6 रंग वाला 'फ्रीडम फ्लैग' (रेनबो वाला झंडा) गिल्बर्ट बेकर ने बनाया था. 65 साल के गिल्बर्ट की 31 मार्च 2017 को नींद में मौत हो गई. दुनिया भर में LGBT समुदाय और मूवमेंट से जुड़े लोग शोक में है. आइए जानते हैं क्यों खास है LGBT का ये झंडा और कौन थे इसे बनाने वाले गिल्बर्ट बेकर.
क्यों खास है ये झंडा
LGBT की पहचान बन चुके इस झंडे में अब 6 रंग हैं. इसे बनाए जाते समय इसमें 8 रंग थे. इन सभी रंगों का खास मतलब है और इनमें से जो रंग हटाए गए हैं उनके पीछे भी रोचक कहानी है.शुरुआत में इसमें ये आठ रंग थे और इनका मतलब था-
गुलाबी - सेक्सुअलटीगुलाबी रंग को झंडे से इसलिए हटाना पड़ा क्योंकी उस दौर में हॉट पिंक कलर का कपड़ा बहुत महंगा पड़ता था. और बड़े स्तर पर झंडे के प्रोडक्शन में इससे दिक्कत आ रही थी. इसके बाद झंडे में सात रंग रह गए थे. जिससे झंडे को बीच से दो हिस्सों में बांटना संभव नहीं था. इसके चलते फ्लैग को कई डिज़ाइन्स में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता था. इसके बाद झंडे से फिरोज़ी रंग भी हटा दिया गया और नीले रंग को भी बदल कर गहरा कर दिया गया. फाइनली 6 रंगों के साथ इस्तेमाल होने वाला ये झंडा दुनिया भर में पॉपुलर हुआ. फ्रीडम फ्लैग अब दुनिया के सबसे ज़्यादा प्रसिद्ध सिंबल्स में से एक है.
लाल - ज़िंदगी
नारंगी - देख-भाल
पीला- धूप
हरा - प्रकृति
फिरोज़ी - कला
नीला- भाईचारा
बैंगनी - मानवता
फौज से रिटायरमेंट, झंडा बनाना और दोस्त की हत्या
गिलबर्ट ने दो साल अमेरिकन आर्मी में नौकरी की. इसके बाद डिस्चार्ज लेकर सैनफ्रांसिस्को में रहने लगे. 70 के दशक में सैनफ्रांसिस्को में युद्ध विरोधी और गे प्राइड मूवमेंट शुरू हुआ था. गिलबर्ट के दोस्त हार्वे मिल्क इस आंदोलन के नेताओं में से एक थे. गिलबर्ट हार्वे के साथ आंदोलन में शामिल हो गए.फौज छोड़ने के बाद गिलबर्ट ने टेलरिंग सीखी थी. हार्वे मिल्क को इस आंदोलन के लिए एक प्रतीक चाहिए था. गिल्बर्ट ने अपनी टेलरिंग के हुनर का इस्तेमाल करते हुए उनके लिए कई बैनर और 8 रंगों वाला ये रेनबो झंडा बनाया. शुरू में हार्वे ने इस डिज़ाइन को रिजेक्ट कर दिया. गुलाबी त्रिकोण, नाज़ी बैंड से मिलता जुलता गे बैंड और ग्रीक सिंबल लैम्डा का भी आइडिया दिया गया था. मगर अंत में ये झंडा ही फाइनल हुआ. इसी आंदोलन के चलते बेकर के दोस्त हार्वे मिल्क 'ऑफिस ऑफ कैलीफोर्निया' में चुने गए पहले गे व्यक्ति बन गए. कुछ ही समय बाद 1978 में हार्वै मिल्क की हत्या हो गई. मगर ये झंडा आंदोलन के प्रतीक के तौर पर पॉपुलर हो गया.
दुनिया भर में लोकप्रियता और रोचक बातें
दुनिया भर में जहां भी LGBT समुदाय की बात होती है, ये रेनबो इस्तेमाल होता है. इसके अलावा वाइट हाउस, आइफिल टॉवर, एम्पायर स्टेट और ओपेरा हाउस जैसी दुनिया की तमाम बड़ी इमारतों को रेनबो लाइट्स में रौशन किया जा चुका है. इस झंडे के साथ कई और रोचक बातें भी जुड़ी हैं.# पेरू के शहर कुस्को का झंडा भी फ्रीडम फ्लैग जैसा ही है.

# हिंदुस्तान के मेहर बाबा के झंडे को देख कर भी फ्रीडम फ्लैग का धोखा होता है.

मेहर बाबा का झंडा
# अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के विवादास्पद बयानों का विरोध करने के लिए झंडे की एक पट्टी को काला कर दिया गया था.

ट्रंप के विरोध में फ्रीडम फ्लैग.
# पाकिस्तान के गे ऐक्टिविस्ट्स के पास एक अलग झंडा भी है.

पाकिस्तानी गे फ्लैग.
गे राइट्स के लिए खुद भी काफी एक्टिव थे बेकर
गिल्बर्ट बेकर गे राइट्स मूवमेंट को लेकर काफी सक्रिय रहे. वो खुद भी ड्रैग क्वीन के नाम से प्राइड परेड में हिस्सा लेते रहे. फ्रांस, वेनेजुएला और फिलीपीन्स जैसे देशों के राष्ट्रपतियों के लिए भी उन्होंने रेनबो की डिज़ाइन्स बनाई. 2002 में न्यूयॉर्क के मेयर के साथ ये बेकर हैं.

2002 में बेकर न्यूयॉर्क के मेयर के साथ. फोटो- रॉयटर्स

बेकर व्हाइट हाउस में ओबामा के साथ. फोटो- न्यू सिविल राइट मूवमेंट
ये स्टोरी अनिमेष ने की थी।
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