांग्रेस कमिटी की ओर से गोवा के राज्यपाल को भेजा गया था. इस पत्र में गोवा प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने पर्रिकर की मृत्यु के बाद सरकार बनाने का दावा पेश किया.
गोवा कांग्रेस के आधिकारिक लेटर-हेड पर लिखे इस पत्र में कांग्रेस ने यह दावा किया है कि गोवा के सदन में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी है. इस पत्र के मुताबिक़ कांग्रेस के पास 14 और भाजपा के पास 11 विधायक हैं. इसके अलावा कुल 11 सदस्य हैं, जिनमें से कई ने पहले सरकार निर्माण के समय भाजपा को समर्थन देने की घोषणा की थी. कांग्रेस ने यह दलील दी है कि पर्रिकर के मुख्यमंत्री कार्यकाल में यह गठबंधन अपने प्रभाव में था. उनकी मृत्यु के बाद यह गठबंधन अब प्रभाव में नहीं है. इस लिहाज़ से पार्टी सदन में "सिंगल लार्जेस्ट पार्टी" यानी सबसे बड़ा दल है.
इसी दलील पर कांग्रेस ने सदन में दावेदारी पेश की. इस पत्र को गोवा के राजभवन में रिसीव भी किया गया है और इस पर मुहर के साथ-साथ हस्ताक्षर भी हैं.

गोवा कांग्रेस का राज्यपाल को लिखा पत्र
ट्विटर और फेसबुक पर ये पत्र #VultureCongress के साथ खूब चला.
लोगों का कहना है कि कांग्रेस मनोहर पर्रिकर की मृत्यु को लेकर असंवेदनशील है. कुछ लोगों ने यह कहा कि कांग्रेस ने पर्रिकर की अंत्येष्टि का भी इंतिज़ार नहीं किया और सरकार बनाने की पेशकश कर डाली. लेकिन अगर इसी दृष्टि से देखें तो भाजपा ने भी असंवेदनशील होने का परिचय दिया है. कहावत के शिल्प में कहें तो भाजपा ने पर्रिकर की चिता ठंडी तक नहीं होने दी.
लेकिन संविधान के दायरे में चीज़ों को देखा जाना चाहिए. ऐसे में संविधान के आर्टिकल 356 का उल्लेख ज़रूरी हो जाता है. संविधान के मुताबिक अगर विधानसभा काल में मुख्यमंत्री का देहांत हो जाता है या किसी आकस्मिक कारणों से मुख्यमंत्री की सीट खाली हो जाती है, तो सदन का सबसे बड़ा दल अपनी दावेदारी पेश कर सकता है. इसके लिए किसी समयसीमा का उल्लेख संविधान में नहीं है.
अब यदि कांग्रेस या भाजपा का प्रत्याशी मुख्यमंत्री के रूप में अपनी दावेदारी पेश करता है, तो उसे सदन में बहुमत भी सिद्ध करना होगा. अगर मुख्यमंत्री पहले से ही सदन का सदस्य नहीं है, तो उसे शपथग्रहण के 6 महीनों के भीतर चुनाव लड़ना होता है और जीत दर्ज करनी होती है.
मुख्यमंत्री के न रहते हुए राज्यपाल के पास सारी शक्तियां होती हैं, लेकिन इसका मतलब नहीं है कि किसी भी रूप में सदन को मुख्यमंत्री की गैर-मौजूदगी के रहने दिया जाए. बड़ी पार्टी को दावेदारी पेश करनी ही होती है.
कांग्रेस को आड़े हाथों लेने वाले आलोचकों को शायद दो बातें पता नहीं है. एक, कांग्रेस ही नहीं भाजपा ने वह काम किया है, जिसके लिए सिर्फ कांग्रेस को गालियां पड़ रही हैं. और दो, किसी भी सूरत में पार्टियों की बहुमत सिद्ध करने की कोशिश को असंवेदनशील नहीं माना जा सकता है, क्योंकि यह संविधान का एक हिस्सा है.
मनोहर पर्रिकर की मृत्यु के साथ ही भाजपा के अमित शाह और नितिन गडकरी भी पणजी पहुंचकर एक होटल में अगले मुख्यमंत्री के लिए मीटिंग शुरू कर चुके थे. इस तस्वीरों को समाचार एजेंसी एएनआई ने ट्वीट भी किया है -
गोवा में आखिरी बार विधानसभा चुनाव साल 2017 में हुए थे. चुनाव के नतीजे आने के साथ ही कांग्रेस ने 'सिंगल लार्जेस्ट पार्टी' होने का दावा किया था और राज्यपाल को सरकार बनाने की पेशकश की थी. संख्या तो कांग्रेस के पास थी, लेकिन राज्यपाल ने भाजपा को सरकार बनाने के लिए बुला लिया. तब से लेकर अब तक कांग्रेस कई बार गोवा विधानसभा में सरकार बनाने का दावा पेश कर चुकी है, जिसे हर बार राज्यपाल ने खारिज किया है.
वीडियो: स्कूटर वाले सीएम पर्रिकर ने बताया था, मैं अब स्कूटर चलाने से बचता हूं




















