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ट्रंप पर हमला करने वाले का पुतिन से क्या कनेक्शन है?

शुरुआती जांच में पता चला है कि संदिग्ध हमलावर रूस और पुतिन का कट्टर विरोधी हैं. ट्रंप ने कहा था कि अगर वो राष्ट्रपति बने तो यूक्रेन को भेजी जानी वाली मदद कम कर सकते हैं. क्या ट्रंप पर हमले का इससे कोई लिंक जुड़ रहा है?

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13 सितंबर, 2024 को कैलिफोर्निया के ट्रम्प नेशनल गोल्फ़ क्लब में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (फ़ोटो-AFP)

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप पर एक और जानलेवा हमला हुआ है. 13 जुलाई को पेन्सिल्वेनिया में एक रैली के दौरान ट्रंप पर गोली चली थी. गोली उनके कान को छूकर निकल गई थी. अबकी दफ़ा हमले की कोशिश फ़्लोरिडा में हुई. उनके गोल्फ़ क्लब में. इस बार सीक्रेट सर्विस ने हमलावर को पहले ही देख लिया. जवाबी फ़ायरिंग की. हमलावर घबरा कर वहां से भाग गया. हालांकि, वो बाद में पकड़ा गया. उसकी पहचान रयान वेजली रुथ के तौर पर हुई है. उम्र 58 साल. रयान ने 2023 में यूक्रेन जंग में लड़ने की इच्छा जताई थी.

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डॉनल्ड ट्रंप ना सिर्फ़ अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति हैं, बल्कि वो दो महीने बाद फिर से राष्ट्रपति बन सकते हैं. इसलिए, इस हमले के बाद एक बार फिर राजनीतिक हिंसा पर बहस शुरू हो गई है. आइए समझते हैं, ट्रंप पर जानलेवा हमले की पूरी कहानी. अमेरिका में राजनीतिक हिंसा क्यों बढ़ रही है? और, इस हमले का राष्ट्रपति चुनाव पर क्या असर पड़ेगा?

कब क्या हुआ?

- 15 सितंबर की दोपहर डॉनल्ड ट्रंप अपने गोल्फ़ क्लब पहुंचे. ट्रंप इंटरनैशनल गोल्फ़ क्लब. ये फ़्लोरिडा के पाम बीच पर है. ट्रंप के मार-ए-लागो वाले घर से 15 मिनट की दूरी पर.
- दोपहर एक बजे के आसपास ट्रंप ने गोल्फ़ खेलना शुरू किया. अमेरिका में मौजूदा और पूर्व राष्ट्रपतियों की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी सीक्रेट सर्विस के पास होती है. पद के अनुसार सुरक्षा का स्तर घटता-बढ़ता रहता है. ट्रंप को पूर्व राष्ट्रपति वाली सुरक्षा मिली हुई है. हालांकि, 13 जुलाई के हमले के बाद एजेंट्स की संख्या बढ़ाई गई थी.
- 15 सितंबर के रोज़ एजेंट्स ने पूरे गोल्फ़ क्लब की रेकी की थी. कुछ एजेंट्स ट्रंप से आगे चल रहे थे. ताकि आगे की जगह का मुआयना कर सकें. इसी दौरान एक एजेंट को झाड़ियों से बंदूक की नली दिखाई दी. उसने फौरन हमलावर को इंगेज किया. उसका ध्यान बंटाने के लिए फ़ायरिंग की. बाकी एजेंट्स ने ट्रंप को सुरक्षा घेरे में ले लिया.  बाद में पाम बीच के शेरिफ़ ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में सिलसिलेवार कहानी बताई. कहा ,  

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दोपहर डेढ़ बजे हमारे पास एक कॉल आई. सीक्रेट सर्विस ने कहा कि गोलियां चली हैं. जैसे ही हमें जानकारी मिली, हमने अपनी यूनिट्स को रवाना किया. फिर उन्होंने एरिया को सील कर दिया. सौभाग्यवश, हमें एक प्रत्यक्षदर्शी मिल गया. उसने बताया, ‘मैंने संदिग्ध को झाड़ियों से भागते हुए देखा. वो एक काले रंग की निसान कार में था. मैंने गाड़ी और टैग की तस्वीर उतारी है.’ हम उस गाड़ी को I-95 पर पकड़ने में कामयाब रहे, जब वो मार्टिन काउंटी की तरफ़ जा रही थी. हमने मार्टिन काउंटी के शेरिफ़ से संपर्क किया. उनको अलर्ट किया. उन्होंने कार पकड़ी और संदिग्ध को हिरासत में ले लिया. झाड़ियों में हमें दूरबीन वाली एक एके-47 स्टाइल राइफ़ल मिली. फ़ेंस पर दो बैग्स टंगे थे, उनमें सीरामिक टाइल्स रखीं थीं. एक गो प्रो कैमरा भी था, जिससे वो तस्वीरें खींचने वाला था. सीक्रेट सर्विस का एक एजेंट पूर्व राष्ट्रपति से एक होल आगे चल रहा था. उसने फ़ेंस से निकली राइफ़ल की नली देख ली. फिर तुरंत उस पर फ़ायरिंग की. इसके बाद वो हमलावर वहां से भाग गया.

हमलावर कौन है?

संदिग्ध हमलावर घटनास्थल से लगभग 70 किलोमीटर दूर पकड़ा गया. उसका नाम रयान रुथ बताया जा रहा है. उम्र 58 साल है. मूल रूप से उत्तरी कैरोलाइना का रहने वाला है. 2017 में वो हवाई शिफ्ट हो गया था. वो अपने बेटे के साथ घर बनाने का काम करता है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, हवाई में उसने कई बेघर लोगों के लिए घर बनाए थे. पिछले कुछ बरसों में रयान का राजनीतिक झुकाव जो बाइडन और कमला हैरिस की तरफ़ हुआ था. 2024 में उसने डेमोक्रेटिक पार्टी के प्राइमरी इलेक्शन में भी वोट डाला था.

Ryan Routh
तस्वीर 17 मई, 2022 की है.  यूक्रेन की राजधानी कीव.  रैली में खड़ा एक शख़्स. रैली में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से यूक्रेनी सैनिकों के लिए एक्सट्रैक्शन प्रोसेस शुरू करने और यूक्रेनी सैनिकों को बचाने की मांग की जा रही थी.  अब FBI ने इसी शख़्स को पूर्व राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप पर हमले का संदिग्ध आरोपी बताया है.  (फ़ोटो-Reuters) 

कुछ समय पहले रयान ने एक्ट ब्लू नाम के एक संगठन को दान भी दिया था. ये संगठन डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों का समर्थन करता है. दिलचस्प बात ये है कि 2016 में रयान ने ट्रंप को वोट दिया था. मगर 2020 में वो डेमोक्रटिक पार्टी का समर्थक बन गया. रयान के बारे में एक और रोचक बात जान लीजिए, 13 जुलाई को पेन्सिल्वेनिया में ट्रंप पर जो हमला हुआ था, उस पर भी रयान ने पोस्ट किया था. उसने लिखा था कि ट्रंप की रैली में घायल लोगों से मिलने कमला और बाइडन को अस्पताल जाना चाहिए.

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अमेरिकी मीडिया से बात करते हुए रायन के बेटे ओरान ने कहा कि मेरे पिता ऐसा काम नहीं कर सकते. वो हिंसा से दूर रहने वाले शख्स हैं. चीज़ों को बहुत बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया जा रहा है.

रयान को जानिए 

- वो जियोपॉलिटिक्स और अमेरिका की राजनीति पर खूब लिखता था.
- उसने फ़ेसबुक पर फ़िलिस्तीन और ताइवान के समर्थन में पोस्ट किए हैं.
- वो चीन की भी आलोचना करता था. उसने कोविड के लिए चीन को ज़िम्मेदार बताया है. उसने कोविड को चीन का बायोलॉजिकल वॉरफ़ेयर बताया था.
- रयान को रूस और पुतिन का भी कट्टर विरोधी बताया जा रहा है. वो यूक्रेन पर रूसी आक्रमण का विरोधी है.
- 2023 में रयान ने अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया था कि वो 2022 में यूक्रेन गया था. ताकि अफ़ग़ान सैनिकों को यूक्रेन की तरफ़ से लड़ने के लिए भेज सके. उसने फ़ेसबुक पोस्ट में लड़ाकों से अपने पासपोर्ट की कॉपी भी भेजने के लिए कहा था.
- रयान, अमेरिकी कांग्रेस से युद्ध के लिए यूक्रेन को पैसे और हथियार भेजने का भी आग्रह भी कर चुका है.
- इन सबके अलावा, उसने यूक्रेन जंग के लिए फ़ंड जुटाने के लिए वेबसाइट भी बनाई थी.

साल 2022 में यूक्रेन की राजधानी किएव में रयान न्यूज़ एजेंसी AFP के कैमरे में भी क़ैद हुआ था. उसने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को आतंकवादी कहा था. कहा, 

पुतिन एक आतंकवादी हैं, और उनका ख़ात्मा होना चाहिए. हम चाहते हैं कि पूरी दुनिया मिलकर यूक्रेनियों को समर्थन दें और इस जंग को रोके.

- अमेरिकी न्यूज़ चैनल CBS की रिपोर्ट के मुताबिक रयान का आपराधिक रिकॉर्ड भी रह चुका है. 2002 से 2010 के बीच उत्तरी कैरोलाइना में कई मामलों में दोषी ठहराया जा चुका है.

इस घटना पर क्या रिएक्शन आए?

गोलीबारी के बाद डॉनल्ड ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर सीक्रेट सर्विस का शुक्रिया अदा किया. लिखा, मुझे अमेरिकी होने पर बहुत गर्व है!

अमेरिका की उप-राष्ट्रपति और डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार कमला हैरिस ने प्लेटफोर्म X पर लिखा, ट्रंप सुरक्षित हैं, ये अच्छी बात है. अमेरिका में राजनीतिक हिंसा की कोई जगह नहीं होनी चाहिए.
 

राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा, हमलावर को हिरासत में ले लिया गया है. सीक्रेट सर्विस ने अपना काम अच्छी तरह किया. उनकी वजह से ट्रंप सुरक्षित हैं.
 

फ़्लोरिडा के गवर्नर रॉन डि सेंटिस ने कहा, लोगों को इस घटना की सच्चाई जानने का हक़ है. इसलिए फ़्लोरिडा राज्य इस घटना की जांच करवाएगा.

नेताओं के अलावा, टेस्ला और एक्स के मालिक एलन मस्क के रिएक्शन ने सबका ध्यान खींचा. उन्होंने X पर एक यूजर को कोट करते हुए लिखा कि कोई बाइडन और कमला को मारने की कोशिश नहीं करता है. इस पर मस्क की खूब आलोचना भी हुई.

इसके अलावा रिपब्लिकन और डेमोक्रटिक दोनों पार्टियों ने इस घटना की निंदा की. कहा कि अमेरिका में राजनीतिक हिंसा की कोई जगह नहीं होनी चाहिए. लेकिन ये अमेरिका का एक कड़वा सच है. अमेरिका का इतिहास राजनीतिक हिंसा से भरा रहा है. उदाहरण से समझिए

अमेरिका में राजनीतिक हिंसा का इतिहास

अमरीका में अब तक चार राष्ट्रपतियों की पद पर रहते हुए हत्या हो चुकी है. 1865 में अब्राहम लिंकन. 1881 में जेम्स गारफ़ील्ड. 1901 में विलियम मैक्किन्ली और 1963 में जॉन एफ़ केनेडी. केनेडी की हत्या के बाद राष्ट्रपति को खुली गाड़ी में घूमने पर रोक लगा दी गई. इसके अलावा, कई राष्ट्रपतियों पर जानलेवा हमले हो चुके हैं.

पिछले 43 बरसों तक अमेरिका में किसी मौजूदा या पूर्व राष्ट्रपति पर हमला नहीं हुआ था. फिर 13 जुलाई 2024 को ट्रंप पर गोली चली. वो बाल-बाल बचे थे. गोली उनके कान को छूकर निकल गई. उस समय खून से लथपथ ट्रंप ने मुट्ठी भींचकर ‘फ़ाइट, फ़ाइट’ कहा. इसको ट्रंप के पॉलिटिकल स्टेटमेंट की तरह देखा गया. उसके बाद कुछ हफ्ते तक ट्रंप की रेटिंग ऊपर रही. ट्रंप पर हमला करने वाले संदिग्ध को सीक्रेट सर्विस के एजेंट्स ने वहीं पर मार गिराया था. 13 जुलाई को हमलावर ने ट्रंप को क्यों मारना चाहा, इसकी वजह पता भी नहीं चल पाई थी कि उनके ऊपर दूसरा हमला होते होते बचा. अगर सीक्रेट एजेंट्स बंदूक की नाल नहीं देखते तो ट्रंप पर गोली चल सकती थी. उस वक्त ट्रंप और हमलावर की दूरी पांच सौ मीटर से भी कम थी.

अमेरिका में गन वॉयलेंस इतना आम क्यों?

दरअसल, अमेरिकी संविधान ने नागरिकों को अपनी रक्षा के लिए बंदूक रखने का अधिकार दिया गया है. बंदूक खरीदने के लिए मामूली बैकग्राउंड चेक से गुज़ारना पड़ता है. इंस्टेंट बैकग्राउंड चेक में नाम, पता, जन्म-स्थान, नस्ल और नागरिकता जांची जाती है. वॉलमार्ट जैसे सुपर-स्टोर से लेकर केन्स स्पोर्टिंग गुड्स ऐंड लिकर स्टोर जैसे फ़ैमिली स्टोर्स तक बंदूकें बेचीं जाती हैं.

इसी वजह से अमेरिकियों के लिए बंदूक की पहुंच इतनी आसान बन चुकी है. कितनी आसान? आंकड़ों से समझिए,
- लगभग एक-तिहाई अमेरिकी नागरिकों के पास बंदूकें हैं.
- अमेरिका की कुल आबादी दुनिया का चार फीसदी है. लेकिन दुनिया में जितने बंदूक आम नागरिकों के पास हैं, उनका 46 फीसदी हिस्सा अमेरिका में रहता है.
- बाक़ी दुनिया छोड़िए, ख़ुद अमेरिका की सेना भी अमेरिकी नागरिकों के पीछे है. अमेरिका के लोगों के पास अमेरिकी सेना की तुलना में लगभग 100 गुना ज़्यादा हथियार हैं. और, क़ानूनी एजेंसियों की तुलना में लगभग 400 गुना ज़्यादा. 

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