
टॉम की प्रोफाइल छोटी-मोटी नहीं है. काफी वजनी CV है उनका. 15 साल लंबा करियर और इतनी शोहरत.
बेटी और मोबाइल ने टॉम को पकड़वाया टॉम हमफ्राइज. आयरलैंड की खेल पत्रकारिता का बड़ा नाम. बहुत बड़ा कद था उनका. द आयरिश टाइम्स में लिखा करते थे. 15 साल लंबा करियर. दुनिया के बड़े-बड़े अखबारों में उनका लिखा छपता. कई अवॉर्ड मिले उनको. नाम, पैसा सब था टॉम के पास. ये ही टॉम अब जेल की सजा काट रहा हा. टॉम ने एक नाबालिग लड़की का रेप किया. मार्च 2011 में केस शुरू हुआ. इतने साल बाद केस का फैसला आया है. ढाई साल की जेल हुई है टॉम को. न केवल जेल हुई, बल्कि नाम, शोहरत, सब छिन गया. ये सब मुमकिन हुआ टॉम की अपनी बेटी के कारण. और एक मोबाइल फोन के कारण.
टॉम ने खुदकुशी की कोशिश की, लेकिन बच गए हुआ यूं कि टॉम की बेटी घर के पुराने मोबाइल फोन्स को डोनेट कर रही थी. माने, दान में दे रही थी. तो टॉम ने भी अपना एक पुराना फोन बेटी को दे दिया. डोनेट करने के लिए. बेटी ने फोन ऑन किया. उसको अपने पापा के फोन में एक मैसेज दिखा. जिसे ये भेजा गया था, उसका नाम भी फोन में सेव था. असली नाम से नहीं. किसी बनावटी से नाम से. मैसेज बड़ा उस टाइप का था. उस माने सेक्स की बातें. उसने अपनी मां और मामा को वो मैसेज दिखाया. उन दोनों ने टॉम से पूछा. क्या है माजरा? टॉम घबरा गया. घबराहट में आत्महत्या करने की कोशिश की. अस्पताल में भर्ती कराया गया. वहां दोबारा खुदकुशी करनी चाही उसने. बच गया मगर. टॉम के परिवार का शक गहरा हो गया. उन्होंने टॉम का वो फोन पुलिस के हवाले कर दिया.

टॉम और उनकी पत्नी अलग हो गए थे. इस घटना के पहले ही उनका अलगाव हो गया था.
लड़की ने कहा: टॉम का परिवार न होता, तो इंसाफ नहीं मिलता जांच से पता चला. इतने नामी इंसान का असली चेहरा. 2008 में टॉम एक नाबालिग लड़की से मिला. एक जूनियर क्लब में. वहां उसने लड़की का नंबर ले लिया. उसको अक्सर मैसेज करने लगे. वैसे ही. जिनमें हिंट होता है. सेक्स की बातें होती हैं. इस लड़की को कुल 16,000 मैसेज भेजे टॉम ने. टॉम इतने पर ही नहीं रुका. अपने लिंग की तस्वीरें खींचता और लड़की को भेजता. फिर बात और आगे बढ़ गई. टॉम उस लड़की के स्कूल पहुंच गया. वहीं बाहर उससे मिला. उसको अपने घर ले आया. वहां उसके साथ ओरल सेक्स किया. उस वक्त लड़की की उम्र 16 साल थी. टॉम की 47 साल. टॉम अब जेल की सलाखों के पीछे है. उस लड़की ने टॉम के परिवार को शुक्रिया कहा. बोली, वो न होते तो मुझे इंसाफ नहीं मिलता. एक और बात है. जो हम बोल रहे हैं. कि हर किसी के बस की बात नहीं. अपनों के खिलाफ जाकर गलत को गलत कहना. उसे सजा दिलाना.
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