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क्या-क्या करना चाहिए पाकिस्तान के नए कोच को?

पाकिस्तान क्रिकेट टीम के नए कोच बने हैं मिकी आर्थर. साउथ अफ़्रीका से हैं. उन्हें आने के बाद क्या-क्या करना चाहिए? बताते हैं.

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फोटो - thelallantop
मिकी आर्थर पाकिस्तान क्रिकेट टीम के नए कोच बन गए हैं. पाकिस्तान के 2016 टी-20 वर्ल्ड कप से बाहर होने के बाद मची उथल-पुथल का नतीजा. वक़ार यूनिस ने हाल ही में इस्तीफ़ा दिया था. कोच के तौर पे मिकी आर्थर और टीम के तौर पे पाकिस्तान, इन दोनों का ही विवादों से साथ कभी भी नहीं छूटा है. 2013 का ऑस्ट्रेलिया का इंडियन टूर. ऑस्ट्रेलियाई टीम के कोच थे मिकी आर्थर. टूर के दौरान कहा गया कि ये टीम इंडिया जाने वाली अब तक की सबसे कमज़ोर कंगारू टीम है. साबित भी वही हुआ. इंडिया 4-0 से टेस्ट सीरीज़ जीती. टेस्ट सीरीज़ के दौरान एक विवाद खड़ा हुआ. तीसरे टेस्ट में शेन वाटसन, जेम्स पैटिनसन, उस्मान ख्वाजा और मिशेल जॉनसन को टीम से निकाल दिया गया. उन्हें मैच में नहीं खेलने दिया गया. हुआ ये था कि कोच मिकी आर्थर ने टीम के हर एक खिलाड़ी को होमवर्क दिया था. होमवर्क था कि उन सभी को अपनी और टीम की परफॉरमेंस सुधारने पर विचार करते हुए अपने-अपने पॉइंट्स लिख कर लाने थे. जिस पर बाद में टीम मीटिंग्स के दौरान डिस्कशन होना था. इन चार प्लेयर्स ने ऐसा नहीं किया. उन्हें अगले मैच में नहीं खिलाया गया. ऑस्ट्रेलिया मीडिया में इस बात पर काफी हाय-तौबा मची. टीम अपने घर पहुंची तो मिकी को कोच के पद से हटा दिया गया. फिर पहुंचे डैरेन लेहमैन. Untitled-2 मिकी ने साउथ अफ्रीका को भी कोचिंग दी है 2005 से 2010 तक. उन्होंने अफ़्रीका को उसके चरम तक पहुंचाया. उनकी कोचिंग में साउथ अफ़्रीकी टीम दुनिया की नम्बर एक टीम बनी, ऑस्ट्रेलिया को पहली बार उसी के घर में हराया, 40 साल में पहली बार इंग्लैंड में सीरीज़ जीती. लेकिन वहां भी ग्रीम स्मिथ के साथ बिगड़ते संबंधों के चलते उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ा. उनका नाम आज भी साउथ अफ़्रीका के अब तक के सबसे बेहतरीन कोचों में दर्ज है. Untitled-1 अब वो पाकिस्तान की टीम को कोच करेंगे. कई सालों से, पाकिस्तान की टीम को कोच और मैनेज करना क्रिकेट की दुनिया का सबसे मुश्किल काम रहा है. ऐसा करते हुए आप एक ही वक़्त पर आग से झुलस रहे होते हैं और पानी में डूब रहे होते हैं. ऐसे में कुछ बातें हैं जिनपर मिकी को फ़ोकस करना चाहिए: 1. खेल की राजनीति और राजनीति का खेल: पाकिस्तानी खेल में हमेशा ही राजनीति खेली जाती रही है. फिर वो चाहे खिलाड़ियों के बीच हो खेल के हुक्मरानों के बीच या हुक्मरानों और खिलाड़ियों के बीच. हाल ही में डोमेस्टिक क्रिकेट खेलते हुए यूनुस खान टूर्नामेंट बीच में ही छोड़कर घर वापस चले गए. पाकिस्तान टी-20 लीग में कुछ खिलाड़ी आपस में भीड़ पड़े. सीनियर खिलाड़ियों को नए खिलाड़ियों से वो ट्रीटमेंट नहीं मिलता जिसकी वो अपेक्षा करते हैं. ऐसे में टीम के अन्दर तापमान में गिरावट लाना और आपस में एक बॉन्डिंग बनाना उनका पहला लक्ष्य होना चाहिए. सीनियर और जूनियर खिलाड़ियों के बीच बढ़ती खाई को तो उन्हें ज़रूर ही पाटना होगा. ऐसे में उन्हें नए नवेले सेलेक्टर बने इंज़माम उल हक़ की मदद लेनी चाहिए. इंजी भाई का पाकिस्तानी क्रिकेट में न केवल दबदबा है बल्कि खिलाड़ियों के बीच उनकी इज़्ज़त भी है.
2. मोहम्मद आमिर: अभी अभी इंटरनेशनल क्रिकेट में वापसी की है. जेल में वक़्त काटने के बाद. टीम में वापस आते ही आमिर को कैम्प में ही प्लेयर्स के गुस्से का सामना करना पड़ा था. हालांकि बाद में उन्हें न्यूज़ीलैंड दौरे के लिए ले जाया गया, जहां उन्होंने अच्छा कक्रिकेट खेला. एशिया कप में तो उन्होंने झंडे गाड़ दिए. साथ ही टी-20 क्रिकेट में भी खूब नाम कमाया. ऐसे में उन्हें भरपूर मदद की ज़रुरत है. एक कोच और कोच से ज़्यादा एक गार्जियन की. जो उन्हें ढंग से फिर से एक आकर डे सके. जिससे कि वो वही पुराने मोहम्मद आमिर बन सकें जिसे कभी दुनिया का अगला वसीम अकरम कहा जा रहा था.
3. टीम कंडीशनिंग: एक-दो प्लेयर्स को छोड़ दें तो पाकिस्तानी टीम हमेशा ही स्लो-साइड मानी गयी है. कूद-फांद में पिछड़ी हुई टीम मेंटली भी अनकंडीशंड देखि गयी है. विकेटों के बीच में दौड़ना हो या ड्रेसिंग रूम और अंदरूनी माहौल को बनाना हो, इस टीम को हमेशा मुश्किलें आई हैं. ऐसे में मिकी आर्थर को कैसे भी इन चीज़ों के बीच में बैलेंस बिठाना होगा. टीवी के डिबेट्स से लेकर टीम मीटिंग्स और मैदान के ऊपर तक प्लेयर्स को मेंटली साउंड होना निहायती ज़रूरी है. इस कंडिशनिंग का मिकी को खास तौर पर ध्यान रखना ही होगा. टीम ला एक बहुत बड़ा हिस्सा नया है. ऐसे में उन्हें उनके शुरुआती दौर में ही सही ढंग से तैयार नहीं किया तो आने वाले वक़्त में नए स्टिंग ऑपरेशन्स के आसार बढ़ते दिखते हैं.
4. इंटरनेशनल रिलेशनशिप: आज के वक़्त में जब मिकी आर्थर पाकिस्तानी कोच की कुर्सी पर बैठेंगे, तो पाकिस्तान के पास एक प्रतिनिधि के तौर पर मिकी से बेहतर और कोई ऑप्शन नहीं होगा. मिकी के सहारे वो पाकिस्तान में सालों से बंद पड़े इंटरनेशनल क्रिकेट को दोबारा शुरू करने की कोशिश कर सकते हैं. इस वक़्त इंटरनेशनल क्रिकेट का पाकिस्तान में वापस आना वैसा ही होगा जैसे किसी दम घुंटने से मरने वाले इंसान को ऑक्सीजन मास्क लगा दिया जाए. पाकिस्तान में क्रिकेट को दोबारा जिलाए जाने की सख्त ज़रुरत है. इसमें मिकी आर्थर ब्लेसिंग-इन-डिसगाइस साबित हो सकते हैं. और उन्हें भरपूर कैश कराया जाना चाहिए.
5. अफ़रीदी: मिकी आर्थर चाहें तो अफ़रीदी की असली उमर के राज़ से पर्दा उठा सकते हैं. आज के वक़्त में मानवता के प्रति उनका इतना तो कर्तव्य बनता ही है. उन्हें चाहिए कि शाहिद अफ़रीदी की असली उम्र बताकर बरमूडा ट्रायंगल के राज़ को फिर से दुनिया के सबसे बड़े राज़ के रूप में नम्बर एक पर काबिज हो जाने दें.

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