केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) के नतीजे जारी कर दिए हैं. इस परीक्षा में बिहार की कल्पना कुमारी ने पहला स्थान हासिल किया है, जिन्हें 99.99 पर्सेंटाइल मिले हैं. उन्हें 720 अंक के पेपर में कुल 691 अंक मिले, यानी 96 पर्सेंट.
तो ऐसा कैसे हो गया कि 96 पर्सेंट 99.99 परसेंटाइल हो गया?
# परसेंट:
प्रतिशत, परसेंट, फ़ीसदी. जैसा कि नाम से ही ज़ाहिर है हर सौ में से कितना? होने को इस प्रतिशत के बारे में ज़्यादा जानकारी देने की ज़रूरत इसलिए नहीं पड़ती क्यूंकि निन्यानवे प्रतिशत लोग इस प्रतिशत के विषय में पहले से ही जानते होंगे. लेकिन फिर भी, सारे कन्फ्यूजन मिटाने के लिए एक बार समझ लेते हैं: यदि आपके हाई स्कूल में T (टोटल) में से M (मार्क्स ऑब्टेंड) मार्क्स आए हैं तो इसका मतलब ये कि आपके सौ में से - (M*100)/T मार्क्स आए हैं. और यही '(M*100)/T' आपके प्रति-शत या प्रतिशत हैं.
यानी यदि आपके 500 में से 400 मार्क्स आए हैं तो आपके (400*100)/500 या 80% अंक हुए.
# रैंकिंग:
ऊपर प्रतिशत की परिभाषा से हम समझ ही गये हैं कि प्रतिशत एक बहुत निजी चीज़ है, जबकि रैंकिंग सामजिक. प्रतिशत एक बंदे की होगी, जबकि रैंकिंग में हमें कम से कम दो लोग चाहिए होंगे ताकि तुलना की जा सके. यह तुलना अंकों से भी हो सकती है और प्रतिशत से भी. जिसके जितने ज़्यादा अंक उसके उतने अधिक प्रतिशत और उसकी उसकी उतनी ऊंची रेंकिंग. तो ऊपर के ही उदाहरण को बढ़ाते हुए माना आपकी हाई-स्कूल वाली क्लास, जिसमें आपके 80% थे, में चार और बंदे हैं और बाकियों का प्रतिशत क्रमशः 100%, 60%, 40%, और 20% तो रैंकिंग हुई इस तरह -
100% - प्रथम रैंक 80% - द्वितीय रैंक - आपकी रैंक 60% - तृतीय रैंक 40% - चतुर्थ रैंक 20% - पंचम रैंक
तो इस तरह आपकी रैंकिंग हुई द्वितीय.
# पर्सेंटाइल
अब ऊपर के उदाहरण से ये बताइए कि आपके नीचे कितने लोग हैं? उत्तर रहेगा - तीन लोग. अच्छा ये बताइए कि कितने प्रतिशत लोग नीचे हैं - तो उत्तर रहेगा कि जितने लोग नीचे हैं उसे कुल जितने लोगों ने कंपटीशन में भाग लिया से से डिवाइड करके उसे सौ से गुना कर लो. (परसेंट की यही तो परिभाषा और फार्मूला है.) और इसका जो फल आएगा वही पर्सेंटाइल है मित्रों! और आसानी से समझें तो -
जितने प्रतिशत लोग आपने नीचे, उतना आपका पर्सेंटाइल. और अगर फोर्मुले की बात करें तो -
पर्सेंटाइल = (रैंकिंग में आपके नीचे आए लोगों की संख्या/कंपटीशन में भाग लेने वाले लोगों की संख्या)*100 तो ऊपर के उदाहरण में:
प्रथम रैंक - (4/5)*100 - 80 पर्सेंटाइल द्वितीय रैंक - (3/5)*100 - 60 पर्सेंटाइल - आपकी पर्सेंटाइल तृतीय रैंक - (2/5)*100 - 40 पर्सेंटाइल चतुर्थ रैंक - (1/5)*100 - 20 पर्सेंटाइल पंचम रैंक - (0/5)*100 - 0 पर्सेंटाइल
गौर करें कि टॉप वाले की पर्सेंटाइल कभी भी 100 नहीं हो सकती. क्यूंकि कम से कम वो खुद तो अपने नीचे नहीं ही होगा.
# तो क्या गलत है ये कथन कि कैट में 20 लोगों ने 100 पर्सेंटाइल पाए?
हां भी और नहीं भी. आप नीचे के उदहारण से समझ जाएंगे: माना दो लोग कंपटीशन में थे तो टॉप करने वाले की पर्सेंटाइल क्या हुई - (1/2)*100 -
50 अब यदि सौ लोग कंपटीशन में हों तो टॉप करने वाले की पर्सेंटाइल हुई - (99/100)*100 -
99 हज़ार लोग कंपटीशन में हों तो टॉप करने वाले की पर्सेंटाइल हुई - (999/1000)*100 -
99.9 दस हज़ार लोग कंपटीशन में हों तो टॉप करने वाले की पर्सेंटाइल हुई - (9999/10000)*100 -
99.99 यानी जितने ज़्यादा लोग कंपटीशन में, टॉप करने वाले की पर्सेंटाइल उतनी ज़्यादा. तो बेशक टॉप करने वाले की पर्सेंटाइल कभी भी 100 नहीं होगी लेकिन ज्यों-ज्यों कंपटीशन में भाग लेने वालों की संख्या बढ़ती जाएगी, त्यों-त्यों पर्सेंटाइल 100 के करीब आ जाएगी. इतनी कि उसे राउंड फिगर में 100 लिखा जा सकता है. और इसलिए लिखा गया. अब इतनी सारी गणित का अंत करते हैं फिलॉसॉफ़ी के एक कोट से -
नथिंग इज़ हंड्रेड परसेंट, अर्थात कुछ भी सौ-फ़ीसदी नहीं!
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