कौन थी एलिज़ाबेथ?
एलिज़ाबेथ बाथरी हंगरी की रहने वाली थीं. वहां के राजघराने से तालुकात रखती थी. उनकी शादी फेरेंक नैड़ेस्डी नामक व्यक्ति से हुई थी. फेरेंक तुर्कों के खिलाफ युद्ध में हंगरी के हीरो थे. एलिजाबेथ अपने पति के सामने भी निर्दोष लड़कियों का खून बहाने से नहीं हिचकती थी. कुंवारी लड़कियों का खून करना उसका शौक था. इस वहशी महिला ने सन 1585 से 1610 के बीच करीब 600 से ज्यादा कुंवारी लड़कियों का खून बहा दिया. इसीलिए इसे दुनिया की सबसे खतरनाक और वहशी सीरियल किलर के रूप में जाना जाता है.

एलिज़ाबेथ बाथरी (विकिपीडिया)
कुंवारी लड़कियों को क्यों प्रताड़ित करती थी ये महिला?
एलिजाबेथ अपनी खूबसूरती को बरकरार रखना चाहती थी. कहा जाता है कि उसे किसी ने कुंवारी लड़कियों के खून से नहाने की सलाह दी थी. और एलिजाबेथ को ये तरीका पसंद आ गया. इसके लिए वो क्रूरता की हद पार करने से भी नहीं चूकी. कई बार तो ऐसा होता था कि वो लड़कियों के चेहेरे और शरीर के दूसरे अंगों का मांस दांतों से निकाल देती थी. उसे बुरी तरह प्रताड़ित कर लड़कियों के हत्या करने में मज़ा आता था. वो लड़कियों को मारने के बाद उनके खून को बाथटब में इकट्ठा कर घंटो नहाया करती थी. इस काम में उसके तीन नौकर भी उसकी मदद करते थे.
महल में आकर वापस नहीं जा पाती थीं लड़कियां
एलिजाबेथ अपने शिकार के लिए आसपास के गांव से गरीब लड़कियों को बुलाती थी. वह इतनी रसूख वाली थी कि कोई उसे मना भी नहीं कर पाता था. महल में आने के बाद किसी का वापस लौट जाना नामुमकिन था. लडकियां एलिजाबेथ के जाल में फंस जाती थी. और उसके पागलपन का शिकार हो जाती थी.
लोगों को कैसे पता चला?
एलिजाबेथ का पागलपन जारी रहा. धीरे धीरे आसपास के लोगों का ध्यान लड़कियों की कम होती संख्या पर गई. इसी बीच कुछ लड़कियां एलिजाबेथ के महल से बच निकलने में सफल रहीं. उन्होंने गांव के लोगों को एलिजाबेथ की असलियत बताई. गांव वाले उन लड़कियों की बातें सुनकर हैरान रह गए.
कैसे हुई गिरफ्तारी?
गांव वालों ने एलिजाबेथ की शिकायत करने का फैसला किया. वे हंगरी के राजा के पास गए. और उसे गिरफ्तार करने की गुहार लगाई. गांव वालों की बात सुन कर राजा ने सच्चाई पता करने का आदेश दिया. जब जांच दल महल पहुंचा तो अवाक रह गया. महल में लड़कियों की लाशें बेडि़यों में बंधी थी. कुछ जिंदा लड़कियां भी थी. जिन्हें बुरी तरह टॉर्चर किया गया था. एलिजाबेथ और तीनों नौकरों को गिरफ्तार कर लिया गया. उसके तीनों नौकरों को फांसी की सजा दी गई. शाही परिवार से होने के कारण एलिजाबेथ को फांसी तो नहीं हुई. लेकिन एक कमरे में बंद कर दिया गया. उसी कमरे में 21 अगस्त 1614 को उसने आखिरी सांसे ली.
यह स्टोरी हमारे साथ इंटर्नशिप कर रहे बबली ने की है.
























